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रसोइयों को न्यूनतम मजदूरी के बराबर मिले मानदेय
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 28 Feb 2016 11:38 PM IST
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न्यूनतम घोषित मजदूरी से भी कम मानदेय, नवीनीकरण की अनिवार्यता आदि मुद्दों पर रविवार को मंझनपुर में जुटी बेसिक शिक्षा विभाग की रसोइयों ने अपनी मुट्ठी तानी। शासन-प्रशासन पर अनदेखी और प्रधानों पर शोषण का इल्जाम लगाते हुए रसोइयों ने हक के लिए अब आरपार की जंग छेड़ने का एलान किया है।
प्राइमरी स्कूलों में बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन तैयार करने के लिए रसोइयों की नियुक्ति की गई है। इन्हें महीने में महज एक हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। मानदेय का भुगतान साल में सिर्फ 10 महीने होता है। स्कूल बंद रहने के दौरान मई, जून में इन्हें मानदेय नहीं दिया जाता है। वहीं नए शिक्षासत्र के दौरान जुलाई महीने में इन्हें नियुक्ति के लिए नवीनीकरण कराना अनिवार्य है। नवीनीकरण की अनिवार्यता, कम मानेदय आदि मुद्दों को लेकर रविवार को रसोइयों ने जिला मुख्यालय मंझनपुर में हुंकार भरी। जिले भर के विभिन्न स्कूलों में तैनात रसोइयों ने मंझनपुर ब्लॉक परिसर में बैठक करके समस्याओं का समाधान नहीं किए जाने पर गुस्सा जताया। रसोइयां संघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी राम सजीवन केवट ने कहा कि केंद्र सरकार ने 230 रुपये प्रतिदिन की दर से न्यूनतम मजदूरी तय कर रखी है।
पर, रसोइयों को रोजाना औसतन सिर्फ 33 रुपये का मानदेय दिया जा रहा है। इसका भुगतान भी साल में सिर्फ 10 महीने किया जाता है। शासन-प्रशासन की यह नीति रसोइयों का शोषण है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से रसोइयों की इस समस्या को जल्द दूर करने की मांग की। चेताया कि रसोइयां अब अपने हक के प्रति जाग गई हैं। अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो पूरे प्रदेश में इस लेकर आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस मौके पर जोगेंद्र राय, प्रीतम सिंह, राकेश कुमार सिंह, नत्थूलाल यादव, सुशीला देवी, तोहिदा, ज्ञानमति, मैना देवी, कमलेश कुमारी, सोनिया देवी, चमेला आदि आदि मौजूद रहीं।
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प्राइमरी स्कूलों में बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन तैयार करने के लिए रसोइयों की नियुक्ति की गई है। इन्हें महीने में महज एक हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। मानदेय का भुगतान साल में सिर्फ 10 महीने होता है। स्कूल बंद रहने के दौरान मई, जून में इन्हें मानदेय नहीं दिया जाता है। वहीं नए शिक्षासत्र के दौरान जुलाई महीने में इन्हें नियुक्ति के लिए नवीनीकरण कराना अनिवार्य है। नवीनीकरण की अनिवार्यता, कम मानेदय आदि मुद्दों को लेकर रविवार को रसोइयों ने जिला मुख्यालय मंझनपुर में हुंकार भरी। जिले भर के विभिन्न स्कूलों में तैनात रसोइयों ने मंझनपुर ब्लॉक परिसर में बैठक करके समस्याओं का समाधान नहीं किए जाने पर गुस्सा जताया। रसोइयां संघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी राम सजीवन केवट ने कहा कि केंद्र सरकार ने 230 रुपये प्रतिदिन की दर से न्यूनतम मजदूरी तय कर रखी है।
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पर, रसोइयों को रोजाना औसतन सिर्फ 33 रुपये का मानदेय दिया जा रहा है। इसका भुगतान भी साल में सिर्फ 10 महीने किया जाता है। शासन-प्रशासन की यह नीति रसोइयों का शोषण है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से रसोइयों की इस समस्या को जल्द दूर करने की मांग की। चेताया कि रसोइयां अब अपने हक के प्रति जाग गई हैं। अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो पूरे प्रदेश में इस लेकर आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस मौके पर जोगेंद्र राय, प्रीतम सिंह, राकेश कुमार सिंह, नत्थूलाल यादव, सुशीला देवी, तोहिदा, ज्ञानमति, मैना देवी, कमलेश कुमारी, सोनिया देवी, चमेला आदि आदि मौजूद रहीं।
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