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घर बैठे सर्वे पर फूटा अन्नदाताओं का गुस्सा
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Fri, 17 Apr 2015 12:21 AM IST
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मंझनपुर (ब्यूरो)। आसमान से गिरी आफत से बर्बाद हुई फसलों के सर्वे में राजस्व कर्मियों की मनमानी पर किसानों का गुस्सा भी फूटने लगा है। घर बैठे बर्बादी का आंकलन किए जाने का आरोप लगाते हुए गुलामीपुर गांव के किसानों ने बृहस्पतिवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर नाराजगी जताई। डीएम से शिकायत करके कर्मचारियों को खेतों में भेजकर जांच कराने और बर्बादी के हिसाब से मुआवजा दिलाने की मांग की।
बता दें कि मार्च में हुई बेमौसम बारिश की मार से कराह रहे किसानों को सोमवार और मंगलवार की रात हुई मूसलाधार बारिश ने पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। दो रात हुई जोरदार बारिश से खेत तालाब बन गए हैं। पानी भरे खेतों में कटी हुई गेहूं की फसलें तैर रही हैं। किसानों का कहना है कि खेतों में इतना पानी भरा है कि सूखने तक अनाज और भूसा दोनों सड़ जाएगा। इससे अब किसानों को खेती से एक भी दाना मिलने की आस नहीं है। इधर, अन्नदाताओं को फसलों की बर्बादी पर सरकारी इमदाद मिलना ही आखिरी चारा है।
पर, राजस्व कर्मचारियों की मनमानी ऐसी है कि यह भी मिलना मुश्किल है। गुलामीपुर गांव के किसान रामलखन, मंदिया, मूलचंद्र, रामनरेश, धर्मपाल, रामदुलार, विजय सिंह पटेल, अखिलेश कुमार, शिवकुमार आदि ने बताया कि 15 दिन पहले जिलाधिकारी ने राजस्व निरीक्षक और लेखपालों को सर्वे का निर्देश दिया था। आरोप है कि अब तक उनके गांव के किसी भी किसान के खेत में जांच के लिए कोई कर्मचारी नहीं आया। पता चला कि सर्वे करके अफसरों ने शासन को रिपोर्ट भेज दी है। मुआवजे के लिए पैसा भी मांग लिया गया है।
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इतना सुनते ही बृहस्पतिवार को गुलामीपुर गांव के इन किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। राजस्व कर्मचारियों की मनमानी से तमतमाए किसान मंझनपुर आए और कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। डीएम को शिकायतीपत्र देकर कर्मचारियों को खेतों में भेजकर बर्बादी की जांच कराने और उसी के हिसाब से मदद दिलवाने की मांग की।
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बता दें कि मार्च में हुई बेमौसम बारिश की मार से कराह रहे किसानों को सोमवार और मंगलवार की रात हुई मूसलाधार बारिश ने पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। दो रात हुई जोरदार बारिश से खेत तालाब बन गए हैं। पानी भरे खेतों में कटी हुई गेहूं की फसलें तैर रही हैं। किसानों का कहना है कि खेतों में इतना पानी भरा है कि सूखने तक अनाज और भूसा दोनों सड़ जाएगा। इससे अब किसानों को खेती से एक भी दाना मिलने की आस नहीं है। इधर, अन्नदाताओं को फसलों की बर्बादी पर सरकारी इमदाद मिलना ही आखिरी चारा है।
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पर, राजस्व कर्मचारियों की मनमानी ऐसी है कि यह भी मिलना मुश्किल है। गुलामीपुर गांव के किसान रामलखन, मंदिया, मूलचंद्र, रामनरेश, धर्मपाल, रामदुलार, विजय सिंह पटेल, अखिलेश कुमार, शिवकुमार आदि ने बताया कि 15 दिन पहले जिलाधिकारी ने राजस्व निरीक्षक और लेखपालों को सर्वे का निर्देश दिया था। आरोप है कि अब तक उनके गांव के किसी भी किसान के खेत में जांच के लिए कोई कर्मचारी नहीं आया। पता चला कि सर्वे करके अफसरों ने शासन को रिपोर्ट भेज दी है। मुआवजे के लिए पैसा भी मांग लिया गया है।
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इतना सुनते ही बृहस्पतिवार को गुलामीपुर गांव के इन किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। राजस्व कर्मचारियों की मनमानी से तमतमाए किसान मंझनपुर आए और कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। डीएम को शिकायतीपत्र देकर कर्मचारियों को खेतों में भेजकर बर्बादी की जांच कराने और उसी के हिसाब से मदद दिलवाने की मांग की।