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कौशाम्बी के दधीचि की देह दान
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Sun, 04 Jan 2015 12:27 AM IST
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भरवारी (कौशाम्बी)। दो साल पहले मेडिकल कालेज इलाहाबाद को अपनी देह दान करने वाले गौरा (भरवारी) कस्बे के निवासी राजेंद्र प्रसाद साहू (64) का शुक्रवार की रात कानपुर में निधन हो गया। सुबह ही वह अपनी बेटी से मिलने उसकी ससुराल गए थे। देहावसान के बाद परिजनों ने शव को मेडिकल कालेज इलाहाबाद को सुपुर्द कर दिया।
कौशाम्बी की नगर पंचायत भरवारी के गौरा मोहल्ले के रहने वाले राजेंद्र प्रसाद साहू होम्योपैथ के चिकित्सक थे। उनके तीन बेटे प्रशांत, शशिकांत और रविकांत हैं। प्रशांत और शशिकांत दूसरे शहर में रहकर नौकरी करते हैं, जबकि सबसे छोटा बेटा रविकांत पिता के साथ भरवारी में ही रहता है। डॉक्टरी पेशे से जुड़े राजेंद्र प्रसाद ने वर्ष 2012 में मेडिकल कालेज इलाहाबाद पहुंचकर अपनी देह का दान कर दिया था। दो साल पहले देहदान करके भरवारी लौटने पर उन्होंने बताया था कि उनके संज्ञान में आया था कि मेडिकल कालेजों में मृत शरीरों की समस्या है।
इससे मेडिकल की पढ़ाई करने वालों को दिक्कत होती है। इसके बाद ही उनके मन में देह दान का विचार आया। फिर एक दिन वे मेडिकल कालेज इलाहाबाद जाकर अपने शरीर के दान का फार्म भर आए थे। साथ ही घर वालों को देहदान की जानकारी देते हुए कहा था कि उनकी मृत्यु के बाद उनके शरीर को मेडिकल कालेज इलाहाबाद के हवाले कर दिया जाए। उनके बेटे रविकांत ने बताया कि शुक्रवार की सुबह ही वे बेटी से मिलने उसकी ससुराल कानपुर गए थे। कानपुर पहुंचने के कुछ देर बाद ही अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। बेटी, दामाद उन्हें लेकर स्थानीय एक हास्पिटल में लेकर गए। जहां उनकी सांसें थम गईं। निधन की जानकारी बेटी ने घरवालों को दी। साथ ही परिजनों ने उनकी इच्छा के मुताबिक मेडिकल कालेज को सूचना दी। साथ ही परिजन उनके मृत शरीर को ले जाकर मेडिकल कालेज इलाहाबाद को दे दिया है।
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कौशाम्बी की नगर पंचायत भरवारी के गौरा मोहल्ले के रहने वाले राजेंद्र प्रसाद साहू होम्योपैथ के चिकित्सक थे। उनके तीन बेटे प्रशांत, शशिकांत और रविकांत हैं। प्रशांत और शशिकांत दूसरे शहर में रहकर नौकरी करते हैं, जबकि सबसे छोटा बेटा रविकांत पिता के साथ भरवारी में ही रहता है। डॉक्टरी पेशे से जुड़े राजेंद्र प्रसाद ने वर्ष 2012 में मेडिकल कालेज इलाहाबाद पहुंचकर अपनी देह का दान कर दिया था। दो साल पहले देहदान करके भरवारी लौटने पर उन्होंने बताया था कि उनके संज्ञान में आया था कि मेडिकल कालेजों में मृत शरीरों की समस्या है।
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इससे मेडिकल की पढ़ाई करने वालों को दिक्कत होती है। इसके बाद ही उनके मन में देह दान का विचार आया। फिर एक दिन वे मेडिकल कालेज इलाहाबाद जाकर अपने शरीर के दान का फार्म भर आए थे। साथ ही घर वालों को देहदान की जानकारी देते हुए कहा था कि उनकी मृत्यु के बाद उनके शरीर को मेडिकल कालेज इलाहाबाद के हवाले कर दिया जाए। उनके बेटे रविकांत ने बताया कि शुक्रवार की सुबह ही वे बेटी से मिलने उसकी ससुराल कानपुर गए थे। कानपुर पहुंचने के कुछ देर बाद ही अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। बेटी, दामाद उन्हें लेकर स्थानीय एक हास्पिटल में लेकर गए। जहां उनकी सांसें थम गईं। निधन की जानकारी बेटी ने घरवालों को दी। साथ ही परिजनों ने उनकी इच्छा के मुताबिक मेडिकल कालेज को सूचना दी। साथ ही परिजन उनके मृत शरीर को ले जाकर मेडिकल कालेज इलाहाबाद को दे दिया है।
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