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Kaushambi News: इंद्रजीत बोले - एमपी-गुजरात व चंडीगढ़ की घटना के डर से दाखिल किया पर्चा
Fri, 03 May 2024 03:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Fri, 03 May 2024 03:51 AM IST
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कौशाम्बी संसदीय क्षेत्र से नामांकन के दौरान बृहस्पतिवार को सपा प्रत्याशी पुष्पेंद्र सरोज के साथ उनके पिता व पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज ने पर्चा दाखिल कर सभी को चौंका दिया। हालांकि, सपा महासचिव ने इसके पीछे पिछले दिनों एमपी-गुजरात व चंडीगढ़ में हुई घटनाओं का डर बताया।
सपा ने राष्ट्रीय महासचिव एवं मंझनपुर विधायक इंद्रजीत सरोज के बेटे पुष्पेंद्र सरोज को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है। पुष्पेंद्र के साथ नामांकन दाखिल करने के बाद कलक्ट्रेट से बाहर निकले सपा महासचिव को मीडिया ने घेरकर सवालों की झड़ी लगा दी। इस पर सपा महासचिव ने कहा कि पिछले दिनों सत्ताधारी दल भाजपा के इशारे पर गुजरात, मध्य प्रदेश व चंडीगढ़ में जो कुछ हुआ उस डर के कारण उन्होंने ऐसा किया है।
कहा कि यदि बेटे का पर्चा खारिज किया गया तो वह खुद चुनाव मैदान में आएंगे और जनता के आशीर्वाद से जीतेंगे। वहीं बेटे पुष्पेंद्र ने कहा कि उनका चुनाव जनता लड़ रही है। लोगों के बीच पहुंचने पर लगता है कि इस बार कौशाम्बी बदलाव की ओर आगे बढ़ रहा है। वह क्षेत्र की जनता के सम्मान की लड़ाई लड़ने के लिए मैदान में आए हैं।
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लंदन से शिक्षा के सवाल पर उन्होंने महात्मा गांधी, डॉ आंबेडकर की विदेश से शिक्षा के बाद देश में बदलाव की नींव रखने की ऐतिहासिक घटना से खुद को जोड़ा।
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सपा ने राष्ट्रीय महासचिव एवं मंझनपुर विधायक इंद्रजीत सरोज के बेटे पुष्पेंद्र सरोज को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है। पुष्पेंद्र के साथ नामांकन दाखिल करने के बाद कलक्ट्रेट से बाहर निकले सपा महासचिव को मीडिया ने घेरकर सवालों की झड़ी लगा दी। इस पर सपा महासचिव ने कहा कि पिछले दिनों सत्ताधारी दल भाजपा के इशारे पर गुजरात, मध्य प्रदेश व चंडीगढ़ में जो कुछ हुआ उस डर के कारण उन्होंने ऐसा किया है।
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कहा कि यदि बेटे का पर्चा खारिज किया गया तो वह खुद चुनाव मैदान में आएंगे और जनता के आशीर्वाद से जीतेंगे। वहीं बेटे पुष्पेंद्र ने कहा कि उनका चुनाव जनता लड़ रही है। लोगों के बीच पहुंचने पर लगता है कि इस बार कौशाम्बी बदलाव की ओर आगे बढ़ रहा है। वह क्षेत्र की जनता के सम्मान की लड़ाई लड़ने के लिए मैदान में आए हैं।
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लंदन से शिक्षा के सवाल पर उन्होंने महात्मा गांधी, डॉ आंबेडकर की विदेश से शिक्षा के बाद देश में बदलाव की नींव रखने की ऐतिहासिक घटना से खुद को जोड़ा।