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शाम ढलते ही देश-प्रदेश के बाकी हिस्सों कट जाता है दोआबा

Thu, 09 May 2019 01:05 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कौशाम्बी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कौशाम्बी Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 09 May 2019 01:05 AM IST
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Due to the dawn, the rest of the country is cut off by Doaba
roadways - फोटो : कौशाम्बी
दोआबावासियों की एक बड़ी समस्या यातायात के साधनों की है। जिस पर आज तक कसी सियासी नुमाइंदे ने गंभीरता नहीं दिखाई। नतीजतन शाम ढलते ही कौशाम्बी देश-प्रदेश के बाकी हिस्सों से कट जाता है। जिला मुख्यालय मंझनपुर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। शाम सात बजे के बाद यहां निजी वाहनों के बगैर एक से दूसरे कस्बे तक सफर संभव नहीं होता है। सड़क यातायात की इस बदहाली से जिले का अर्थ-व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। 
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ऐतिहासिक नगरी कौशाम्बी को जिले का दर्जा मिले दो दशक हो गए। पर, अभी तक यातायात के साधनों की समस्या नहीं दूर की जा सकी। जिला अब भी पड़ोसी जनपद प्रयागराज पर निर्भर है। कौशाम्बी में अलग डिपो का अभाव हमेशा खटकता है। लीडर रोड डिपो की चंद खटारा बसें जिले की सड़कों पर रेंगती हैं। सर्वाधिक खराब स्थिति जिला मुख्यालय मंझनपुर की है। यहां से नेशनल हाईवे स्थित सैनी बस स्टॉप की दूरी 17 व  रेलवे स्टेशन भरवारी की 12 किमी है।
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शाम सात बजे के बाद रेलवे अथवा बस स्टेशन तक पहुंचने के लिए कोई सरकारी/प्राइवेट वाहन नहीं मिलते हैं। जिला मुख्यालय से बाहर आवागमन के लिए लोगों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। साधन संपन्न अथवा स्थानीय लोग तो किसी तर्रह से काम चला लेते हैं। पर, बाहरी यात्रियों को साधन के अभाव में भारी फजीहत उठानी पड़ती है। सरकारी कामकाज के सिलसिले में जिले के विभिन्न हिस्सों से आने वाले फरियादियों को अक्सर मुख्यालय की सड़कों पर रात गुजारते देखा जाता है। यह समस्या अकेले मुख्यालय की नहीं है। इसी तरह की दिक्कतों से सरायअकिल, करारी, पश्चिमशरीरा, सिराथू भरवारी समेत सभी कस्बों, बाजारों के लोग जूझते हैं।
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शाम के बाद यदि किसी को एक कस्बे से दूसरे कस्बे तक आवागमन करना है तो बगैर निजी वाहन के संभव नहीं होता है। यातायात के साधनों की कमी से जिले की व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। मंझनपुर कस्बे के आशीष उर्फ बच्चा केसरवानी, अजय अग्रहरि, पुजारी, हरिश्चंद्र मोदनवाल आदि व्यापारियों का कहना है कि साधन के अभाव में कारोबार के सिलसिले में बाहरी व्यापारी यहां आने से कतराते हैं।

प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री रहे आर के चौधरी वर्ष 1993 में यहां की सदर सीट से विधायक बने थे। उनके कार्यकाल तक कौशाम्बी की सड़कों पर रोजाना निगम की 36 बसें फर्राटा भरती थीं। देश-प्रदेश की राजधानी दिल्ली-लखनऊ के साथ ही अन्य प्रमुख शहरों के लिए रोजाना बसों का संचालन होता था। पर, प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही एक-एक कर सभी बसें बंद हो गईं। पिछले दो दसक से केवल प्रयागराज, कानपुर और चित्रकूट के लिए गिनी चुनी बसों का ही संचालन हो रहा है। जबकि इस बीच आबादी और आवागमन बढ़ा है।

18 लाख की आबादी वाले जिले में परिवहन विभाग की ओर से सिर्फ 28 बसों का संचालन किया जा रहा है। परिवहन विभाग का दावा है कि कौशाम्बी से आगरा, लखनऊ, कानपुर, चित्रकूट जिलों के लिए भी बसों का संचालन हो रहा है। पर, मुख्यालय से शाम साढ़े सात बजे के बाद प्रयागराज के लिए निगम की एक भी बसें नहीं दिखती हैं। जबकि, इस मार्ग पर वाहन की सर्वाधिक आवश्यकता है। इसके पीछे निगम के अफसर आमदनी का बहाना बना रहे हैं। एआरएम आरएस पांडेय का कहना है कि सवारियां नहीं मिलने से निगम को घाटा लगता है। इसके चलते रात में बसों का संचालन किया जाना संभव नहीं है।

ओसा मार्ग पर तकरीबन आठ करोड़ की लागत से कौशाम्बी डिपो का निर्माण कराया जा रहा है। चार करोड़ की पहली किस्त मिल चुकी है। उम्मीद है कि इसे तैयार होने में कम से कम साल भर का वक्त और लगेगा। इसके बाद ही समस्या का समाधान संभव हो सकेगा।


इस वक्त जिले के विभिन्न मार्गों पर 28 बसों का संचालन किया जा रहा है। जिला मुख्यालय से अंतिम बस साढ़े सात बजे प्रयागराज के लिए चलाई जा रही है। डिपो का निर्माण कराया जा रहा है। कौशाम्बी का अलग डिपो बनने के बाद दिक्कतें कम हो जाएंगी।
आरएस पांडेय-एआरएम लीडर रोड डिपो
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