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कौशाम्बी पटाखा फैक्टरी धमाका : घर बचा न बच्चे, यादों के सहारे मीरपुर लौट आया गया प्रसाद

Thu, 03 Sep 2026 06:32 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांंबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांंबी Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 03 Sep 2026 06:32 PM IST
सार

चार साल पहले गरीबी और मुफलिसी ने मीरपुर का मूल घर छोड़ने को मजबूर किया। मनौरी में किस्त पर जमीन ली, किसी तरह मकान बनवाया। पत्नी व चार बच्चों के साथ नई जिंदगी शुरू की। एक जोरदार धमाका हुआ, घर मलबे में तब्दील हो गया।

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Firecracker Factory Blast: Neither home nor children left—Gaya Prasad returns to Mirpur with only memories
हादसे के बाद बिलखता हुआ मीरपुर का गया प्रसाद। - फोटो : संवाद

विस्तार

चार साल पहले गरीबी और मुफलिसी ने मीरपुर का मूल घर छोड़ने को मजबूर किया। मनौरी में किस्त पर जमीन ली, किसी तरह मकान बनवाया। पत्नी व चार बच्चों के साथ नई जिंदगी शुरू की। एक जोरदार धमाका हुआ, घर मलबे में तब्दील हो गया। चार बच्चे खत्म हो गए, पत्नी अस्पताल में है। वह यादों के सहारे मीरपुर लौट आया। कहानी गया प्रसाद साहू की है।

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गया प्रसाद को उम्मीद थी कि मेहनत करके वह बच्चों का भविष्य संवार लेगा। सोमवार को पटाखा विस्फोट ने उसका सब कुछ छीन लिया। पांच भाइयों में चौथे नंबर का गया गांव के ही सचिन केसरवानी की मुंडेरा बाजार स्थित फास्ट फूड की दुकान पर नौकरी करता है। हादसे में पत्नी अनीता साहू के दोनों पैर कट चुके हैं। इस समय एसआरएन में जीवन और मौत से जंग लड़ रही है।
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छोटे भाई दुर्गा प्रसाद ने बताया कि चार साल पहले गांव में अपने हिस्से में मकान न होने और आर्थिक तंगी के चलते गया परिवार लेकर मनौरी चला गया था। किस्त पर जमीन लेकर मकान बनाया और पत्नी व चार बच्चों के साथ रहने लगा, लेकिन अब सब तबाह हो चुका है। चारों बच्चों के अंतिम संस्कार के बाद गया प्रसाद मीरपुर स्थित पैतृक गांव लौट आया। यहां भी उसके पास अपना कोई मकान नहीं है। छोटे भाई दुर्गा प्रसाद साहू ने उसे अपने घर में शरण दी है। परिजनों के मुताबिक, गया प्रसाद रातभर सो नहीं पा रहा है।
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हादसे से दस मिनट पहले पत्नी से हुई थी बात

हादसे वाले दिन सोमवार को गया प्रसाद रोज की तरह काम करने मुंडेरा गया था। हादसे से करीब दस मिनट पहले उसने पत्नी अनीता को फोन किया। बच्चों के बारे में पूछा-बच्चे स्कूल गए हैं या नहीं। पत्नी ने जवाब दिया कि स्कूल की छुट्टी है, सभी खेल रहे हैं। बातचीत खत्म होने के कुछ ही देर बाद मनौरी में पटाखा विस्फोट हो गया। हादसे की खबर मिली तो गया प्रसाद बदहवास होकर मनौरी पहुंचा। वहां का मंजर देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। जिन बच्चों की आवाज कुछ देर पहले तक उसके कानों में गूंज रही थी, वे हमेशा के लिए उससे दूर हो चुके थे।

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