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बूथों तक कैसे पहुंचेंगी पोलिंग पार्टियां
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Thu, 02 Feb 2017 12:09 AM IST
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विधान सभा चुनाव के लिए मतदान बूथ बने स्कूलों को जाने के लिए सड़क ही नहीं है। स्कूली बच्चे और शिक्षक पगडंडी के सहारे पहुंच रहे हैं। तीनों विधानसभा सीटों में ऐसे बूथों की संख्या दर्जनभर है। इन बूथों पर आयोग की मुहर पहले ही लग चुकी है। सेक्टर मजिस्ट्रेटों ने सोमवार की बैठक में रिपोर्ट सौंपी तो निर्वाचन कार्य में लगे अफसर परेशान दिखे। अब अधिकारी ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी पर दबाव बनाकर बूथों के लिए रास्ता बनवाने की कवायद कर रहे हैं।
विधान सभा चुनाव के लिए 23 फरवरी को होने वाले मतदान में अधिकतर बूथ प्राथमिक व जूनियर हाई स्कूलों को ही बनाया गया। यदा-कदा जिम्मेदारों ने हाईस्कूल व इंटर कालेजों को बूथ बनाया है। इन बूथों पर बिजली, पानी, शौचालय, रैंप आदि व्यवस्था को ठीक कराने का निर्देश मातहतों को दिया गया था। बूथों तक पोलिंग पार्टियों और निर्वाचन के दिन भ्रमण में लगे अफसरों को पहुंचने के लिए सड़क है या नहीं इस पर ध्यान नहीं दिया गया। सोमवार को डीईओ के नेतृत्व में सेक्टर मजिस्ट्रेटों की बैठक हुई तो उन्होंने सेक्टर के बूथों की बदहाल व्यवस्था का लेखा-जोखा डीईओ के सामने रखा।
सौंपी गई रिपोर्ट में 50 बूथ ऐसे हैं जहां पर पानी, शौचालय, रैंप व शौचालय ठीक नहीं हो सके। रिपोर्ट में बताया गया कि दर्जनभर बूथ ऐसे हैं जहां पर पोलिंग पार्टियों, मतदाताओं व निर्वाचन कार्य में लगे अफसरों को पगडंडी के सहारे पहुंचना होगा। बानगी के तौर पर चायल विधान सभा के पूरे हजारी गांव में बूथ बने प्राथमिक विद्यालय को लिया जा सकता है। यहां पर बूथ तक पहुंचने के लिए सिर्फ एक पगडंडी है। इसी तरह सिराथू विधान सभा के थोन, ढेबरा मई व पहाड़पुर पोलिंग बूथ पर पहुंचने के लिए सड़क ठीक नहीं है। इसकी जानकारी डीईओ को हुई तो उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए निरीक्षण कर समस्या दूर करने का निर्देश दिया।
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विधान सभा चुनाव के लिए 23 फरवरी को होने वाले मतदान में अधिकतर बूथ प्राथमिक व जूनियर हाई स्कूलों को ही बनाया गया। यदा-कदा जिम्मेदारों ने हाईस्कूल व इंटर कालेजों को बूथ बनाया है। इन बूथों पर बिजली, पानी, शौचालय, रैंप आदि व्यवस्था को ठीक कराने का निर्देश मातहतों को दिया गया था। बूथों तक पोलिंग पार्टियों और निर्वाचन के दिन भ्रमण में लगे अफसरों को पहुंचने के लिए सड़क है या नहीं इस पर ध्यान नहीं दिया गया। सोमवार को डीईओ के नेतृत्व में सेक्टर मजिस्ट्रेटों की बैठक हुई तो उन्होंने सेक्टर के बूथों की बदहाल व्यवस्था का लेखा-जोखा डीईओ के सामने रखा।
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सौंपी गई रिपोर्ट में 50 बूथ ऐसे हैं जहां पर पानी, शौचालय, रैंप व शौचालय ठीक नहीं हो सके। रिपोर्ट में बताया गया कि दर्जनभर बूथ ऐसे हैं जहां पर पोलिंग पार्टियों, मतदाताओं व निर्वाचन कार्य में लगे अफसरों को पगडंडी के सहारे पहुंचना होगा। बानगी के तौर पर चायल विधान सभा के पूरे हजारी गांव में बूथ बने प्राथमिक विद्यालय को लिया जा सकता है। यहां पर बूथ तक पहुंचने के लिए सिर्फ एक पगडंडी है। इसी तरह सिराथू विधान सभा के थोन, ढेबरा मई व पहाड़पुर पोलिंग बूथ पर पहुंचने के लिए सड़क ठीक नहीं है। इसकी जानकारी डीईओ को हुई तो उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए निरीक्षण कर समस्या दूर करने का निर्देश दिया।
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