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दोआबा से भी गायब हैं ऐतिहासिक धरोहरें
कौशाम्बी ब्यूरो
Updated Mon, 15 Jan 2018 11:05 PM IST
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गंगा-यमुना के मध्य बसे कौशाम्बी जिले सेे भी कई ऐतिहासिक धरोहरें गायब हैं। बौद्धकालीन इन धरोहरों का यहां अब कहीं कोई नामोनिशान तक नहीं है। लापता विरासतों का मामला संसद में उठने के बाद एएसआई ने देश की 24 धरोहरों को खोजना शुरू कर दिया है। अफसोस की जिले की गुम विरासतों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है।
कौशाम्बी जिले का इतिहास काफी स्वर्णिम रहा है। जानकारों के मुताबिक छठी शताब्दी ईशा पूर्व में बौद्ध धर्म गुरु महात्मा बुद्ध यहां आए थे। उन्होंने दोआबा में चौमासा गुजारा था। उस वक्त उनके पूजा-पाठ करने के लिए तत्कालीन राजा महाराज उदयन के मंत्री रहे घोषिताराम, बद्रिकाराम, कुक्कुटाराम और पवरिकाराम ने अपने-आने नामों से अलग-अलग चार विहार बनवाए थे। घोषिताराम विहार अभी भी मौजूद है। पर, बाकी तीन विहारों का अता-पता नहीं है।
दिल्ली विश्वविद्यालय की शोध छात्रा नेहा सिंह का मानना है कि लापता हुए विहार भी घोषिताराम विहार के आसपास ही कहीं बनवाए गए रहे होंगे। पर, उपेक्षा और जानकारी के अभाव में यह गायब हो गए। भारतीय पुरातत्व विभाग कोशिश करे तो इनको खोजा जा सकता है।
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कौशाम्बी जिले का इतिहास काफी स्वर्णिम रहा है। जानकारों के मुताबिक छठी शताब्दी ईशा पूर्व में बौद्ध धर्म गुरु महात्मा बुद्ध यहां आए थे। उन्होंने दोआबा में चौमासा गुजारा था। उस वक्त उनके पूजा-पाठ करने के लिए तत्कालीन राजा महाराज उदयन के मंत्री रहे घोषिताराम, बद्रिकाराम, कुक्कुटाराम और पवरिकाराम ने अपने-आने नामों से अलग-अलग चार विहार बनवाए थे। घोषिताराम विहार अभी भी मौजूद है। पर, बाकी तीन विहारों का अता-पता नहीं है।
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दिल्ली विश्वविद्यालय की शोध छात्रा नेहा सिंह का मानना है कि लापता हुए विहार भी घोषिताराम विहार के आसपास ही कहीं बनवाए गए रहे होंगे। पर, उपेक्षा और जानकारी के अभाव में यह गायब हो गए। भारतीय पुरातत्व विभाग कोशिश करे तो इनको खोजा जा सकता है।
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