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कौशाम्बी में पग-पग पर हैं भगवान
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Tue, 07 Mar 2017 12:02 AM IST
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kaushambi
जैनियों के 24 वें तीर्थंकर महावीर स्वामी के मंदिर पर लिखा है- ‘उत्तर तट पर सूर्यसूत के नृप कुशाम्भ कौशाम्बी नगरी है, धरमधूरी इस कौशाम्बी में जैन धर्म बिखरी है।’ ये शुक्ति अनायास नहीं लिखी गई है, बल्कि जैन धर्म गुुरुओं की हर साल मिलने वाली प्रतिमाएं इसे अक्षरश: साबित भी करती हैं। कौशाम्बी तपोस्थली में पग-पग पर भगवान की प्रतिमाएं मिलती हैं। ये यहां के लोग ही नहीं बल्कि पुरातत्व विभाग की ओर सर्वे के लिए आने वाले लोग भी मानते हैं। गुरुवार को भगवान पार्श्वनाथ की मूर्ति यमुना नदी के किनारे मिली थी। इसके पहले यहां दो खंडित मूर्तियां मिल चुकी हैं। ये सभी मूर्तियां जैन मंदिर में सुरक्षित रखवा दी गई हैं। इनकी देखरेख अब जैन मंदिर के पुजारी कर रहे हैं।
कौशाम्बी के कोसम ईनाम गांव के सामने यमुना नदी के तट पर गुरुवार को भगवान पार्श्वनाथ की मूर्ति मिली थी। भगवान पार्श्वनाथ जैनियों के 23 वें तीर्थंकर थे। करीब चार फिट ऊंची व तीन फिट चौड़ी यह मूर्ति मिली तो इतिहासकारों की नजर एक बार फिर कौशाम्बी में गड़ गई। इतिहासकारों ने बताया कि यह मूर्ति 12 सौ साल पुरानी है। बीएचयू के प्रोफेसर डॉ. एके द्विवेदी व डॉ. अर्पिता चटर्जी ने इसकी पुष्टि की थी। इस मूर्ति को महावीर स्वामी के मंदिर में रखा गया है। यहां दो अन्य खंडित मूर्तियां रखी हैं। यह मूर्तियां भी जैन धर्म गुरुओं की हैं। मूर्ति खंडित हैं, इसलिए यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि यह मूर्ति किस धर्म गुुरू की हैं। कौशाम्बी तपोस्थली में जैन धर्म गुरुओं का स्थल रहा है, यह यहां मिल रही प्रतिमाओं से सिद्ध होता है। इसके अलावा यहां 24 वें तीर्थंकर महावीर स्वामी ने तप किया था। चंदनबाला का उन्होंने यहीं उद्धार भी किया था। चंदनबाला महोत्सव यहां छह साल में एक बार मनाया जाता है। देश के कोने-कोने से यहां जैनी आते हैं।
जगह-जगह बिखरी पड़ी हैं मूर्तियां
कौशाम्बी के कोसम ईनाम के अलावा गढ़वा, छोटका गढ़वा, बड़का गढ़वा व आसपास के गांवों में जैन धर्मगुरुओं की मूर्तियां रखी हैं। स्थानीय लोगों ने मुताबिक अब तक सौ से अधिक मूर्तियां मिल चुकी हैं। कई खंडित मूर्तियों की लोग पूजा अभी भी करते हैं। इन मूर्तियों के छोटे-छोटे मंदिर भी गांवों में बनाए गए हैं।
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कई मूर्तियां हो चुकी हैं चोरी
कौशाम्बी तपोस्थली की सुरक्षा को हमेशा से खतरा रहा है। यहां जैन धर्म गुरुओं की कई प्रतिमाएं चोरी हो चुकी हैं। इन मूर्तियों की सुरक्षा का कोई विशेष प्रबंध नहीं है, इसलिए इनकी सुरक्षा नहीं हो पा रही है। कौशाम्बी तपोस्थली क्षेत्र में जगह-जगह मूर्तियां रखी हैं। मूर्तियों की चोरी की जानकारी पुलिस को दी गई थी, लेकिन अब तक एक भी मूर्ति नहीं बरामद हो सकी।
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कौशाम्बी के कोसम ईनाम गांव के सामने यमुना नदी के तट पर गुरुवार को भगवान पार्श्वनाथ की मूर्ति मिली थी। भगवान पार्श्वनाथ जैनियों के 23 वें तीर्थंकर थे। करीब चार फिट ऊंची व तीन फिट चौड़ी यह मूर्ति मिली तो इतिहासकारों की नजर एक बार फिर कौशाम्बी में गड़ गई। इतिहासकारों ने बताया कि यह मूर्ति 12 सौ साल पुरानी है। बीएचयू के प्रोफेसर डॉ. एके द्विवेदी व डॉ. अर्पिता चटर्जी ने इसकी पुष्टि की थी। इस मूर्ति को महावीर स्वामी के मंदिर में रखा गया है। यहां दो अन्य खंडित मूर्तियां रखी हैं। यह मूर्तियां भी जैन धर्म गुरुओं की हैं। मूर्ति खंडित हैं, इसलिए यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि यह मूर्ति किस धर्म गुुरू की हैं। कौशाम्बी तपोस्थली में जैन धर्म गुरुओं का स्थल रहा है, यह यहां मिल रही प्रतिमाओं से सिद्ध होता है। इसके अलावा यहां 24 वें तीर्थंकर महावीर स्वामी ने तप किया था। चंदनबाला का उन्होंने यहीं उद्धार भी किया था। चंदनबाला महोत्सव यहां छह साल में एक बार मनाया जाता है। देश के कोने-कोने से यहां जैनी आते हैं।
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जगह-जगह बिखरी पड़ी हैं मूर्तियां
कौशाम्बी के कोसम ईनाम के अलावा गढ़वा, छोटका गढ़वा, बड़का गढ़वा व आसपास के गांवों में जैन धर्मगुरुओं की मूर्तियां रखी हैं। स्थानीय लोगों ने मुताबिक अब तक सौ से अधिक मूर्तियां मिल चुकी हैं। कई खंडित मूर्तियों की लोग पूजा अभी भी करते हैं। इन मूर्तियों के छोटे-छोटे मंदिर भी गांवों में बनाए गए हैं।
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कई मूर्तियां हो चुकी हैं चोरी
कौशाम्बी तपोस्थली की सुरक्षा को हमेशा से खतरा रहा है। यहां जैन धर्म गुरुओं की कई प्रतिमाएं चोरी हो चुकी हैं। इन मूर्तियों की सुरक्षा का कोई विशेष प्रबंध नहीं है, इसलिए इनकी सुरक्षा नहीं हो पा रही है। कौशाम्बी तपोस्थली क्षेत्र में जगह-जगह मूर्तियां रखी हैं। मूर्तियों की चोरी की जानकारी पुलिस को दी गई थी, लेकिन अब तक एक भी मूर्ति नहीं बरामद हो सकी।