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Kaushambi News: बढ़ता मानसिक दबाव महिलाओं में बढ़ा रहा अवसाद व चिड़चिड़ापन
Sat, 13 Dec 2025 01:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sat, 13 Dec 2025 01:44 AM IST
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जिला अस्पताल मेंं मरीज की जांच करते मनो रोग विशेषज्ञ डॉ. नितेश सिंह। संवाद
मंझनपुर। शादीशुदा महिलाएं घरेलू काम, बच्चों की देखभाल और पति व परिवार की अपेक्षाओं के बोझ तले लगातार मानसिक दबाव का सामना कर रही हैं। बिना रुके दिनभर काम करने वाली इन महिलाओं को न तो पर्याप्त नींद मिल पा रही है और न ही अपने लिए समय। इसका सीधा असर उनकी मानसिक सेहत पर पड़ रहा है। जिला अस्पताल की मनोरोग ओपीडी में वर्तमान समय में 50 फीसदी महिलाएं अवसाद से पीड़ित आ रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार कामकाजी महिलाओं को दोहरी जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही है ऐसे में ऑफिस और घर दोनों जगहों की अपेक्षाओं पर खरे उतरने का दबाव कामकाजी महिलाओं में अवसाद का कारण बन रही है।
अवसाद के कारण
मेडिकल कॉलेज के मनो रोग विशेषज्ञ डॉ. नितेश सिंह के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में अवसाद बढ़ने का सबसे बड़ा कारण महिलाओं की लगातार बढ़ती घरेलू जिम्मेदारियां, नींद पूरी न होना और पति या परिवार से भावनात्मक सहयोग की कमी है। संयुक्त परिवारों का दबाव, बच्चों की देखभाल और घर-बाहर दोनों मोर्चों को संभालने का तनाव उनकी मानसिक स्थिति को और कमजोर कर रहा है।
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अवसाद के लक्षण
क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. पंकज कोटार्या बताते हैं कि महिलाओं में चिड़चिड़ापन, गुस्सा, सिरदर्द, भूख कम लगना, थकान, नींद न आना, याददाश्त कमजोर होना और आत्मविश्वास में कमी अवसाद के सामान्य लक्षण हैं। गंभीर मामलों में महिलाएं खुद को बेकार महसूस करने लगती हैं और कई बार आत्महत्या जैसे कदम उठाने की स्थिति तक पहुंच जाती हैं।
डॉ. पंकज कोटार्या के अनुसार अवसाद तीन स्तरों माइल्ड, मॉडरेट और सीवियर में होता है। माइल्ड और मॉडरेट स्तर पर नियमित काउंसलिंग से महिलाएं 3 से 4 महीनों में ठीक हो सकती हैं। गंभीर स्तर पर दवाओं का सहारा लेना आवश्यक होता है। परिवार, विशेषकर पति का भावनात्मक और व्यवहारिक सहयोग महिलाओं की मानसिक सेहत सुधारने का सबसे बड़ा उपाय है।
दोहरी जिम्मेदारियों में काम को बोझ न समझें, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनाएं और समय प्रबंधन सीखें। -ममता काश्यप, किशोर न्याय बोर्ड सदस्य
बच्चे, परिवार और घरेलू कार्यों में सामंजस्य बैठाना मुश्किल होता है। इन सब जिम्मेदारियों के बीच खुद के लिए समय नहीं मिल पाता है लेकिन पति के सहयोग से सभी जिम्मेदारियों को अच्छे से निभा पा रही हूं यदि सहयोग ना मिलता तो बहुत परेशानी होती। अंजू देवी, गृहणी
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विशेषज्ञों के अनुसार कामकाजी महिलाओं को दोहरी जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही है ऐसे में ऑफिस और घर दोनों जगहों की अपेक्षाओं पर खरे उतरने का दबाव कामकाजी महिलाओं में अवसाद का कारण बन रही है।
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अवसाद के कारण
मेडिकल कॉलेज के मनो रोग विशेषज्ञ डॉ. नितेश सिंह के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में अवसाद बढ़ने का सबसे बड़ा कारण महिलाओं की लगातार बढ़ती घरेलू जिम्मेदारियां, नींद पूरी न होना और पति या परिवार से भावनात्मक सहयोग की कमी है। संयुक्त परिवारों का दबाव, बच्चों की देखभाल और घर-बाहर दोनों मोर्चों को संभालने का तनाव उनकी मानसिक स्थिति को और कमजोर कर रहा है।
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अवसाद के लक्षण
क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. पंकज कोटार्या बताते हैं कि महिलाओं में चिड़चिड़ापन, गुस्सा, सिरदर्द, भूख कम लगना, थकान, नींद न आना, याददाश्त कमजोर होना और आत्मविश्वास में कमी अवसाद के सामान्य लक्षण हैं। गंभीर मामलों में महिलाएं खुद को बेकार महसूस करने लगती हैं और कई बार आत्महत्या जैसे कदम उठाने की स्थिति तक पहुंच जाती हैं।
डॉ. पंकज कोटार्या के अनुसार अवसाद तीन स्तरों माइल्ड, मॉडरेट और सीवियर में होता है। माइल्ड और मॉडरेट स्तर पर नियमित काउंसलिंग से महिलाएं 3 से 4 महीनों में ठीक हो सकती हैं। गंभीर स्तर पर दवाओं का सहारा लेना आवश्यक होता है। परिवार, विशेषकर पति का भावनात्मक और व्यवहारिक सहयोग महिलाओं की मानसिक सेहत सुधारने का सबसे बड़ा उपाय है।
दोहरी जिम्मेदारियों में काम को बोझ न समझें, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनाएं और समय प्रबंधन सीखें। -ममता काश्यप, किशोर न्याय बोर्ड सदस्य
बच्चे, परिवार और घरेलू कार्यों में सामंजस्य बैठाना मुश्किल होता है। इन सब जिम्मेदारियों के बीच खुद के लिए समय नहीं मिल पाता है लेकिन पति के सहयोग से सभी जिम्मेदारियों को अच्छे से निभा पा रही हूं यदि सहयोग ना मिलता तो बहुत परेशानी होती। अंजू देवी, गृहणी

जिला अस्पताल मेंं मरीज की जांच करते मनो रोग विशेषज्ञ डॉ. नितेश सिंह। संवाद

जिला अस्पताल मेंं मरीज की जांच करते मनो रोग विशेषज्ञ डॉ. नितेश सिंह। संवाद

जिला अस्पताल मेंं मरीज की जांच करते मनो रोग विशेषज्ञ डॉ. नितेश सिंह। संवाद