{"_id":"5a5519874f1c1b5c248b7519","slug":"election-noise-in-closed-co-operative-societies-of-dwaba","type":"story","status":"publish","title_hn":"द्वाबा की बंद सहकारी समितियों में चुनावी शोर ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
द्वाबा की बंद सहकारी समितियों में चुनावी शोर
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Wed, 10 Jan 2018 01:22 AM IST
विज्ञापन
बंद पड़ी मनौरी के जनका गांव स्थिति सहकारी समिति
- फोटो : amar ujala
इसे शासन की मंशा कहें या फिर गैर जिम्मेदाराना रवैया। प्रस्तावित सहकारी समितियों की चुनावी तैयारियां तो ऐसा ही कुछ बयां कर रही हैं। बंद समितियों में चुनाव के लिए गंभीर शासन उनके संचालन को लेकर कतई संजीदगी नहीं दिखा रहा है। नतीजतन प्रभावित किसानों में मायूसी है।
दोआबा के किसानों की सहूलियत के लिए इस समय 214 सहकारी समितियां है। इसमें से 23 सहकारी समितियां घाटे पर चल रही हैं। जबकि 50 से अधिक ऐसी सहकारी समितियां हैं जो करीब एक दशक से बंद हैं। ऐसी समितियों का संचालन नहीं होने से क्षेत्र के किसानों को सहूलियत के बजाय कठिनाई झेलनी पड़ रही है। किसानों को दूसरे समिति का सहारा लेना पड़ रहा है। बंद पड़ी समितियों के लिए हो रहे चुनाव को लेकर किसान तो मायूस हैं। लेकिन चुनाव के लिए लोग कमर भी कसे हुए हैं। आगामी 16 जनवरी से समितियों में चुनाव प्रक्त्रिस्या शुरू हो जाएगी। लेकिन ऐसी समितियों का संचालन नहीं होने के कारण क्षेत्र के किसानों में नाराजगी है।
एक दशक से बंद है जनका सहकारी समिति
चायल क्षेत्र के जनका गांव की सहकारी समिति का संचालन पिछले एक दशक से बंद है। इस समिति के जरिए महमूदपुर मनौरी, मोहम्मदपुर, निजामपुर पुरैनी, मादपुर, मीरपुर, आदि सहित इलाहाबाद के दर्जन भर गांवो के किसानों को लाभ मिलता था। समिति बंद होने से इन गांव के किसानों को 10 किलोमीटर दूर चायल खास स्थित सहकारी समिति का सहारा लेना पड़ता है। समिति का संचालन नहीं होने से भवन भी जर्जर स्थिति में है। गांव के लोग इस भवन को अपने निजी प्रयोग में उपले कंडे व मवेशी बांधने के काम मे ले रहे हैं।
विज्ञापन
इलाके की बंद सहकारी समितियां-
साधन सहकारी समिति जनका
साधन सहकारी समिति कसेंदा
साधन सहकारी समिति गांजा
साधन सहकारी समिति मकनपुर
साधन सहकारी समिति बिहका
साधन सहकारी समिति काजीपुर
साधन सहकारी समिति बड़ेगांव
साधन सहकारी समिति अहमदपुर
साधन सहकारी समिति असरौली
------------------------
विज्ञापन
दोआबा के किसानों की सहूलियत के लिए इस समय 214 सहकारी समितियां है। इसमें से 23 सहकारी समितियां घाटे पर चल रही हैं। जबकि 50 से अधिक ऐसी सहकारी समितियां हैं जो करीब एक दशक से बंद हैं। ऐसी समितियों का संचालन नहीं होने से क्षेत्र के किसानों को सहूलियत के बजाय कठिनाई झेलनी पड़ रही है। किसानों को दूसरे समिति का सहारा लेना पड़ रहा है। बंद पड़ी समितियों के लिए हो रहे चुनाव को लेकर किसान तो मायूस हैं। लेकिन चुनाव के लिए लोग कमर भी कसे हुए हैं। आगामी 16 जनवरी से समितियों में चुनाव प्रक्त्रिस्या शुरू हो जाएगी। लेकिन ऐसी समितियों का संचालन नहीं होने के कारण क्षेत्र के किसानों में नाराजगी है।
विज्ञापन
एक दशक से बंद है जनका सहकारी समिति
चायल क्षेत्र के जनका गांव की सहकारी समिति का संचालन पिछले एक दशक से बंद है। इस समिति के जरिए महमूदपुर मनौरी, मोहम्मदपुर, निजामपुर पुरैनी, मादपुर, मीरपुर, आदि सहित इलाहाबाद के दर्जन भर गांवो के किसानों को लाभ मिलता था। समिति बंद होने से इन गांव के किसानों को 10 किलोमीटर दूर चायल खास स्थित सहकारी समिति का सहारा लेना पड़ता है। समिति का संचालन नहीं होने से भवन भी जर्जर स्थिति में है। गांव के लोग इस भवन को अपने निजी प्रयोग में उपले कंडे व मवेशी बांधने के काम मे ले रहे हैं।
विज्ञापन
इलाके की बंद सहकारी समितियां-
साधन सहकारी समिति जनका
साधन सहकारी समिति कसेंदा
साधन सहकारी समिति गांजा
साधन सहकारी समिति मकनपुर
साधन सहकारी समिति बिहका
साधन सहकारी समिति काजीपुर
साधन सहकारी समिति बड़ेगांव
साधन सहकारी समिति अहमदपुर
साधन सहकारी समिति असरौली
------------------------