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Kaushambi News: गांव में बाढ़ का पानी...जिंदगी कहीं और चल

Sun, 03 Aug 2025 12:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी Updated Sun, 03 Aug 2025 12:52 AM IST
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Flood water in the village... life goes on somewhere else
कौशाम्बी के गोपसहासा सहित कई गांवों में जलस्तर बढ़ने पर एलाउंस करते कौशाम्बी थानाध्यक्ष कृष्ण क - फोटो : samvad
पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश से यमुना का जलस्तर बढ़ गया है। चायल तहसील का तटवर्ती गांव पिपरहटा भी शुक्रवार रात से पानी से घिर गया है। सड़क पर करीब चार फीट पानी भर चुका है। यमुना की सहायक नदी किलनहाई के उफनाने से कई गांव की करीब 10 हजार बीघा फसल जलमग्न हो गई है। जीवनयापन मुश्किल हो गया।
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बृहस्पतिवार से लगातार यमुना में बढ़ रहे जलस्तर का सिलसिला शनिवार को भी जारी रहा। सड़क मार्ग से गांव का संपर्क टूट गया। सड़क पर नाव चलने लगी हैं। मल्हीपुर गांव में यमुना और किलनहाई नदी दोनों का जलस्तर बढ़ गया है। गांव के पूरब दिशा में रहन वाले सुरेश कुमार, रायबहादुर, इंद्रपाल और शिवकुमार ने झोपड़ी से गृहस्थी समेट पड़ोसियों के घरों में शरण ले रखी है। इन गांवों में तिल, ज्वार, बाजरा, अरहर, कद्दू और हरी मिर्च की खेती पानी में डूबने से नष्ट हो गई है।
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मंझनपुर तहसील के बड़हरी, पभोषा, भवनसुरी, कटरी, शाहपुर, रायपुर, जमुनापुर, महेवाघाट और डेढ़ावल आदि गावों में यमुना के पानी से सब्जी, तिली, बाजरा और अरहर की करीब दस हजार बीघा फसलें जलमग्न हो गई हैं।
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मल्हीपुर में तीन दिन से बिजली गुल, मोबाइल बंद



नेवादा। किलनहाई नदी में बाढ़ आने से चकपिनहा गांव के पास बिजली आपूर्ति वाले सभी पोल पानी में डूब गए हैं। एहतियातन बिजली विभाग ने चकपिनहा गांव के पास से मल्हीपुर की बिजली आपूर्ति रोक दी है। इसके चलते बृहस्पतिवार रात से गांव में अंधेरा है। मोमबत्ती के सहारे ग्रामीणों को रात गुजारनी पड़ रही है।



गांव के श्यामलाल, शिवलोचन, राजकुमार, फूलकली, सुबिहिती और गुड्डी आदि ने बताया कि बाढ़ आने से जहरीले जीव जंतुओं का खतरा बढ़ जाता है। मिट्टी का तेल भी नहीं मिलता। ऐसे में किसी तरह मोमबत्ती की रोशनी में खाना बनाकर टार्च के सहारे रात गुजारना पड़ता है। सभी के मोबाइल फोन भी बंद हो चुके हैं।पश्चिमशरीरा उपकेंद्र के जेई जशवंत सिंह ने संभावित खतरे को देखते हुए आपूर्ति बंद कर दी है।



आधा पेट चारा खिलाकर पाल रहे मवेशी



नेवादा। मल्हीपुर गांव में चारों तरफ बाढ़ का पानी भरा होने से चरागाह और हरे चारे की फसलें भी पानी में डूब गई हैं। लोगों को मवेशियों का पेट पालने में दिक्कत हो रही है।

गांव के विजय, सोनिया, राजरानी, गजराज और रंजीत आदि ने बताया कि जिनके घरों में भूसा नहीं है। वह किसी दो किमी दूर से डोंगी (छोटी नाव) से ऊंचाई वाले स्थानों से घास काटकर लाते हैं। जिनके पास भूसा और संसाधन नहीं है, उनके मवेशी भूखे पेट हैं। कुछ ऐसा ही हाल छोटका पिपरहटा गांव का भी होने लगा है।

