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दूसरे दिन भी बैंकों में लटके रहे तालेए एटीएम का खजाना खाली
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lock hanging in banks, atm empoty on second day
- फोटो : KAUSHAMBI
निजीकरण समेत 14 सूत्रीय मांगों को लेकर बैंकों की दो दिवसीय हड़ताल का असर दूसरे दिन भी जिले में दिखा। जिले की 111 बैंक शाखाओं में तालाबंदी की स्थिति रही। मंगलवार को भी तकरीबन 20 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन प्रभावित हुआ। दो दिनों की हड़ताल में करीब 40 करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ है। लगातार चार दिनों की बंदी से ज्यादातर एटीएम बूथ खाली हो गए हैं। कस्बों में नकदी निकालने के लिए पहुंचे लोग एटीएम बूथों के चक्कर काटते रहे।
बैंक कर्मचारियों ने यूनाइटेड फोरम ऑफ आरआरबी यूनियंस के बैनर तले कलक्ट्रेट परिसर स्थित बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय परिसर में धरना दिया।
बड़ौद यूपी बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के संयोजक विक्रम कुमार श्रीवास्तव, क्षेत्रीय अध्यक्ष अनिल दत्ता, सचिव दानिश के अतिरिक्त हेमराज, ज्ञानेंद्र कुमार, सूरज कुमार, फारुख, रामयश भारतीय, सतीश सुरेला, अभिषेक, शिव मोहन, ज्ञान प्रकाश पुरोहित, सत्यम सोनी, विकास गुप्ता, नंदलाल प्रजापति, मतिउल्लाह, एसके सिंह, राजू यादव बृजेश आदि ने धरना स्थल पर सभा को संबोधित करते हुए बैंकों के निजीकरण का विरोध किया।
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वक्ताओं ने कहा कि निजीकरण किसी के हित में नहीं है। इससे रोजगार प्रभावित होगा। बाद में केंद्रीय वित्त मंत्री एवं वित्त सचिव को संबोधित ज्ञापन क्षेत्रीय प्रबंधक को सौंपा। इधर, लगातार चार दिनों की बैंकों की बंदी से लोग नकदी के लिए इधर-उधर भटकते रहे।
विभिन्न बैकों के जिले भर में संचालित 95 एटीएम बूथों में ज्यादातर मंगलवार को खाली रहे या फिर तकनीकी खराबी के कारण बंद रहे। त्योहारी सीजन में पैसों के लिए लोग काफी परेशान हुए। एलडीएम संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि मंगलवार को भी बैंकों की बंदी के कारण 20 करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ है।
ये रहीं मुख्य मांगे
-सार्वजानिक क्षेत्रों का निजीकरण रोका जाए।
-बड़े बकाएदारों से ऋणों की वसूली के लिए कठोर कानून बनाए जाए।
-निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया जाए।
-जानबूझकर ऋण न चुकाने को अपराध की श्रेणी में माना जाए।
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बैंक कर्मचारियों ने यूनाइटेड फोरम ऑफ आरआरबी यूनियंस के बैनर तले कलक्ट्रेट परिसर स्थित बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय परिसर में धरना दिया।
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बड़ौद यूपी बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के संयोजक विक्रम कुमार श्रीवास्तव, क्षेत्रीय अध्यक्ष अनिल दत्ता, सचिव दानिश के अतिरिक्त हेमराज, ज्ञानेंद्र कुमार, सूरज कुमार, फारुख, रामयश भारतीय, सतीश सुरेला, अभिषेक, शिव मोहन, ज्ञान प्रकाश पुरोहित, सत्यम सोनी, विकास गुप्ता, नंदलाल प्रजापति, मतिउल्लाह, एसके सिंह, राजू यादव बृजेश आदि ने धरना स्थल पर सभा को संबोधित करते हुए बैंकों के निजीकरण का विरोध किया।
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वक्ताओं ने कहा कि निजीकरण किसी के हित में नहीं है। इससे रोजगार प्रभावित होगा। बाद में केंद्रीय वित्त मंत्री एवं वित्त सचिव को संबोधित ज्ञापन क्षेत्रीय प्रबंधक को सौंपा। इधर, लगातार चार दिनों की बैंकों की बंदी से लोग नकदी के लिए इधर-उधर भटकते रहे।
विभिन्न बैकों के जिले भर में संचालित 95 एटीएम बूथों में ज्यादातर मंगलवार को खाली रहे या फिर तकनीकी खराबी के कारण बंद रहे। त्योहारी सीजन में पैसों के लिए लोग काफी परेशान हुए। एलडीएम संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि मंगलवार को भी बैंकों की बंदी के कारण 20 करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ है।
ये रहीं मुख्य मांगे
-सार्वजानिक क्षेत्रों का निजीकरण रोका जाए।
-बड़े बकाएदारों से ऋणों की वसूली के लिए कठोर कानून बनाए जाए।
-निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया जाए।
-जानबूझकर ऋण न चुकाने को अपराध की श्रेणी में माना जाए।

lock hanging in banks, atm empoty on second day- फोटो : KAUSHAMBI