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खतरे में ऐतिहासिक नगरी कौशाम्बी की विरासतें
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Sat, 10 Nov 2018 11:55 PM IST
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buddha
- फोटो : buddha
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तथागत बुद्ध की तपस्थली एवं वत्स राज उदयन की राजधानी कौशाम्बी का इतिहास के तीनों काल खंडों में विशेष महत्व रहा है। यहां ऐतिहासिक धरोहरों के भग्नावशेष आज भी मौजूद हैं। पर, संरक्षण के अभाव में समृद्धशाली विरासतें खतरे में हैं। ऐतिहासिक धरोहरों से अराजक तत्व छेड़छाड़ कर नष्ट कर रहे हैं। ऐसे में वक्त रहते पुरातत्विक धरोहरों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया तो बुद्ध नगरी की पहचान संकट में पड़ जाएगी।
कौशाम्बी में घोषिता राम बिहार, राजा उदयन का किला एवं अशोक स्तंभ के अवशेष सरीखी तमाम बेसकीमती धरोहरों के अवशेष मौजूद हैं। देश-विदेश में मौजूद धर्मानुयायी पूरे साल धरोहरों को निहारने आते हैं। समृद्धशाली धरोहरों एवं जैन-बौद्ध मंदिर की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने यूपी 100 बाइक पुलिस की तैनात भी कर रखी है, लेकिन पुरातत्व विभाग की अनदेखी से सदियों पुरानी धरोहरें नष्ट होती जा रही है। दरअसल इन स्थलों पर छुट्टा मवेशी रात-दिन घुमते रहते हैं। इसके अलावा स्थानीय अराजक तत्व भी भग्नावशेषों की ईंटें उखाड़ दे रहे हैं।
जगह-जगह ईंटें उखड़ रही हैं। उदयन पैलेस की चहारदीवारी व किला तक जाने वाला मार्ग भी अपना अस्तित्व को खोता जा रहा है। घोषिताराम बिहार की ईंटें स्थानीय लोगों द्वारा गायब की जा रही हैं। समय रहते पुरातत्विक धरोहर की सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया तो ऐतिहासिक पहचान मिट जाएगी। जैन मंदिर के प्रबंधक दिनेश जैन व श्रीलंका राम बुद्ध बिहार के प्रबंधक टी विशुद्धि थेरो ने शासन-प्रशासन से बौद्ध धरोहरों के सुरक्षा की मांग की है।
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कौशाम्बी में ऐतिहासिक अशोक की लाट के अवशेष आज भी मौजूद हैं। देश-विदेश के हजारों पर्यटक इसे देखने आते हैं। सरकार ने इसके संरक्षण के लिए एक दसक पहले लोहे की बैरिकेटिंग करवा दिया था। पर, देखरेख के अभाव में चोर बैरिकेडिंग में लगे लोहे को काट ले गए हैं।
इनका कहना है
पुरातत्व अवशेषों के नष्ट करने का मामला गंभीर है, लेकिन अभी हाल ही चार्ज लिया है। इसलिए जानकारी नहीं है। अगले हफ्ते कौशाम्बी का दौरा कर पुरातत्व अवशेषों का निरीक्षण कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पंकज तिवारी-अधीक्षक पुरातत्व विभाग इलाहाबाद
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कौशाम्बी में घोषिता राम बिहार, राजा उदयन का किला एवं अशोक स्तंभ के अवशेष सरीखी तमाम बेसकीमती धरोहरों के अवशेष मौजूद हैं। देश-विदेश में मौजूद धर्मानुयायी पूरे साल धरोहरों को निहारने आते हैं। समृद्धशाली धरोहरों एवं जैन-बौद्ध मंदिर की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने यूपी 100 बाइक पुलिस की तैनात भी कर रखी है, लेकिन पुरातत्व विभाग की अनदेखी से सदियों पुरानी धरोहरें नष्ट होती जा रही है। दरअसल इन स्थलों पर छुट्टा मवेशी रात-दिन घुमते रहते हैं। इसके अलावा स्थानीय अराजक तत्व भी भग्नावशेषों की ईंटें उखाड़ दे रहे हैं।
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जगह-जगह ईंटें उखड़ रही हैं। उदयन पैलेस की चहारदीवारी व किला तक जाने वाला मार्ग भी अपना अस्तित्व को खोता जा रहा है। घोषिताराम बिहार की ईंटें स्थानीय लोगों द्वारा गायब की जा रही हैं। समय रहते पुरातत्विक धरोहर की सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया तो ऐतिहासिक पहचान मिट जाएगी। जैन मंदिर के प्रबंधक दिनेश जैन व श्रीलंका राम बुद्ध बिहार के प्रबंधक टी विशुद्धि थेरो ने शासन-प्रशासन से बौद्ध धरोहरों के सुरक्षा की मांग की है।
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कौशाम्बी में ऐतिहासिक अशोक की लाट के अवशेष आज भी मौजूद हैं। देश-विदेश के हजारों पर्यटक इसे देखने आते हैं। सरकार ने इसके संरक्षण के लिए एक दसक पहले लोहे की बैरिकेटिंग करवा दिया था। पर, देखरेख के अभाव में चोर बैरिकेडिंग में लगे लोहे को काट ले गए हैं।
इनका कहना है
पुरातत्व अवशेषों के नष्ट करने का मामला गंभीर है, लेकिन अभी हाल ही चार्ज लिया है। इसलिए जानकारी नहीं है। अगले हफ्ते कौशाम्बी का दौरा कर पुरातत्व अवशेषों का निरीक्षण कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पंकज तिवारी-अधीक्षक पुरातत्व विभाग इलाहाबाद