कौशांबी : तिलक चढ़ाने के बाद अचानक गायब हो गया दुल्हन का पिता, दूल्हे ने युवती को अपने घर बुलाकर रचाई शादी
चायल तहसील के औधन गांव निवासी दुर्गेश पाल के पिता राजाराम पाल की मौत हो चुकी है। दुर्गेश खेतीबाड़ी करके परिवार की जिम्मेदारी संभालते हैं। पिछले दिनों दुर्गेश की शादी सिराथू तहसील के निधियावां गांव निवासी शिवशंकर पाल की बेटी पूजा के साथ तय हुई।
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दुर्गेश और पूजा की अनोखी शादी समाज के उन लोगों के लिए मिशाल साबित हुई जो दहेज में चंद पैसों के खातिर रिश्ता ठुकरा देते हैं। तिलक समारोह के बाद अचानक पिता के गायब होने पर पूजा की मां ने दुर्गेश के घरवालों से फोन पर बात की तो उन्होंने बिन बारात दुल्हन को अपने घर बुला लिया। सादे समारोह में विवाह की रस्म अदायगी के बाद दुर्गेश ने पूजा को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया।
चायल तहसील के औधन गांव निवासी दुर्गेश पाल के पिता राजाराम पाल की मौत हो चुकी है। दुर्गेश खेतीबाड़ी करके परिवार की जिम्मेदारी संभालते हैं। पिछले दिनों दुर्गेश की शादी सिराथू तहसील के निधियावां गांव निवासी शिवशंकर पाल की बेटी पूजा के साथ तय हुई। शिवशंकर रेलवे में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। उनकी तैनाती प्रयागराज क्षेत्र में है। पांच दिन पहले पूजा का पिता अपने परिजनों के साथ दुर्गेश के घर तिलक चढ़ाने पहुंचा।
11 हजार रुपये शिवशंकर ने दुर्गेश को तिलक में उपहार स्वरूप दिए। बृहस्पतिवार को दुर्गेश को पूजा के घर बारात लेकर आना था। तिलक के बाद अचानक पूजा के पिता लापता हो गए। परिवार के लोगों ने उनकी काफी खोजबीन की लेकिन कुछ पता नहीं चला। घर में शादी की खुशियों की जगह गमगीन महौल हो गया। ठीक बारात के दिन यानि बृहस्पतिवार को पूजा की मां ने होने वाले दामाद दुर्गेश से अपनी बेबसी बयां की।
इस पर दुर्गेश ने अपनी सास को समझाया और उन्हें पूजा के साथ अपने घर बुला लिया। पूजा अपनी मां व कुछ रिश्तेदारों के साथ दुर्गेश के साथ पहुंची। यहां सादे समारोह में दुर्गेश ने पूजा के गले में वरमाला डालकर उसे पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया। इस शादी को लेकर इलाके में काफी चर्चा है। लोग दुर्गेश व उसके परिवार वालों के कायल हैं।
धरी रह गई बारात की तैयारी
दुर्गेश ने अपनी शादी धूमधाम से करने का फैसला लिया था। डीजे, आतिशबाजी व कई वाहन बारात जाने के लिए बुक किए गए थे। घर में रिश्तेदारों की फौज जमा थी। तभी दुर्गेश की सास यानि पूजा की मां ने फोन करके अपनी बेबसी बयां की। पूजा की मां ने कहा कि ... भैया तिलक के बाद से ही पति कहीं चले गए हैं। शादी की सारी जिम्मेदारी मुझ पर है। हमारे पास कुछ भी नहीं है। इतना सुनते ही दुर्गेश ने अपनी सास को दिलासा दिया और उन्हें अपनी होने वाली पत्नी पूजा के साथ अपने घर बुला लिया। दूल्हे दुर्गेश के घर पर ही शादी की रस्म पूरी हुई।