{"_id":"58a49c984f1c1bd357d83e84","slug":"gram-pradhan-kaushambi","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रधानों के सहारे सियासी समीकरण साध रहे प्रत्याशी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रधानों के सहारे सियासी समीकरण साध रहे प्रत्याशी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Wed, 15 Feb 2017 11:57 PM IST
विज्ञापन
other
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विधानसभा चुनावों में प्रधान अहम भूमिका निभाने जा रहे हैं। राजनीतिक दलों का मानना है कि गांव का मुखिया होने के नाते प्रधान वोटरों की चाल बदल सकते हैं। यही कारण है कि वह प्रधानों को अपने-अपने पाले में खड़ा कर चुनावी मैदान मारने की कोशिश कर रहे हैं। सियासी चौसर पर ऐन वक्त इनकी बदली हुई भूमिका ने किसी को चौंकाया है तो किसी को राहत दी है।
विधानसभा चुनाव में जिले के 498 ग्राम प्रधान सियासत का एक बड़ा हिस्सा बनेंगे। पहले भी ऐसा होता रहा है। गांव के मतदाताओं को साधे रखने की जिम्मेदारी राजनीतिक दल इन्हीं के हवाले करते रहे हैं। इनकी भूमिका को देखते हुए उम्मीदवारों ने इन्हें अपने खेमे में शामिल कर चुनावी नैया पार करने की कवायद में जुट गए हैं। सिराथू, चायल और मंझनपुर विधानसभा सीट में यह खेल शुरू हो गया है। सबसे ज्यादा उलटफेर सिराथू सीट में हुआ।
प्रधानों के एक बड़े धड़े को हाल ही में एक उम्मीदवार ने शामिल कराया और चुनाव मैदान में प्रचार के लिए उतार दिया। इसके तुरंत बाद विपक्षी ने भी यही काम किया। चायल में भी प्रधानों की खींचतान तेज हो गई है। दल के साथ जाने के बाद प्रधान मतदाताओं को बरगलाने लगे हैं। इतना ही नहीं चुनावी शतरंज की गोटियां बैठाकर दूसरे दल का खेल बिगाड़ने पर उतारू हो गए हैं। इसकी एक नहीं कई वजह भी हैं। अपनी हनक बरकरार रखने के लिए एड़ी चोटी का जोर उन्होंने लगाना शुरू कर दिया है। गांव के मुखिया की इस पैतरेबाजी ने ग्रामीणों को असमंजस में डाल दिया है। छोटे-छोटे लाभ के लिए उन्हें प्रधान के ही पास जाना पड़ता है, ऐसी स्थिति में वह प्रधान से मुंह कैसे मोड़े, इसको लेकर वह उधेड़बुन में हैं।
विज्ञापन
अपना-अपना हित साध रहे सभी
प्रधानों के खेल ने सियासी हवा को मोड़ना शुरू कर दिया है। अपना-अपना हित साधते हुए यह प्रधान प्रत्याशियों के साथ खड़े हुए हैं। कोई अपना वजूद दिखाने के लिए परेशान है तो किसी को अपना वजूद बचाए रखने की चुनौती मिल रही है। प्रधान कई और कारणों से प्रत्याशियों के साथ खड़े हुए हैं। कइयों ने तो बाकायदा सौदा भी कर लिया है।
विज्ञापन
विधानसभा चुनाव में जिले के 498 ग्राम प्रधान सियासत का एक बड़ा हिस्सा बनेंगे। पहले भी ऐसा होता रहा है। गांव के मतदाताओं को साधे रखने की जिम्मेदारी राजनीतिक दल इन्हीं के हवाले करते रहे हैं। इनकी भूमिका को देखते हुए उम्मीदवारों ने इन्हें अपने खेमे में शामिल कर चुनावी नैया पार करने की कवायद में जुट गए हैं। सिराथू, चायल और मंझनपुर विधानसभा सीट में यह खेल शुरू हो गया है। सबसे ज्यादा उलटफेर सिराथू सीट में हुआ।
विज्ञापन
प्रधानों के एक बड़े धड़े को हाल ही में एक उम्मीदवार ने शामिल कराया और चुनाव मैदान में प्रचार के लिए उतार दिया। इसके तुरंत बाद विपक्षी ने भी यही काम किया। चायल में भी प्रधानों की खींचतान तेज हो गई है। दल के साथ जाने के बाद प्रधान मतदाताओं को बरगलाने लगे हैं। इतना ही नहीं चुनावी शतरंज की गोटियां बैठाकर दूसरे दल का खेल बिगाड़ने पर उतारू हो गए हैं। इसकी एक नहीं कई वजह भी हैं। अपनी हनक बरकरार रखने के लिए एड़ी चोटी का जोर उन्होंने लगाना शुरू कर दिया है। गांव के मुखिया की इस पैतरेबाजी ने ग्रामीणों को असमंजस में डाल दिया है। छोटे-छोटे लाभ के लिए उन्हें प्रधान के ही पास जाना पड़ता है, ऐसी स्थिति में वह प्रधान से मुंह कैसे मोड़े, इसको लेकर वह उधेड़बुन में हैं।
विज्ञापन
अपना-अपना हित साध रहे सभी
प्रधानों के खेल ने सियासी हवा को मोड़ना शुरू कर दिया है। अपना-अपना हित साधते हुए यह प्रधान प्रत्याशियों के साथ खड़े हुए हैं। कोई अपना वजूद दिखाने के लिए परेशान है तो किसी को अपना वजूद बचाए रखने की चुनौती मिल रही है। प्रधान कई और कारणों से प्रत्याशियों के साथ खड़े हुए हैं। कइयों ने तो बाकायदा सौदा भी कर लिया है।