{"_id":"66f49823e5b509d98d06a764","slug":"illegal-occupation-of-enemy-property-tehsil-administration-silent-kaushambi-news-c-261-1-kmb1003-116746-2024-09-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaushambi News: शत्रु संपत्ति के अवैध कब्जे, तहसील प्रशासन खामोश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaushambi News: शत्रु संपत्ति के अवैध कब्जे, तहसील प्रशासन खामोश
Thu, 26 Sep 2024 04:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Thu, 26 Sep 2024 04:39 AM IST
विज्ञापन
तहसील क्षेत्र के शेरगढ़ गांव में शत्रु संपत्ति पर 75 साल से अवैध कब्जे हैं। लेकिन, तहसील प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा है। मामले में बंदोबस्त, चकबंदी और राजस्व विभाग के अधिकारी जांच के नाम पर एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं।
सैयद सरांवा गांव निवासी मो. हारुन जमींदार थे। भारत-पाकिस्तान बंटवारे के दौरान उनके चार बेटों में से एक मो. अतहर पाकिस्तान चले गए थे। जबकि, मो. अफजल, मो. अकमल और मो. अमजद प्रयागराज में रहने लगे थे। चायल तहसील के राजस्व अभिलेख में शेरगढ़ गांव स्थित करीब 25 बीघे भूमि मो. अतहर के नाम दर्ज है। इसे शत्रु संपत्ति दर्ज करने के लिए शेरगढ़ ग्राम प्रधान अरविंद कुमार ने तहसील प्रशासन से लेकर जिलाधिकारी तक से शिकायत की। इसके बाद भी भूमि को शत्रु संपत्ति के नाम से दर्ज नहीं किया गया है। जबकि, 18 जुलाई 2022 को दी गई बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी की जांच आख्या पर 23 जुलाई 2022 को एडीएम एफआर ने एसडीएम चायल को यह जमीन शत्रु संपत्ति घोषित करने का निर्देश दिया था। गांव की चकबंदी प्रक्रिया अंतिम दौर में है। इसके बाद भी अभिलेख में यह भूमि अब तक शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज नहीं हुई है। करीब 75 साल से लोग इस शत्रु संपत्ति वाली भूमि पर काबिज हैं। ग्राम प्रधान अरविंद कुमार ने मामले की शिकायत डीएम, एसडीएम और बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी से की थी। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
-- -- -- -- -- -- --
ग्राम सभा चकबंदी प्रक्रिया में है। चकबंदी प्रक्रिया समाप्त होते ही मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
पुष्पेंद्र गौतम, तहसीलदार, चायल
विज्ञापन
सैयद सरांवा गांव निवासी मो. हारुन जमींदार थे। भारत-पाकिस्तान बंटवारे के दौरान उनके चार बेटों में से एक मो. अतहर पाकिस्तान चले गए थे। जबकि, मो. अफजल, मो. अकमल और मो. अमजद प्रयागराज में रहने लगे थे। चायल तहसील के राजस्व अभिलेख में शेरगढ़ गांव स्थित करीब 25 बीघे भूमि मो. अतहर के नाम दर्ज है। इसे शत्रु संपत्ति दर्ज करने के लिए शेरगढ़ ग्राम प्रधान अरविंद कुमार ने तहसील प्रशासन से लेकर जिलाधिकारी तक से शिकायत की। इसके बाद भी भूमि को शत्रु संपत्ति के नाम से दर्ज नहीं किया गया है। जबकि, 18 जुलाई 2022 को दी गई बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी की जांच आख्या पर 23 जुलाई 2022 को एडीएम एफआर ने एसडीएम चायल को यह जमीन शत्रु संपत्ति घोषित करने का निर्देश दिया था। गांव की चकबंदी प्रक्रिया अंतिम दौर में है। इसके बाद भी अभिलेख में यह भूमि अब तक शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज नहीं हुई है। करीब 75 साल से लोग इस शत्रु संपत्ति वाली भूमि पर काबिज हैं। ग्राम प्रधान अरविंद कुमार ने मामले की शिकायत डीएम, एसडीएम और बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी से की थी। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विज्ञापन
ग्राम सभा चकबंदी प्रक्रिया में है। चकबंदी प्रक्रिया समाप्त होते ही मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
पुष्पेंद्र गौतम, तहसीलदार, चायल