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Kaushambi News: बारिश से बर्बाद हो गए किसान, अफसरों को नहीं दिखा नुकसान
Fri, 24 Mar 2023 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Fri, 24 Mar 2023 01:00 AM IST
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बारिश से बर्बाद हो गए किसान, अफसरों को नहीं दिखा नुकसान
मंझनपुर। करीब चार से पांच महीने की मेहनत खेतों में लहलहा रही थी। तीन दिन पहले तेज हवा के साथ हुई बारिश ने फसलों को बर्बाद कर दिया। 30 से 40 फीसदी गेहूं की फसल गिर गई। नुकसान की भरपाई कैसे होगी, इसे लेकर किसान परेशान हैं। उनके जख्मों पर मुआवजे का मरहम लगाने की बात तो दूर, जिम्मेदारों ने खेतों में गिरी फसल की तरफ देखना भी उचित नहीं समझा।
दोआबा में इस बार करीब 74249 हेक्टेयर में गेहूं और 1934 हेक्टेयर में सरसों की फसल लगाई गई है। सरसों की लगभग 50 फीसदी मड़ाई हो चुकी है। शेष फसल खेतों में खड़ी है। वहीं गेहूं की फसल भी पकने को तैयार है। अगैती फसलों की 10-15 दिनों में किसान कटाई की तैयारी कर रहे थे कि इसी बीच रविवार रात तेज हवा के साथ बारिश हो गई। इससे मंझनपुर, नेवादा, चायल, सिराथू समेत लगभग हर ब्लॉक क्षेत्र में किसानों की खेतों में खड़ी गेहूं की फसल गिर गई।
बताया जाता है कि रही सही जो कसर दो दिन बाद मंगलवार को दोबारा हुई बारिश ने पूरी कर दी। हालांकि यह झोंका हल्का था। फिर भी कई क्षेत्रों में फसलों को इसने प्रभावित किया। हालांकि ऐसी परिस्थिति में सरकार से मुआवजा मिलने का प्रावधान है, लेकिन अफसरों की लापरवाही से उन्हें लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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बीमा कराया नहीं, आपदा से राहत की भी टूटी उम्मीद
मंझनपुर। फसलों के नुकसान पर किसानों को मुआवजे के लिए दो व्यवस्थाएं हैं। पहला फसल बीमा योजना, दूसरा आपदा प्रबंधन कोष। जिले में किसानों की संख्या दो लाख से अधिक है, लेकिन 13417 ने ही फसल का बीमा कराया है। बीमा कराने वालों को भी लाभ तब मिलेगा, जब नुकसान 33 फीसदी से अधिक हो। हालांकि अफसर इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। वहीं आपदा प्रबंधन कोष में भी 33 फीसदी से अधिक नुकसान पर ही मुआवजा मिलता है। इससे भी राहत मिलने की उम्मीद नहीं, कारण जिले में सर्वे कराया ही नहीं गया।
तीन बीघे में गेहूं लगाया था। प्रति बीघा करीब पांच से सात क्विंटल उत्पादन की उम्मीद थी। तीन दिन पहले तेज हवा चली और बारिश हो गई। इससे 30-40 फीसदी फसल गिर गई। इसकी वजह से करीब एक से डेढ़ क्विंटल पैदावार प्रभावित होगा।- राम नरायण यादव, किसान
सात बीघे गेहूं की बोआई की थी, लेकिन बारिश और तेज हवा के कारण 40 से 50 फीसदी फसल गिर गई। इससे डेढ़ से दो क्विंटल पैदावार प्रति बीघे घटना तय है। कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी खेतों में गिरी हुई फसल को देखने तक नहीं आया।-राज कुमार बाजपेयी, किसान
आठ बीघे में गेहूं लगाया था। बारिश से करीब 40 फीसदी फसल गिर गई। पौधों के गिरने के कारण अब फसल में वह बात नहीं रहेगी जो पहले थी। गेहूं हल्का हो जाएगा। कम से कम दो से तीन क्विंटल प्रति बीघा पैदावार कम होगा।- प्रबल प्रताप सिंह, किसान
बेमौसम हुई बारिश और तेज हवाओं से 50-60 फीसदी गेंहू की फसल गिरी है। इससे पैदावार में कमी आएगी। लागत भी निकलने की उम्मीद नहीं है। सरकार को राजस्व विभाग द्वारा जमीनी स्तर पर नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा देना चाहिए।- मनोज कुमार द्विवेदी, किसान
आपदा राहत कोष से किसानों को मुआवजा देने की व्यवस्था है, लेकिन यह लाभ तब मिलता है जब 33 फीसदी से अधिक नुकसान हुआ हो, लेकिन जिले में नुकसान की बात सामने नहीं आई है। इसलिए सर्वे भी नहीं कराया गया। नुकसान होता तो तहसीलों से रिपोर्ट मांगी जाती।- जयचंद्र पांडेय, एडीएम एफआर
