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जेल में बंदी की मौत पर मानवाधिकार आयोग सख्त
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Wed, 01 Jul 2015 01:39 AM IST
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मंझनपुर (ब्यूरो)। जिला कारागार में करीब छह महीने पहले बंदी की मौत के मामले को मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता से लिया है। मृतक के परिजनों की शिकायत के बाद आयोग के अध्यक्ष ने कारागार प्रशासन से रिपोर्ट मांगी थी। प्रभारी जेल अधीक्षक ने आयोग के अध्यक्ष को पत्र भेजकर सफाई दी है। खुद को पाक साफ ठहराने के लिए न्यायिक जांच में मिली क्लीन चिट को हथियार बनाया है।
बता दें कि मंझनपुर कोतवाली के कैनी गांव का रहने वाला कृष्ण कुमार मिश्रा (61) हत्या के आरोप में जिला कारागार में बंद था। जेल के भीतर 25 दिसंबर 2014 को उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। परिजनों ने विपक्षी से मिलकर जेल प्रशासन पर उसे पीट पीटकर मार डालने का आरोप लगाया था। परिवार वालों की शिकायत के बाद तत्कालीन डीएम ने घटना की न्यायिक जांच कराई थी।
हालांकि इस जांच में जेल प्रशासन को क्लीन चिट मिल गई। इसके बाद परिजनों ने जेल अफसरों के खिलाफ मानवाधिकार आयोग में शिकायत की। आयोग के अध्यक्ष ने गंभीरता से ले लिया है। उन्होंने कारागार प्रशासन को पत्र भेजकर बंदी की मौत कारण पूछा है। आरोपों के बारे में भी स्पष्टीकरण मांगा है। प्रभारी जेल अधीक्षक ने आयोग को पत्र भेजकर सफाई दी है। पत्र में उन्होंने न्यायिक जांच में मिली क्लीन चिट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए बंदी की मौत का कारण बीमारी को बताया है। मृतक के घर वालों के आरोपों को निराधार बताया है।
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बता दें कि मंझनपुर कोतवाली के कैनी गांव का रहने वाला कृष्ण कुमार मिश्रा (61) हत्या के आरोप में जिला कारागार में बंद था। जेल के भीतर 25 दिसंबर 2014 को उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। परिजनों ने विपक्षी से मिलकर जेल प्रशासन पर उसे पीट पीटकर मार डालने का आरोप लगाया था। परिवार वालों की शिकायत के बाद तत्कालीन डीएम ने घटना की न्यायिक जांच कराई थी।
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हालांकि इस जांच में जेल प्रशासन को क्लीन चिट मिल गई। इसके बाद परिजनों ने जेल अफसरों के खिलाफ मानवाधिकार आयोग में शिकायत की। आयोग के अध्यक्ष ने गंभीरता से ले लिया है। उन्होंने कारागार प्रशासन को पत्र भेजकर बंदी की मौत कारण पूछा है। आरोपों के बारे में भी स्पष्टीकरण मांगा है। प्रभारी जेल अधीक्षक ने आयोग को पत्र भेजकर सफाई दी है। पत्र में उन्होंने न्यायिक जांच में मिली क्लीन चिट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए बंदी की मौत का कारण बीमारी को बताया है। मृतक के घर वालों के आरोपों को निराधार बताया है।
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