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Kaushambi News: पितृ पक्ष में 100 साल बाद पड़ेगा चंद्र ग्रहण व सूर्य ग्रहण
Fri, 05 Sep 2025 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Fri, 05 Sep 2025 01:04 AM IST
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इस बार सात सितंबर से शुरू हो रहे पितृ पक्ष में विशेष संयोग बन रहा है। सौ साल बाद पितृ पक्ष के पहले दिन सूर्य तो अंतिम चंद्र ग्रहण पड़ रहा है। शास्त्रों के मुताबिक, एक पक्ष में दो ग्रहण पड़ना अशुभ माना जाता है।
आश्विन (क्वार) मास की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से अमावस्या तक पितृ पक्ष कहलाता है। इस पक्ष में हिंदू समुदाय के लोग अपने पूर्वजों को श्राद्ध और तर्पण करते है।
हुबलाल संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य पं. ज्ञानेंद्र शास्त्री ने बताया कि लगभग 100 साल बाद विशेष संयोग बन रहा है। पितृपक्ष के दौरान चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण दोनों एक पक्ष में पड़ेंगे। ग्रहण की यह घटना पितरों की शांति, तर्पण और कर्मकांड को बेहद खास बनाएगी। जबकि, एक पक्ष में दो ग्रहण अशुभ माना जाता है। उन्होंने बताया कि पितृपक्ष की शुरुआत सात सितंबर से हो रही है।
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प्रतिपदा का श्राद्ध आठ सितंबर को होगा। इस बार नवमी तिथि की हानि हो रही है। पंचमी और षष्ठी तिथि का श्राद्ध 12 सितंबर को होगा। चंद्रग्रहण सात सितंबर को रात 9:57 बजे शुरू होगा और मोक्ष 1:27 बजे होगा। इसके नौ घंटे पूर्व सूतक काल की शुरुआत हो जाएगी। वहीं 21 सितंबर को पितृ विसर्जन पर सूर्यग्रहण पड़ रहा है।
सूर्य ग्रहण रात 11 बजे शुरू होगा और 22 सितंबर को सुबह 3:24 बजे खत्म होगा। हालांकि, सूर्य ग्रहण को भारत में नहीं देखा जा सकेगा। खास बात यह है कि चंद्रग्रहण व सूर्य ग्रहण पितरों के श्राद्ध और ग्रहण जैसी दो महत्वपूर्ण घटनाएं एक ही समय में घटित होंगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह संयोग बेहद दुर्लभ है और सौ साल बाद बन रहा है। इससे पितृ पक्ष का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
ग्रहणफल
राशि- फल
मेष - लाभ
वृष- सुख
मिथुन- माननाश
कर्क- मृत्युतुल्य कष्ट
सिंह- स्त्री पीड़ा
कन्या- सौख्य
तुला- चिंता
वृश्चिक- व्यथा
धनु- श्री
मकर- क्षति
कुंभ घात
मीन- हानि
एक पाख दो गहना, राजा मरै कि सहना
करारी। बुजुर्ग लक्ष्मी नारायण मिश्र ने बताया कि एक पक्ष में दो ग्रहण पड़ना अशुभ माना जाता है। उनके अनुसार, घाघ ने अपनी कविता में लिखा कि एक पाख दो गहना, राजा मरै कि सहना। यानी एक पक्ष में दो ग्रहण लगे तो राजा या प्रजा में से कोई एक मरेगा।
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आश्विन (क्वार) मास की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से अमावस्या तक पितृ पक्ष कहलाता है। इस पक्ष में हिंदू समुदाय के लोग अपने पूर्वजों को श्राद्ध और तर्पण करते है।
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हुबलाल संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य पं. ज्ञानेंद्र शास्त्री ने बताया कि लगभग 100 साल बाद विशेष संयोग बन रहा है। पितृपक्ष के दौरान चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण दोनों एक पक्ष में पड़ेंगे। ग्रहण की यह घटना पितरों की शांति, तर्पण और कर्मकांड को बेहद खास बनाएगी। जबकि, एक पक्ष में दो ग्रहण अशुभ माना जाता है। उन्होंने बताया कि पितृपक्ष की शुरुआत सात सितंबर से हो रही है।
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प्रतिपदा का श्राद्ध आठ सितंबर को होगा। इस बार नवमी तिथि की हानि हो रही है। पंचमी और षष्ठी तिथि का श्राद्ध 12 सितंबर को होगा। चंद्रग्रहण सात सितंबर को रात 9:57 बजे शुरू होगा और मोक्ष 1:27 बजे होगा। इसके नौ घंटे पूर्व सूतक काल की शुरुआत हो जाएगी। वहीं 21 सितंबर को पितृ विसर्जन पर सूर्यग्रहण पड़ रहा है।
सूर्य ग्रहण रात 11 बजे शुरू होगा और 22 सितंबर को सुबह 3:24 बजे खत्म होगा। हालांकि, सूर्य ग्रहण को भारत में नहीं देखा जा सकेगा। खास बात यह है कि चंद्रग्रहण व सूर्य ग्रहण पितरों के श्राद्ध और ग्रहण जैसी दो महत्वपूर्ण घटनाएं एक ही समय में घटित होंगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह संयोग बेहद दुर्लभ है और सौ साल बाद बन रहा है। इससे पितृ पक्ष का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
ग्रहणफल
राशि- फल
मेष - लाभ
वृष- सुख
मिथुन- माननाश
कर्क- मृत्युतुल्य कष्ट
सिंह- स्त्री पीड़ा
कन्या- सौख्य
तुला- चिंता
वृश्चिक- व्यथा
धनु- श्री
मकर- क्षति
कुंभ घात
मीन- हानि
एक पाख दो गहना, राजा मरै कि सहना
करारी। बुजुर्ग लक्ष्मी नारायण मिश्र ने बताया कि एक पक्ष में दो ग्रहण पड़ना अशुभ माना जाता है। उनके अनुसार, घाघ ने अपनी कविता में लिखा कि एक पाख दो गहना, राजा मरै कि सहना। यानी एक पक्ष में दो ग्रहण लगे तो राजा या प्रजा में से कोई एक मरेगा।