{"_id":"6a2afd4bf5c5931eca0b8738","slug":"livestock-distressed-by-heat-and-humidity-milk-production-drops-kaushambi-news-c-261-1-kmb1011-142947-2026-06-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaushambi News: गर्मी और उमस से मवेशी बेहाल, घट गया दुग्ध उत्पादन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaushambi News: गर्मी और उमस से मवेशी बेहाल, घट गया दुग्ध उत्पादन
Thu, 11 Jun 2026 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Thu, 11 Jun 2026 11:54 PM IST
विज्ञापन
सुरसेनी गांव में पशुपालकों के घर बंधे दुधारू पशु स्रोत -संवाद
तपिश भरी गर्मी और उमस से आम जनजीवन के साथ-साथ मवेशी भी बेहाल हैं। भीषण गर्मी के कारण पशु दिनभर हांफते रहते हैं, जिससे उनकी सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। पशुपालकों के अनुसार दुधारू पशुओं का दूध 20 से 30 फीसदी तक कम हो गया है, जिससे उनकी चिंता बढ़ गई है।
21वीं पशु गणना के अनुसार जिले में करीब 6,47,313 पशु हैं, जिनमें 2,76,208 दुधारू पशु शामिल हैं। सुरसेनी गांव के पशुपालक नरेंद्र द्विवेदी ने बताया कि पहले उनकी सात गायें प्रतिदिन 45 लीटर दूध देती थीं, लेकिन अब उत्पादन घटकर 30 से 32 लीटर रह गया है।
वहीं टिकरा के लवकुश उपाध्याय ने बताया कि उनकी नौ गाय-भैंसों से पहले 55 लीटर दूध मिलता था, जो अब घटकर करीब 40 लीटर रह गया है।
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. पीके सिंह ने बताया कि लू और बढ़ती गर्मी से पशु सुस्त हो जाते हैं, खाना-पीना छोड़ देते हैं और गंभीर स्थिति में उनकी मौत भी हो सकती है। उन्होंने पशुपालकों को पशुओं को छाया में रखने, पर्याप्त पानी देने और धूप से बचाने की सलाह दी।
विज्ञापन
पशुओं को दिन में दो बार नहलाएं, हरा चारा और पर्याप्त पानी दें। टिनशेड या गर्म स्थानों पर न बांधें। उचित देखभाल और लू से बचाव कर दूध उत्पादन में गिरावट को काफी हद तक रोका जा सकता है। - डॉ. प्रभात गौतम, पशु चिकित्सक
विज्ञापन
21वीं पशु गणना के अनुसार जिले में करीब 6,47,313 पशु हैं, जिनमें 2,76,208 दुधारू पशु शामिल हैं। सुरसेनी गांव के पशुपालक नरेंद्र द्विवेदी ने बताया कि पहले उनकी सात गायें प्रतिदिन 45 लीटर दूध देती थीं, लेकिन अब उत्पादन घटकर 30 से 32 लीटर रह गया है।
विज्ञापन
वहीं टिकरा के लवकुश उपाध्याय ने बताया कि उनकी नौ गाय-भैंसों से पहले 55 लीटर दूध मिलता था, जो अब घटकर करीब 40 लीटर रह गया है।
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. पीके सिंह ने बताया कि लू और बढ़ती गर्मी से पशु सुस्त हो जाते हैं, खाना-पीना छोड़ देते हैं और गंभीर स्थिति में उनकी मौत भी हो सकती है। उन्होंने पशुपालकों को पशुओं को छाया में रखने, पर्याप्त पानी देने और धूप से बचाने की सलाह दी।
विज्ञापन
पशुओं को दिन में दो बार नहलाएं, हरा चारा और पर्याप्त पानी दें। टिनशेड या गर्म स्थानों पर न बांधें। उचित देखभाल और लू से बचाव कर दूध उत्पादन में गिरावट को काफी हद तक रोका जा सकता है। - डॉ. प्रभात गौतम, पशु चिकित्सक