{"_id":"58d80c034f1c1b2b7d1a1805","slug":"lohia-awas-investigation-kaushambi","type":"story","status":"publish","title_hn":"डीएम को सौंपी गई लोहिया आवास घोटाले की जांच रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डीएम को सौंपी गई लोहिया आवास घोटाले की जांच रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 27 Mar 2017 12:17 AM IST
विज्ञापन
क्राइम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोहिया समग्र गांव अंधावा के आवास घोटाले की कंपाइल जांच रिपोर्ट शनिवार की शाम डीएम अखंड प्रताप सिंह को सौंप दी गई। रिपोर्ट में 23 अपात्रों के अलावा 33 आवासों के लाभार्थियों का पता तक नहीं है। इसके अलावा 127 लोहिया आवास का निर्माण आधा अधूरा कराते हुए धनराशि गबन करने का मामला शामिल है। जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपे जाने के बाद दो सचिवों सहित जांच समिति के पांच अफसरों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
विकास खंड सरसवां के अंधावा गांव का चयन वित्तीय वर्ष 13-14 में लोहिया समग्र गांव के रूप में हुआ था। चयन के बाद गांव के 528 गरीबों के लिए जिले स्तर से लोहिया आवास की रकम भेजी गई। ग्रामस्तर पर पात्रता सूची बनाए जाने के बाद उच्चाधिकारियों ने तीन अफसरों की टीम लगाकर जांच कराई। जांच टीम में तत्कालीन बीडीओ इंद्रबली, डीपीओ रामचंद्र व तहसीलदार मंझनपुर शामिल रहे। ग्राम सभा में तैनात सेक्रेटरी से लेकर उच्चाधिकारियों ने मानक को ताक पर रखकर आवास आवंटन किया। दिसंबर 2016 में मामला डीएम के संज्ञान में आया तो उन्होंने 25 दिसंबर को जिला स्तरीय 25 अधिकारियों की टीम लेकर गांव पहुंचे और बारीकी से छानबीन कराई।
अफसरों की जांच की संयुक्त रिपोर्ट तैयार करने का जिम्मा पीडी राजेश कुमार मिश्र को दिया गया। तीन माह का लंबा समय बीतने के बाद 25 मार्च को पीडी ने कंपाइल रिपोर्ट डीएम को सौंप दी। रिपोर्ट में 23 लाभार्थियों को अपात्र तो 33 के लापता होने का मामला दर्शाया गया है। इसके अलावा 127 आवास ऐसे हैं जिनका धन तो निकाल लिया गया पर निर्माण पूरा नहीं हो सका। डीएम को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद तत्कालीन सेक्रेटरी जय सिंह, राज किशोर भारती, एडीओ एसटी निखिल, बीडीओ इंद्रबली, कमलेश कुमार, डीपीओ रामचंद्र व तहसीलदार पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
विज्ञापन
जांच की आंच में झुलस सकते हैं उच्चाधिकारी
आंधावा ग्राम सभा में लोहिया आवास आवंटन घोटाले में तत्कालीन उच्चाधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। थोक के भाव एक ही गांव को दिए गए आवासों की पत्रावली में तत्कालीन डीएम सत्येंद्र कुमार, सीडीओ हरिशंकर उपाध्याय व पीडी अभिमन्यु सिंह भी झुलस सकते हैं। कार्रवाई की जद में खुद को आता देख आरोपियों में चर्चाओं का बाजार गरमाने लगा है। एक ही गांव को थोक के भाव दिए गए लोहिया आवास की पत्रावली में तत्कालीन पीडी से लेकर डीएम तक के हस्ताक्षर हैं। फिलहाल पीडी की रिपोर्ट में जिला स्तरीय तीनों अफसरों का नाम अभी शामिल नहीं है।
जिले से स्थानांतरित हो चुके हैं पांच अधिकारी
