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लंबी लड़ाई के बाद पीएसीएल निवेशकों में जगी उम्मीद

Wed, 06 Mar 2019 12:17 AM IST
shailendra Kumar अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी Published by: shailendra Kumar Updated Wed, 06 Mar 2019 12:17 AM IST
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पीएसीएल (पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के चिटफंड घोटाले के फेर में उलझे जिले के 50 हजार से अधिक  निवेशकों को पैसा वापस मिलने की उम्मीद जगी है। इसके लिए संघर्षरत संस्था ऑल इन्वेस्टर्स सेफ्टी ऑर्गेनाईजेशन के जिलाध्यक्ष रवि केसरवानी के अनुसार कंपनी के 10 हजार एजेंट जिले में सक्रिय थे। अगस्त 2014 में कंपनी बन्द हो गई और साढ़े चार साल बाद अब सेबी ने पैसा वापस करने की ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू कर दी है। मगर जटिल प्रकिया के चलते निवेशकों ने जिले भर में वाल रायटिंग के जरिए पहले पर्ल्स का भुगतान फिर मतदान की धमकी दी है।
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  13 फरवरी 1996 से शुरू हुई चिटफंड कंपनी पीएसीएल 22 अगस्त 2014 को बंद हो गई थी। कम्पनी ने जनता से कृषि और रियल एस्टेट कारोबार के नाम पर लाखों करोड़ का धन जुटाया। एक ही जमीन के टुकड़े पर कई निवेशकों के नाम बांड जारी करने के बाद नियामक बोर्ड भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने जांच में पाया कि कंपनी ने गैरकानूनी सामूहिक निवेश योजनाओं के जरिये धन जुटाया है। इस पर सेबी ने कंपनी को अपने कब्जे में लेकर कार्रवाई शुरू की। दो फरवरी 2016 को उच्चतम न्यायालय के आदेश पर सेबी ने एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया ताकि सभी निवेशकों को पीएसीएल की कुर्क संपत्तियों की बिक्री से धन लौटाया जा सके। सेबी की धीमी जांच प्रक्रिया से परेशान देशभर के लाखों निवेशकों ने दो से 11 फरवरी तक दिल्ली में धरना-प्रदर्शन कर सरकार का विरोध किया। इस प्रदर्शन में कौशाम्बी जिले से भी 700 निवेशक दिल्ली पहुंचे थे। निवेशकों के प्रदर्शन के बाद सेबी ने सभी ग्राहकों से क्लेम रिफंड के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू की। मगर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया जटिल होने के कारण ग्रामीण निवेशकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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प्रक्रिया में पॉलिसी बॉण्ड,0 पैन कार्ड, बैंक वेरिफिकेशन के साथ सालों तक जमा की गई सभी प्रीमियम की रसीद भी मांगी गई है। चुंकि समय काफी लंबा हो गया है। इसीलिए निवेशकों की अधिकतर प्रीमियम रसीदें गुम हो गई हैं। लिहाजा निवेशकों को दिक्कत हो रही है। समस्या को देखते हुए ऑल इन्वेस्टर्स सेफ्टी आर्गेनाईजेशन ने 25 फरवरी को देश भर में संचालित सेबी कार्यालयों का एक साथ घेराव किया। निवेशकों ने सेबी के अधिकारियों को ऑफलाइन पेमेंट, पैन कार्ड और बैंक वेरिफिकेशन के विरोध समेत 14 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन भी सौंपा था। इसके बाद सेबी के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों के सामने आकर उनकी मांगों पर विचार करने के लिए 10 दिन का समय मांगा था। सेबी द्वारा मांगा गया 10 दिन का समय आठ मार्च को पूरा होगा। मांगे पूरी नहीं होने पर निवेशकों ने देश भर में उग्र प्रदर्शन का एलान किया है। साथ ही लोकसभा चुनाव के बहिष्कार की धमकी दी है।
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