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अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में लगाई पदकों की झड़ी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Wed, 21 Jun 2017 01:14 AM IST
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kaushambi
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जुनून था...। कुछ कर दिखाने का जज्बा भी था। मौका मिला तो परिषदीय विद्यालयों के बच्चों ने कोई चूक नहीं की और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में तिरंगा पूरी शान से लहराया। साथ ही अपना व कौशाम्बी के नाम का डंका बजा दिया।
नेपाल के काठमांडू में हुई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कौशाम्बी के इन उदीयमान खिलाड़ियों ने ताइक्वांडों में शानदार प्रदर्शन कर पदकों की झड़ी लगा दी। तीन सोना, एक चांदी व तीन तांबे के मेडल हासिल किए हैं। इसके अलावा बैडमिंटन में भी तांबा हासिल करने में एक खिलाड़ी कामयाब रहा। यह खिलाड़ी मंगलवार की शाम को नेपाल से इलाहाबाद वापस आ गए हैं। वहां इनका भव्य स्वागत किया गया है।
परिषदीय विद्यालय अमुरा व पवैया के छात्र कोमल, कृष्णनन, कलश, वशिष्ठ गुप्ता, दीपक, दीपाली, सचिन व अदिल की टीम नेपाल के काठमांडू में आयोजित आईएससी वर्ल्ड गेम्स-2017 में खेलने के लिए गए थे। प्रतियोगिता 15 जून से 18 जून तक चली। इस प्रतियोगिता में साउथ एशिया के 20 देशों ने प्रतिभाग किया था। इन खिलाड़ियों के अलावा ताइक्वांडो में अंडर-17 में प्रतिभाग के लिए सचिन भार्गव, फैकलाज आलम और बैडमिंटन में अंडर-17 में आशीष सिंह खेलने गए थे। अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में इन खिलाड़ियों ने अपने खेल का नायाब प्रदर्शन किया।
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कोमल, कृष्णनन और सचिन भार्गव ने तीन गोल्ड जीते। सिल्वर पर वशिष्ठ गुप्ता ने कब्जा जमाया, जबकि दीपाली, कलश और फैकलाज को ब्राउंज से ही संतोष करना पड़ा। बैडमिंटन में आशीष ने सिंह ने अपना जलवा दिखाया और तांबा हासिल किया। अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 20 देशों के बीच कौशाम्बी के इन खिलाड़ियों ने तिरंगा शान से लहराया।
साथ ही अपने साथ कौशाम्बी का नाम भी रौशन किया। अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कौशाम्बी के खिलाड़ियों का अब तक का यह दूसरा सबसे बेहतरीन प्रदर्शन रहा है। इससे ताइक्वांडो के प्रशिक्षक हीरालाल एम कैथल गदगद हैं। उनका कहना है कि खिलाड़ियों में शुरू से ही गजब का उत्साह था। इन खिलाड़ियों में बहुत प्रतिभा है। अभी आगे और भी इंटरनेशनल गेम खेलेेंगे और कौशाम्बी का नाम रौशन करेंगे।
हैंडबाल टीम जाती तो और मिलते पदक
इंटरनेशनल गेम खेलने गई ताइक्वांडों व बैडमिंटन टीम के साथ हैंडबाल की टीम को भी नेपाल जाना था। ऐन वक्त टीम रुपये का इंतजाम न होने के कारण वहां नहीं जा सकी। इससे हैंडबाल टीम के खिलाड़ियों में भारी निराशा है। उन्हें साथियों के साथ न जाने का दुख है। प्रशिक्षक हीरालाल एम कैथल का कहना है कि यदि हैंडबाल टीम साथी होती तो बेशक पदक कौशाम्बी के खाते में और आते।
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नेपाल के काठमांडू में हुई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कौशाम्बी के इन उदीयमान खिलाड़ियों ने ताइक्वांडों में शानदार प्रदर्शन कर पदकों की झड़ी लगा दी। तीन सोना, एक चांदी व तीन तांबे के मेडल हासिल किए हैं। इसके अलावा बैडमिंटन में भी तांबा हासिल करने में एक खिलाड़ी कामयाब रहा। यह खिलाड़ी मंगलवार की शाम को नेपाल से इलाहाबाद वापस आ गए हैं। वहां इनका भव्य स्वागत किया गया है।
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परिषदीय विद्यालय अमुरा व पवैया के छात्र कोमल, कृष्णनन, कलश, वशिष्ठ गुप्ता, दीपक, दीपाली, सचिन व अदिल की टीम नेपाल के काठमांडू में आयोजित आईएससी वर्ल्ड गेम्स-2017 में खेलने के लिए गए थे। प्रतियोगिता 15 जून से 18 जून तक चली। इस प्रतियोगिता में साउथ एशिया के 20 देशों ने प्रतिभाग किया था। इन खिलाड़ियों के अलावा ताइक्वांडो में अंडर-17 में प्रतिभाग के लिए सचिन भार्गव, फैकलाज आलम और बैडमिंटन में अंडर-17 में आशीष सिंह खेलने गए थे। अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में इन खिलाड़ियों ने अपने खेल का नायाब प्रदर्शन किया।
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कोमल, कृष्णनन और सचिन भार्गव ने तीन गोल्ड जीते। सिल्वर पर वशिष्ठ गुप्ता ने कब्जा जमाया, जबकि दीपाली, कलश और फैकलाज को ब्राउंज से ही संतोष करना पड़ा। बैडमिंटन में आशीष ने सिंह ने अपना जलवा दिखाया और तांबा हासिल किया। अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 20 देशों के बीच कौशाम्बी के इन खिलाड़ियों ने तिरंगा शान से लहराया।
साथ ही अपने साथ कौशाम्बी का नाम भी रौशन किया। अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कौशाम्बी के खिलाड़ियों का अब तक का यह दूसरा सबसे बेहतरीन प्रदर्शन रहा है। इससे ताइक्वांडो के प्रशिक्षक हीरालाल एम कैथल गदगद हैं। उनका कहना है कि खिलाड़ियों में शुरू से ही गजब का उत्साह था। इन खिलाड़ियों में बहुत प्रतिभा है। अभी आगे और भी इंटरनेशनल गेम खेलेेंगे और कौशाम्बी का नाम रौशन करेंगे।
हैंडबाल टीम जाती तो और मिलते पदक
इंटरनेशनल गेम खेलने गई ताइक्वांडों व बैडमिंटन टीम के साथ हैंडबाल की टीम को भी नेपाल जाना था। ऐन वक्त टीम रुपये का इंतजाम न होने के कारण वहां नहीं जा सकी। इससे हैंडबाल टीम के खिलाड़ियों में भारी निराशा है। उन्हें साथियों के साथ न जाने का दुख है। प्रशिक्षक हीरालाल एम कैथल का कहना है कि यदि हैंडबाल टीम साथी होती तो बेशक पदक कौशाम्बी के खाते में और आते।