लोहिया आवास आवंटन घोटाले के जिम्मेदार दो सचिवों को छोड़ अधिकारियों का स्थानांतरण गैर जनपद हो चुका है। दोनो बीडीओ, एडीओ एसटी, डीपीओ और तहसीलदार वर्ष 2016 में मलाई काटने के बाद जिले से बाहर चले गए हैं।
जांच रिपोर्ट में जो भी दोषी पाया गया है, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। गायब 33 लाभार्थी कौन है इसका भी पता लगाया जाएगा। घोटाले में शामिल किसी भी कर्मचारी अधिकारी को बक्शा नहीं जाएगा। एक-दो दिन के भीतर कार्रवाई करा दी जाएगी।
अखंड प्रताप सिंह, डीएम
विज्ञापन
विकास खंड सरसवां के अंधावा गांव का चयन वित्तीय वर्ष 13-14 में लोहिया समग्र गांव के रूप में हुआ था। चयन के बाद गांव के 528 गरीबों के लिए जिले स्तर से लोहिया आवास की रकम भेजी गई। ग्रामस्तर पर पात्रता सूची बनाए जाने के बाद उच्चाधिकारियों ने तीन अफसरों की टीम लगाकर जांच कराई। जांच टीम में तत्कालीन बीडीओ इंद्रबली, डीपीओ रामचंद्र व तहसीलदार मंझनपुर शामिल रहे। ग्राम सभा में तैनात सेक्रेटरी से लेकर उच्चाधिकारियों ने मानक को ताक पर रखकर आवास आवंटन किया। दिसंबर 2016 में मामला डीएम के संज्ञान में आया तो उन्होंने 25 दिसंबर को जिला स्तरीय 25 अधिकारियों की टीम लेकर गांव पहुंचे और बारीकी से छानबीन कराई।
विज्ञापन
अफसरों की जांच की संयुक्त रिपोर्ट तैयार करने का जिम्मा पीडी राजेश कुमार मिश्र को दिया गया। तीन माह का लंबा समय बीतने के बाद 25 मार्च को पीडी ने कंपाइल रिपोर्ट डीएम को सौंप दी। रिपोर्ट में 23 लाभार्थियों को अपात्र तो 33 के लापता होने का मामला दर्शाया गया है। इसके अलावा 127 आवास ऐसे हैं जिनका धन तो निकाल लिया गया पर निर्माण पूरा नहीं हो सका। डीएम को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद तत्कालीन सेक्रेटरी जय सिंह, राज किशोर भारती, एडीओ एसटी निखिल, बीडीओ इंद्रबली, कमलेश कुमार, डीपीओ रामचंद्र व तहसीलदार पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
विज्ञापन
जांच की आंच में झुलस सकते हैं उच्चाधिकारी
आंधावा ग्राम सभा में लोहिया आवास आवंटन घोटाले में तत्कालीन उच्चाधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। थोक के भाव एक ही गांव को दिए गए आवासों की पत्रावली में तत्कालीन डीएम सत्येंद्र कुमार, सीडीओ हरिशंकर उपाध्याय व पीडी अभिमन्यु सिंह भी झुलस सकते हैं। कार्रवाई की जद में खुद को आता देख आरोपियों में चर्चाओं का बाजार गरमाने लगा है। एक ही गांव को थोक के भाव दिए गए लोहिया आवास की पत्रावली में तत्कालीन पीडी से लेकर डीएम तक के हस्ताक्षर हैं। फिलहाल पीडी की रिपोर्ट में जिला स्तरीय तीनों अफसरों का नाम अभी शामिल नहीं है।
जिले से स्थानांतरित हो चुके हैं पांच अधिकारी
लोहिया आवास आवंटन घोटाले के जिम्मेदार दो सचिवों को छोड़ अधिकारियों का स्थानांतरण गैर जनपद हो चुका है। दोनो बीडीओ, एडीओ एसटी, डीपीओ और तहसीलदार वर्ष 2016 में मलाई काटने के बाद जिले से बाहर चले गए हैं।
जांच रिपोर्ट में जो भी दोषी पाया गया है, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। गायब 33 लाभार्थी कौन है इसका भी पता लगाया जाएगा। घोटाले में शामिल किसी भी कर्मचारी अधिकारी को बक्शा नहीं जाएगा। एक-दो दिन के भीतर कार्रवाई करा दी जाएगी।
अखंड प्रताप सिंह, डीएम