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मंझनपुर। करीब चार से पांच महीने की मेहनत खेतों में लहलहा रही थी। तीन दिन पहले तेज हवा के साथ हुई बारिश ने फसलों को बर्बाद कर दिया। 30 से 40 फीसदी गेहूं की फसल गिर गई। नुकसान की भरपाई कैसे होगी, इसे लेकर किसान परेशान हैं। उनके जख्मों पर मुआवजे का मरहम लगाने की बात तो दूर, जिम्मेदारों ने खेतों में गिरी फसल की तरफ देखना भी उचित नहीं समझा।
दोआबा में इस बार करीब 74249 हेक्टेयर में गेहूं और 1934 हेक्टेयर में सरसों की फसल लगाई गई है। सरसों की लगभग 50 फीसदी मड़ाई हो चुकी है। शेष फसल खेतों में खड़ी है। वहीं गेहूं की फसल भी पकने को तैयार है। अगैती फसलों की 10-15 दिनों में किसान कटाई की तैयारी कर रहे थे कि इसी बीच रविवार रात तेज हवा के साथ बारिश हो गई। इससे मंझनपुर, नेवादा, चायल, सिराथू समेत लगभग हर ब्लॉक क्षेत्र में किसानों की खेतों में खड़ी गेहूं की फसल गिर गई।
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बताया जाता है कि रही सही जो कसर दो दिन बाद मंगलवार को दोबारा हुई बारिश ने पूरी कर दी। हालांकि यह झोंका हल्का था। फिर भी कई क्षेत्रों में फसलों को इसने प्रभावित किया। हालांकि ऐसी परिस्थिति में सरकार से मुआवजा मिलने का प्रावधान है, लेकिन अफसरों की लापरवाही से उन्हें लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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बीमा कराया नहीं, आपदा से राहत की भी टूटी उम्मीद
मंझनपुर। फसलों के नुकसान पर किसानों को मुआवजे के लिए दो व्यवस्थाएं हैं। पहला फसल बीमा योजना, दूसरा आपदा प्रबंधन कोष। जिले में किसानों की संख्या दो लाख से अधिक है, लेकिन 13417 ने ही फसल का बीमा कराया है। बीमा कराने वालों को भी लाभ तब मिलेगा, जब नुकसान 33 फीसदी से अधिक हो। हालांकि अफसर इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। वहीं आपदा प्रबंधन कोष में भी 33 फीसदी से अधिक नुकसान पर ही मुआवजा मिलता है। इससे भी राहत मिलने की उम्मीद नहीं, कारण जिले में सर्वे कराया ही नहीं गया।
तीन बीघे में गेहूं लगाया था। प्रति बीघा करीब पांच से सात क्विंटल उत्पादन की उम्मीद थी। तीन दिन पहले तेज हवा चली और बारिश हो गई। इससे 30-40 फीसदी फसल गिर गई। इसकी वजह से करीब एक से डेढ़ क्विंटल पैदावार प्रभावित होगा।- राम नरायण यादव, किसान
सात बीघे गेहूं की बोआई की थी, लेकिन बारिश और तेज हवा के कारण 40 से 50 फीसदी फसल गिर गई। इससे डेढ़ से दो क्विंटल पैदावार प्रति बीघे घटना तय है। कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी खेतों में गिरी हुई फसल को देखने तक नहीं आया।-राज कुमार बाजपेयी, किसान
आठ बीघे में गेहूं लगाया था। बारिश से करीब 40 फीसदी फसल गिर गई। पौधों के गिरने के कारण अब फसल में वह बात नहीं रहेगी जो पहले थी। गेहूं हल्का हो जाएगा। कम से कम दो से तीन क्विंटल प्रति बीघा पैदावार कम होगा।- प्रबल प्रताप सिंह, किसान
बेमौसम हुई बारिश और तेज हवाओं से 50-60 फीसदी गेंहू की फसल गिरी है। इससे पैदावार में कमी आएगी। लागत भी निकलने की उम्मीद नहीं है। सरकार को राजस्व विभाग द्वारा जमीनी स्तर पर नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा देना चाहिए।- मनोज कुमार द्विवेदी, किसान
आपदा राहत कोष से किसानों को मुआवजा देने की व्यवस्था है, लेकिन यह लाभ तब मिलता है जब 33 फीसदी से अधिक नुकसान हुआ हो, लेकिन जिले में नुकसान की बात सामने नहीं आई है। इसलिए सर्वे भी नहीं कराया गया। नुकसान होता तो तहसीलों से रिपोर्ट मांगी जाती।- जयचंद्र पांडेय, एडीएम एफआर