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दोआबा के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी, रेफर किए जा रहे मरीज

Sat, 24 Apr 2021 01:01 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 24 Apr 2021 01:01 AM IST
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Lack of oxygen in Doaba hospitals, patients being referred
Lack of oxygen in Doaba hospitals, patients being referred
दोआबा के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी, रेफर किए जा रहे मरीज
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- निजी अस्पताल संचालक एक रात सिलिंडर लगाने में वसूल रहे पांच से सात हजार रुपये
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। जिले के निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी कमी है। हालात यह हैं कि अब 24 घंटे ऑक्सीजन देने के लिए अस्पताल संचालक पांच से सात हजार रुपये वसूल कर रहे हैं। कमोवेश यही हाल सरकारी अस्पतालों का भी है। जिला अस्पताल को छोड़कर किसी भी सीएचसी, पीएचसी में आम मरीज के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं है। नतीजन कोरोना के गंभीर रोगियों को रेफर किया जा रहा है। इसकी वजह से कोरोना से मरने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। आंकड़ों के अनुसार अप्रैल माह की शुरुआत से अब तक जिला मुख्यालय स्थित निजी अस्पतालों से 35 लोग रेफर किए जा चुके हैं। इसमें ज्यादातर की मौत हो गई। सभी को ऑक्सीजन की अत्यंत जरूरत थी।
मंझनपुर सहित जिले में 70 के करीब पंजीकृत निजी अस्पताल हैं। इन अस्पतालों में इन दिनों ऑक्सीजन का संकट खड़ा हो गया है। पांच सौ रुपये में मिलने वाला ऑक्सीजन सिलिंडर अस्पताल संचालकों को दो से ढाई हजार में मिल रहा है। नतीजतन निजी अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों को एक दिन के ऑक्सीजन के लिए पांच से सात हजार रुपये का खर्च वहन करना पड़ता है। इसके अलावा दवा आदि का खर्च अलग है। ऐसी हालत में गरीब लोग सिर्फ सरकारी अस्पतालों के लिए रेफर किए जाते हैं। जिला अस्पताल के अलावा दोआबा के किसी अस्पताल में आम मरीज के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं है। मुख्यालय स्थित निजी अस्पतालों से अब तक 35 मरीजों को रेफर किया जा चुका है। इसमें ज्यादातर मरीजों की बिना इलाज के ही मौत हो गई।
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फतेहपुर से आता है 1500 रुपये का सिलिंडर
मंझनपुर। मुख्यालय स्थित एक निजी अस्पताल संचालक ने बताया कि छोटा ऑक्सीजन का सिलिंडर प्रयागराज में पहले पांच सौ रुपये में मिल जाता था। इन दिनों दिक्कत होने के कारण फतेहपुर से 1500 रुपये में छोटे सिलिंडर का रिफिल कराना पड़ता है।
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सरकारी अस्पतालों में सिर्फ प्रसूता को मिलता है ऑक्सीजन
मंझनपुर। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिला अस्पताल सहित सीएचसी, पीएचसी में प्रसव कराने की व्यवस्था है। लेकिन सीएचसी, पीएचसी में सिर्फ प्रसव पीड़िताओं को ही जरूरत होने पर ऑक्सीजन दिया जाता है। बाकी के अन्य मरीज जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिए जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों ने बताया तो पीएचसी मूरतगंज में तीन ऑक्सीजन के सिलिंडर हैं। यह सिलिंडर सिर्फ प्रसव के दौरान आए जच्चा, बच्चा को ही दिया जाता है। सीएचसी कनैली में भी दो ऑक्सीजन के सिलिंडर हैं। यह सिलिंडर भी प्रसूताएं या फिर उसके नवजात के लिए ही रखे गए हैं। कमोवेश जिलेभर के सरकारी अस्पतालों का यही हाल है।
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जिला अस्पताल से भी रेफर किए जाते हैं मरीज
मंझनपुर। जिला अस्पताल में दस से ज्यादा नियुक्त चिकित्सक कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। इस समय जो हैं भी उन्हें कोरोना का खतरा सता रहा है। ऐसी हालत में कोई चिकित्सक अपनी देख रेख में मरीजों को भर्ती नहीं कर रहा। जनरल मरीजों को ही भर्ती किया जा रहा है। गंभीर रोगियों को प्रयागराज के लिए रेफर कर दिया जाता है।

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इनका कहना है
जिला अस्पताल में ऑक्सीजन की वजह से किसी तरह की दिक्कत नहीं आ रही। ओपीडी सहित इमरजेंसी सेवाओं को बाहर रखा गया है। जिले में कहीं से भी कोई गंभीर रोगी आता है तो उसका समुचित इलाज कराया जाता है। -डॉ. दीपक सेठ, सीएमएस जिला अस्पताल
सीएचसी, पीएचसी में ऑक्सीजन की कोई जरूरत नहीं रहती
मूरतगंज पीएचसी में 3 ऑक्सीजन सिलिंडर हैं, यहां केवल ओपीडी होती है और जब प्रसव होते हैं तो उनमें लगते हैं ऑक्सीजन
जिला अस्पताल में ऑक्सीजन की व्यवस्था भरपूर की गई है।।
कनैली सीएचसी में 2 ऑक्सीजन सिलिंडर हैं वहां भी केवल प्रसव के लिए रखते हैं
फतेहपुर में ऑक्सीजन रिफिलिंग का रेट 1500 रुपये है।।
कौशाम्बी में नहीं मिल रहा है।।
प्रयागराज में 500 रुपये है।।
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