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शारदीय नवरात्र : हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा
Sat, 10 Oct 2026 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sat, 10 Oct 2026 01:30 AM IST
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शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्तूबर से होगी। इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी और मुर्गे पर सवार होकर जाएंगी। अष्टमी तिथि में बढ़ोतरी होने के कारण इस बार नवरात्र 10 दिन का होगा। नवरात्र के लिए मंदिरों और पूजा पंडालों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। आचार्य दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि एक साल में चार नवरात्र होते हैं। इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्र के अलावा दो गुप्त नवरात्र शामिल हैं। शारदीय नवरात्र को धार्मिक मान्यता के अनुसार विशेष माना जाता है। इस बार नवरात्र 11 अक्तूबर से शुरू होकर 20 अक्तूबर को संपन्न होगा।
उन्होंने बताया कि रविवार को नवरात्र शुरू होने के कारण माता रानी का आगमन गज यानी हाथी पर माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार हाथी पर मां दुर्गा का आगमन सुख-समृद्धि, धन-धान्य में वृद्धि और अच्छी वर्षा का संकेत माना जाता है। आचार्य ने बताया कि इस बार नवरात्र का योग देश और दुनिया के लिए सुखदायक रहने की धार्मिक मान्यता है।
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कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त मुहूर्त:
कलश स्थापना के लिए 11 अक्टूबर को सुबह 6:20 बजे से 10:15 बजे तक रहेगा
अभिजित मुहूर्त:-- - 11:20बजे से 12:10बजे तक रहेगा
19 अक्तूबर की रात की जाएगी संधि पूजा पं. दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि नवरात्र में महाअष्टमी तिथि समाप्त और महानवमी तिथि के आरंभ को संधिकाल कहा जाता है। अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट में संधि पूजा होती है। संधि पूजा 19 अक्तूबर सोमवार को सुबह 10:27 बजे से 11:15 बजे तक रहेगी। मान्यता है कि इसी संधिकाल में माता दुर्गा ने चामुंडा रूप धारण कर चंड और मुंड असुरों का वध किया था।
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उन्होंने बताया कि रविवार को नवरात्र शुरू होने के कारण माता रानी का आगमन गज यानी हाथी पर माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार हाथी पर मां दुर्गा का आगमन सुख-समृद्धि, धन-धान्य में वृद्धि और अच्छी वर्षा का संकेत माना जाता है। आचार्य ने बताया कि इस बार नवरात्र का योग देश और दुनिया के लिए सुखदायक रहने की धार्मिक मान्यता है।
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कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त मुहूर्त:
कलश स्थापना के लिए 11 अक्टूबर को सुबह 6:20 बजे से 10:15 बजे तक रहेगा
अभिजित मुहूर्त:
19 अक्तूबर की रात की जाएगी संधि पूजा पं. दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि नवरात्र में महाअष्टमी तिथि समाप्त और महानवमी तिथि के आरंभ को संधिकाल कहा जाता है। अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट में संधि पूजा होती है। संधि पूजा 19 अक्तूबर सोमवार को सुबह 10:27 बजे से 11:15 बजे तक रहेगी। मान्यता है कि इसी संधिकाल में माता दुर्गा ने चामुंडा रूप धारण कर चंड और मुंड असुरों का वध किया था।
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