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Kaushambi News: दो साल पुराने जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी, पर तैनाती नहीं
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विकास
- फोटो : samvad
जिले की नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में दो हजार से अधिक जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के मामले लंबित हैं। दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में प्रमाणपत्र जारी करने के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य किए जाने के बाद निस्तारण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इस कार्य के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति नहीं होने से आवेदकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। किसी को पिता तो किसी को दादी का मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
उत्तर प्रदेश जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली में एक अक्तूबर से लागू संशोधन के तहत दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक है। पहले ऐसे प्रमाणपत्र एसडीएम के आदेश पर जारी हो जाते थे। अब एसडीएम का अधिकार क्षेत्र एक से दो वर्ष तक के मामलों तक सीमित कर दिया गया है।
पिता की मृत्यु के बाद नगर पालिका में आवेदन किया था। एक महीने बाद भी प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ है। इससे जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं। — कृष्ण लाल, भरवारी
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पिता ने 20 सितंबर को जन्म प्रमाणपत्र के लिए जरूरी अभिलेख जमा किए थे। इसके बावजूद नए नियमों का हवाला देकर प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया। — अश्विक पांडेय
दादी की मृत्यु को दो वर्ष से अधिक हो चुके हैं। सभी अभिलेख तैयार कराने के बाद नगर पालिका पहुंचे तो न्यायालय से आदेश लाने को कहा गया। इससे परेशानी हो रही है। — विकास, भरवारी
21 दिन में निशुल्क पंजीकरण
जन्म या मृत्यु की सूचना 21 दिन के भीतर देने पर पंजीकरण निशुल्क है। 21 से 30 दिन के भीतर पंजीकरण कराने पर 20 रुपये, 31 दिन से एक वर्ष तक 50 रुपये और एक से दो वर्ष तक 100 रुपये शुल्क निर्धारित है। दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में निर्धारित शुल्क के साथ प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक होगा।
वर्जन
शासन स्तर से जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के नियमों में बदलाव किया गया है। पहले एसडीएम की अनुमति से प्रमाणपत्र जारी होते थे, लेकिन अब दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी है। नियमों के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाएगी। इसके बाद जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र का कार्य नियमित कराया जाएगा। — डॉ. अमित पाल, डीएम
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उत्तर प्रदेश जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली में एक अक्तूबर से लागू संशोधन के तहत दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक है। पहले ऐसे प्रमाणपत्र एसडीएम के आदेश पर जारी हो जाते थे। अब एसडीएम का अधिकार क्षेत्र एक से दो वर्ष तक के मामलों तक सीमित कर दिया गया है।
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पिता की मृत्यु के बाद नगर पालिका में आवेदन किया था। एक महीने बाद भी प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ है। इससे जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं। — कृष्ण लाल, भरवारी
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पिता ने 20 सितंबर को जन्म प्रमाणपत्र के लिए जरूरी अभिलेख जमा किए थे। इसके बावजूद नए नियमों का हवाला देकर प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया। — अश्विक पांडेय
दादी की मृत्यु को दो वर्ष से अधिक हो चुके हैं। सभी अभिलेख तैयार कराने के बाद नगर पालिका पहुंचे तो न्यायालय से आदेश लाने को कहा गया। इससे परेशानी हो रही है। — विकास, भरवारी
21 दिन में निशुल्क पंजीकरण
जन्म या मृत्यु की सूचना 21 दिन के भीतर देने पर पंजीकरण निशुल्क है। 21 से 30 दिन के भीतर पंजीकरण कराने पर 20 रुपये, 31 दिन से एक वर्ष तक 50 रुपये और एक से दो वर्ष तक 100 रुपये शुल्क निर्धारित है। दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में निर्धारित शुल्क के साथ प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक होगा।
वर्जन
शासन स्तर से जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के नियमों में बदलाव किया गया है। पहले एसडीएम की अनुमति से प्रमाणपत्र जारी होते थे, लेकिन अब दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी है। नियमों के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाएगी। इसके बाद जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र का कार्य नियमित कराया जाएगा। — डॉ. अमित पाल, डीएम

विकास- फोटो : samvad

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