विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति के आवाहन पर निजीकरण के विरोध में विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों का लगातार नौवें दिन आंदोलन जारी रहा। बुधवार को आंदोलन में संविदा कर्मी, अवर अभियंता एवं अभियंता संवर्ग ने आंदोलन में हिस्सा लिया। निजीकरण का प्रस्ताव वापस नहीं लेने पर सभी ने एक सुर में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी। निजीकरण के विरोध में पूर्वांचल के सभी जनपदों के बिजलीकर्मी पिछले नौ दिनों से ध्यानाकर्षण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार को भी जिला मुख्यालय मंझनपुर स्थित विद्युत उपकेंद्र में शाम चार बजे विरोध सभा की गई। सभा में संगठन के अगुआ इं. सुशील कुमार ने बिजली कर्मियों को निजीकरण से होने वाले नुकसान के बारे में बताया।
कहा कि विद्युत वितरण निगम के प्रबंधतंत्र ने नोएडा व आगरा में निजीकरण को प्रयोगात्मक तौर पर लागू किया था। जिसमें निगम को अरबों रुपये का घाटा हुआ। प्रबंधतंत्र अपनी कार्य विफलता को छिपाकर पूर्वांचल विद्युत निगम के निजीकरण का प्रस्ताव प्रदेश सरकार के पास भेजा है। निजीकरण होने के बाद आम जनता पर बिजली के बढे हुए बिल का अतिरिक्त भार पड़ेगा। गांव, गरीब, मजदूर बिजली के प्रयोग से वंचित रह जाएंगे। इस मौके पर इं. मुरलीधर, इं. धीरज यादव, इं. अवधेश कुमार, इं. प्रदीप कुमार, इं. सौरभ मौर्या, इं. विनम्र पटेल, राघवेंद्र, गौरव श्रीवास्तव, मोहम्मद वैश, शिवमणि विश्वकर्मा, संदीप कुमार आदि लोगों ने सभा को संबोधित किया।