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संस्थागत प्रसव में पांच अस्पताल फिसड्डी, चिकित्सा प्रभारियों से जवाब-तलब
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Five hospitals laggy in institutional delivery, reply-called from medical in-charges
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संस्थागत प्रसव के मामले में जिले की स्थिति ठीक नहीं है। जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण पिछले वित्तीय वर्ष में महज 70 फीसदी ही संस्थागत प्रसव हो सके। इसमें पांच अस्पतालों की प्रगति काफी खराब रही। इसे लेकर जिलाधिकारी ने नाराजगी जाहिर करते हुए संबंधित चिकित्सा प्रभारियों से स्पष्टीकरण तलब किया है। साथ ही कार्यक्रम में लापरवाही बरतने वाली आशाओं को भी सेवा समाप्ति की चेतावनी दी।
जननी सुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव कराकर मातृ एवं मृत्यु दर में कमी लाने का अभियान चलाया जा रहा है। बीते वित्तीय वर्ष में संयुक्त जिला चिकित्सालय समेत जिले की सीएचसी व पीएचसी में 43,867 प्रसव कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। सीएमओ ने सीएचसी, पीएचसी प्रभारियों व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिया था कि गर्भवती महिलाओं से संपर्क कर संस्थागत प्रसव कराने के लिए प्रेरित करें।
साथ ही योजना के तहत मिलने वाला लाभ पात्र महिलाओं को दिलाया जाए। लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कड़ा, कनैली, सिराथू एवं पीएचसी मूरतगंज और सरसवां के जिम्मेदारों ने संस्थागत प्रसव को लेकर बेहद लापरवाही बरती। यही वजह रही कि जिले भर में मात्र 30,556 संस्थागत प्रसव हो सके। जो लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 70 फीसदी रहा।
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पिछले दिनों हुई समीक्षा के दौरान इसका खुलासा होने पर डीएम ने नाराजगी जाहिर करते हुए संबंधित चिकित्सा प्रभारियों से स्पष्टीकरण तलब किया। साथ ही गर्भवती महिलाओं की सूची तैयार कराकर आशाओं को उनके संपर्क में लगातार बने रहने के निर्देश दिए। ताकि, प्रसव से 24 घंटे पहले उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जा सके। चेताया कि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बरतने वाली आशाओं की सेवा समाप्त कर दी जाएगी।
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जननी सुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव कराकर मातृ एवं मृत्यु दर में कमी लाने का अभियान चलाया जा रहा है। बीते वित्तीय वर्ष में संयुक्त जिला चिकित्सालय समेत जिले की सीएचसी व पीएचसी में 43,867 प्रसव कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। सीएमओ ने सीएचसी, पीएचसी प्रभारियों व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिया था कि गर्भवती महिलाओं से संपर्क कर संस्थागत प्रसव कराने के लिए प्रेरित करें।
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साथ ही योजना के तहत मिलने वाला लाभ पात्र महिलाओं को दिलाया जाए। लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कड़ा, कनैली, सिराथू एवं पीएचसी मूरतगंज और सरसवां के जिम्मेदारों ने संस्थागत प्रसव को लेकर बेहद लापरवाही बरती। यही वजह रही कि जिले भर में मात्र 30,556 संस्थागत प्रसव हो सके। जो लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 70 फीसदी रहा।
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पिछले दिनों हुई समीक्षा के दौरान इसका खुलासा होने पर डीएम ने नाराजगी जाहिर करते हुए संबंधित चिकित्सा प्रभारियों से स्पष्टीकरण तलब किया। साथ ही गर्भवती महिलाओं की सूची तैयार कराकर आशाओं को उनके संपर्क में लगातार बने रहने के निर्देश दिए। ताकि, प्रसव से 24 घंटे पहले उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जा सके। चेताया कि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बरतने वाली आशाओं की सेवा समाप्त कर दी जाएगी।