मल्हीपुर गांव के हरीशंकर, सुखदेव, बदलू प्रसाद, संतोष दिवाकर, सुरजी, संगीता, बिट्टन देवी, सुनील कुमार और मौनी प्रसाद ने बताया कि गांव में संकट की घड़ी है। कोई अधिकारी उनकी सुध नहीं लेने पहुंचा।

मवेशियों के लिए रिंकू ने पकड़ी डोंगी

नेवादा। मल्हीपुर गांव के ज्यादातर लोग मछली का शिकार, मजदूरी व कृषि पर ही निर्भर हैं। खेती भी लोगों के पास नाममात्र की है। मवेशियों के चारे के लिए मल्हीपुर के रिंकू (14) ने शनिवार को बड़ी बहिन मोहिनी और छोटी सेजल को डोंगी पर बैठाकर एक किमी दूर पतवार (चप्पू) चलाकर नदी पार किया। बहनों के साथ मिलकर ऊंचाई वाले गांव केवट का पुरवा सिवान से घास व महुआ की हरी पत्तियां काटकर ले आया। रिंकू ने बताया कि उन सबका पेट तो किसी तरह भर जाएगा। बेजुबान तो भी उनके ही सहारे हैं। इनका तो पेट भरना ही पड़ेगा। संवाद

मुआवजे पर सशंकित ग्रामीण

पश्चिमशरीरा। मंझनपुर तहसील क्षेत्र के बड़हरी, पभोषा, भवनसुरी, कटरी, शाहपुर, रायपुर, जमुनापुर, महेवाघाट और डेढ़ावल आदि गावों में बाढ़ से फसलें जलमग्न हो गई हैं। बड़हरी गांव निवासी राममूरत द्विवेदी, मणिकांत त्रिपाठी और केशव प्रसाद निषाद आदि ने बताया कि पिछले वर्षों में हुए नुकसान का सर्वे हुआ, कई बार तहसील के चक्कर लगाए लेकिन एक रुपये भी मुआवजे के तौर पर नहीं मिला है। हटवा अब्बासपुर गांव निवासी राजा भइया द्विवेदी और पप्पू सिंह ने बताया कि उन्होंने खेत बंटाई पर लिया था। इसके लिए 50 हजार का कर्ज भी लिया था। फसल पानी में डूब गई हैं। इस बार भी मुआवजा नहीं मिला तो खाने के लाले पड़ेंगे। जाएंगे। संवाद

पिछले वर्ष किसानों को किस कारण से मुआवजा नहीं मिल पाया, इसकी जानकारी की जाएगी। इस साल राजस्व टीम लगाकर जलमग्न फसलों का सर्वे कराया जा रहा है। किसानों की हर संभव मदद की जाएगी। --एसपी वर्मा, एसडीएम मंझनपुर
डीएम ने किया बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा

पभोषा गांव में प्राइमरी स्कूल और मेला मैदान में जलभराव के साथ गांव का आवागमन बंद हो गया है। शनिवार सुबह डीएम मधुसूदन हुल्गी ने एसडीएम एसपी वर्मा के साथ पभोषा और बड़हरी में बाढ़ का निरीक्षण किया। ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं।




हर साल बारिश के दिनों में समस्या होने के कारण उन्होंने सिंचाई विभाग से नाला सहित अन्य कार्यों का प्रोजेक्ट बनाने के निर्देश दिए। संबंधित अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। कटैया गांव पहुंचकर नाव की व्यवस्था कराई। किसी भी समस्या की स्थिति में तत्काल तहसील अथवा जिला प्रशासन से संपर्क करने के लिए ग्रामीणों से अपील की। संवाद
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