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आम आदमी का स्वाद बिगाड़ रही सब्जियों की कीमत
कौशाम्बी ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jan 2018 12:44 AM IST
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जिले के फुटकर बाजार में पखवारे भर के भीतर सब्जियों की कीमत डेढ़ से दो गुना तक बढ़ गई है। लोग आलू से ही काम चला रहे हैं। सब्जियों के दाम माघ मेले की वजह से बढ़े हैं। यह स्थिति अभी 15 दिनों तक बनी रहेगी।
पड़ोसी जनपद इलाहाबाद में चल रहे माघ मेला का असर कौशाम्बी के सब्जी बाजार पर साफ दिख रहा है। माघ मेला में खपत की वजह से यहां के फुटकर बाजार में पखवारे भर के भीतर सब्जियों की आवक कम हो गई है। ज्यादातर सब्जियां मेले में ही भेजी जा रही हैं। इसी के चलते सब्जियों के दाम डेढ़ से दो गुना बढ़े हैं।
पिछले साल अक्तूबर से सब्जियों की कीमत में हुई बढ़ोतरी दिसंबर महीने के अंत तक सामान्य हो गई थी। रसोई में बैगन, टमाटर, प्याज, फूल गोभी, पत्ता गोभी व मटर की सब्जियों का लोग भरपूर जायका लेने लगे थे। पर, माघ मेला के चलते नए साल लगते ही सब्जियों की कीमत में एक बार फिर उछाल आना शुरू हो गया।
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आलू को छोड़ मौसमी सब्जियों की कीमत में डेढ़ से दोगुना दाम का उछाल आ गया। सबसे अधिक मंहगाई मटर, टमाटर, प्याज, पत्ता गोभी, फूल गोभी, मिर्च व सेम में देखने को मिल रही है। ऐसे में लोग रसोई का जायका भूलकर आलू, गाजर व पत्ता गोभी की सब्जी का सहारा लेने लगे हैं। इसके चलते सामान्य लोगों की थाली का जायका एक बार फिर बिगड़ गया है। कारोबारियों का कहना है कि माघ मेले में सब्जी की खपत अधिक होने के कारण फुटकर में यह उछाल आया है। थोक भाव में कुछ खास बढ़ोत्तरी नहीं हुई है।
बिचौलिए उठा रहे बढ़ी कीमत का फायदा
सब्जियों के बढ़े दाम का फायदा किसानों को नहीं मिल पा रहा है। इसका भरपूर लाभ बिचौलिए उठा रहे हैं। मंडी में गोभी, प्याज, टमाटर, मिर्च व सेम आदि की कीमत लगभग जस की तस है। इलाहाबाद मुंडेरा मंडी के आढ़ती लाल मोहम्मद की मानें तो प्याज 22 से 25 सौ रुपए क्विंटल है। पर, आम उपभोक्ताओं को यह 40 रुपये किलो में बेंची जा रही है। यही हाल अन्य सब्जियों का भी है। आलू की कीमत में महंगाई का असर इसलिए नहीं हो रहा है क्योंकि, गांवों में अधिकतर लोगों के पास आलू उपलब्ध है। बढ़े दामों का लाभ न तो किसानों को मिल रहा है और न ही थोक कारोबारियों को। इसका पूरा लाभ बिचौलिए उठा रहे हैं। इन पर अंकुश लगाने के लिए शासन-प्रशासन कुछ ठोस कदम भी नहीं उठा पा रहा है।
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पड़ोसी जनपद इलाहाबाद में चल रहे माघ मेला का असर कौशाम्बी के सब्जी बाजार पर साफ दिख रहा है। माघ मेला में खपत की वजह से यहां के फुटकर बाजार में पखवारे भर के भीतर सब्जियों की आवक कम हो गई है। ज्यादातर सब्जियां मेले में ही भेजी जा रही हैं। इसी के चलते सब्जियों के दाम डेढ़ से दो गुना बढ़े हैं।
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पिछले साल अक्तूबर से सब्जियों की कीमत में हुई बढ़ोतरी दिसंबर महीने के अंत तक सामान्य हो गई थी। रसोई में बैगन, टमाटर, प्याज, फूल गोभी, पत्ता गोभी व मटर की सब्जियों का लोग भरपूर जायका लेने लगे थे। पर, माघ मेला के चलते नए साल लगते ही सब्जियों की कीमत में एक बार फिर उछाल आना शुरू हो गया।
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आलू को छोड़ मौसमी सब्जियों की कीमत में डेढ़ से दोगुना दाम का उछाल आ गया। सबसे अधिक मंहगाई मटर, टमाटर, प्याज, पत्ता गोभी, फूल गोभी, मिर्च व सेम में देखने को मिल रही है। ऐसे में लोग रसोई का जायका भूलकर आलू, गाजर व पत्ता गोभी की सब्जी का सहारा लेने लगे हैं। इसके चलते सामान्य लोगों की थाली का जायका एक बार फिर बिगड़ गया है। कारोबारियों का कहना है कि माघ मेले में सब्जी की खपत अधिक होने के कारण फुटकर में यह उछाल आया है। थोक भाव में कुछ खास बढ़ोत्तरी नहीं हुई है।
बिचौलिए उठा रहे बढ़ी कीमत का फायदा
सब्जियों के बढ़े दाम का फायदा किसानों को नहीं मिल पा रहा है। इसका भरपूर लाभ बिचौलिए उठा रहे हैं। मंडी में गोभी, प्याज, टमाटर, मिर्च व सेम आदि की कीमत लगभग जस की तस है। इलाहाबाद मुंडेरा मंडी के आढ़ती लाल मोहम्मद की मानें तो प्याज 22 से 25 सौ रुपए क्विंटल है। पर, आम उपभोक्ताओं को यह 40 रुपये किलो में बेंची जा रही है। यही हाल अन्य सब्जियों का भी है। आलू की कीमत में महंगाई का असर इसलिए नहीं हो रहा है क्योंकि, गांवों में अधिकतर लोगों के पास आलू उपलब्ध है। बढ़े दामों का लाभ न तो किसानों को मिल रहा है और न ही थोक कारोबारियों को। इसका पूरा लाभ बिचौलिए उठा रहे हैं। इन पर अंकुश लगाने के लिए शासन-प्रशासन कुछ ठोस कदम भी नहीं उठा पा रहा है।