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होटलों पर खप रहा नौनिहालों का बचपन
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Fri, 26 Dec 2014 12:39 AM IST
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मंझनपुर। बालश्रम में नौनिहालों का बचपन खप रहा है। कौशाम्बी में सैकड़ों बच्चे स्कूल छोड़ कर ईंट-भट्ठे, होटलों, ढाबों और मोटर गैराजों में काम कर रहे हैं। श्रम प्रवर्तन विभाग द्वारा जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। सालभर में सिर्फ दो दिन ही चायल क्षेत्र में दबिश देकर छह बच्चों को मुक्त कराकर विभाग ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। जिला श्रम प्रवर्तन अधिकारी का दावा है कि जल्द ही अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
कौशाम्बी में बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ाई छोड़कर बालश्रम में जुटे हैं। मंझनपुर समेत करारी, भरवारी, सरायअकिल, पश्चिमशरीरा, कटरा, महेवा, तिल्हापुर, कुंड्रावी चौराहा, चायल, मनौरी, पुरामुफ्ती, काजीपुर, सैनी, सिराथू, देवीगंज, अजुहा आदि कस्बों और गांवों में ईंट-भट्ठे, होटलों, गैराजों में नौनिहाल मजदूरी कर रहे हैं। मजदूरी का पैसा बचाने के लिए होटलों, ईंट-भट्ठों, मोटर गैराजों में बच्चों से काम लिया जाता है। हाईवे पर स्थिति ज्यादातर ढाबों में खाना परोसने, थाली धुलवाने आदि का कार्य लिया जा रहा है।
बच्चों के परिजन भी पैसों की लालच में बच्चों की पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करा रहे हैं। जिले में बालश्रम रोकने के लिए श्रम प्रर्वतन विभाग को जिम्मेदारी दी गई है। आरोप है कि महकमे द्वारा जांच के नाम पर महज खानापूर्ति की जाती है। सालभर में सरायअकिल क्षेत्र में दो बार दबिश देकर छह बच्चों को पकड़ा गया था। इसके बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। मामले में डीएम राजमणि यादव का कहना है कि श्रम प्रर्वतन अधिकारी को अभियान तेज करके जांच करने का निर्देश दिया गया है। शत्रुघ्न प्रसाद सिंह का कहना है कि बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराने के लिए जल्द ही अभियान चलाया जाएगा।
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ईंट-भट्ठों, होटल-ढाबों और मोटर गैराजों में काम करने वाले बालश्रमिकों को पकड़ने के बाद उम्र की जांच में भी खेल होता है। सूत्रों के मुताबिक अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों द्वारा सुविधाशुल्क लेकर बच्चों के बालिग होने की रिपोर्ट दी जाती है। इससे बालश्रम कराने वाले लोगों पर कार्रवाई नहीं हो पाती है। मामले में सीएमओ डॉ. आरके मिश्र ने बताया कि मामला गंभीर है। इस प्रकरण की गंभीरता से जांच कराई जाएगी।
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कौशाम्बी में बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ाई छोड़कर बालश्रम में जुटे हैं। मंझनपुर समेत करारी, भरवारी, सरायअकिल, पश्चिमशरीरा, कटरा, महेवा, तिल्हापुर, कुंड्रावी चौराहा, चायल, मनौरी, पुरामुफ्ती, काजीपुर, सैनी, सिराथू, देवीगंज, अजुहा आदि कस्बों और गांवों में ईंट-भट्ठे, होटलों, गैराजों में नौनिहाल मजदूरी कर रहे हैं। मजदूरी का पैसा बचाने के लिए होटलों, ईंट-भट्ठों, मोटर गैराजों में बच्चों से काम लिया जाता है। हाईवे पर स्थिति ज्यादातर ढाबों में खाना परोसने, थाली धुलवाने आदि का कार्य लिया जा रहा है।
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बच्चों के परिजन भी पैसों की लालच में बच्चों की पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करा रहे हैं। जिले में बालश्रम रोकने के लिए श्रम प्रर्वतन विभाग को जिम्मेदारी दी गई है। आरोप है कि महकमे द्वारा जांच के नाम पर महज खानापूर्ति की जाती है। सालभर में सरायअकिल क्षेत्र में दो बार दबिश देकर छह बच्चों को पकड़ा गया था। इसके बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। मामले में डीएम राजमणि यादव का कहना है कि श्रम प्रर्वतन अधिकारी को अभियान तेज करके जांच करने का निर्देश दिया गया है। शत्रुघ्न प्रसाद सिंह का कहना है कि बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराने के लिए जल्द ही अभियान चलाया जाएगा।
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ईंट-भट्ठों, होटल-ढाबों और मोटर गैराजों में काम करने वाले बालश्रमिकों को पकड़ने के बाद उम्र की जांच में भी खेल होता है। सूत्रों के मुताबिक अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों द्वारा सुविधाशुल्क लेकर बच्चों के बालिग होने की रिपोर्ट दी जाती है। इससे बालश्रम कराने वाले लोगों पर कार्रवाई नहीं हो पाती है। मामले में सीएमओ डॉ. आरके मिश्र ने बताया कि मामला गंभीर है। इस प्रकरण की गंभीरता से जांच कराई जाएगी।