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विलुप्त नदी की खोज में 15 मीटर तक हुई ड्रिलिंग, नहीं मिले सुबूत
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Drilling done up to 15 meters in search of extinct river, no evidence found
- फोटो : KAUSHAMBI
विलुप्त नदी की खोजचायल तहसील के इछना गांव में विलुप्त सरस्वती नदी की खोज के लिए तेलंगाना (हैदराबाद) से एनजीआरआई के वैज्ञानिकों की टीम ने एक बार फिर डेरा डाल दिया है। दूसरे दिन चली ड्रिलिंग में अब तक वैज्ञानिकों को कोई ठोस सुबूत नहीं मिले हैं।
टीम ने 15 मीटर तक चली ड्रिलिंग से निकले बालू के नमूने लेकर परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा है। अभी 50 मीटर तक और भी ड्रिलिंग कर नमूने एकत्र किए जाएंगे।
सोमवार को नेवादा के इछना गांव में विलुप्त सरस्वती नदी की खोज के लिए पहुंची राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम ने मशीन लगाकर जांच शुरू की। पहले दिन चली ड्रिलिंग के जरिए कुल 15 मीटर तक खोदाई कर रेत के नमूने लिए गए।
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इन नमूनों में कोई ठोस सुबूत वैज्ञानिकों के हाथ नहीं लगे हैं। एनजीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. इमरान खान ने बताया कि अभी टीम आगे भी 50 मीटर तक ड्रिलिंग करेगी। इस दौरान जो भी सिलिका और रेत मिलेगा उसे परीक्षण के लिए तेलंगाना स्थित प्रयोगशाला भेजा जाएगा।
इसके बाद ही विलुप्त सरस्वती नदी की असलियत के बारे में पता चल सकेगा। संस्थान की महिला वैज्ञानिक डॉ. प्रभा पांडेय सहित तकनीकी अधिकारी बी किरन कुमार और उनकी टीम लगातार नेवादा के इछना गांव में काम कर रही है। टीम ने बताया कि सेडीमेंट कोर ड्रिलिंग के जरिए छोटे-छोटे बंद पाइप निकलने वाले सैंड को एकत्रित कर इसका परीक्षण कराते हुए रेत की हकीकत और उसकी उम्र का पता लगाया जाएगा।
हैलिबोर्न के जरिए इछना में मिल चुकी है नदी की सूखी धाराएं
एनजीआरआई की टीम इससे पहले भी विलुप्त नदी सरस्वती की खोज के लिए हैलिबोर्न तकनीक के जरिए कई संभावित स्थानों पर जांच कर चुकी है। नेवादा के सेवथा के बाद इछना में विलुप्त नदी सरस्वती की पतली और सूखी धारा होने के कुछ संकेत और प्रमाण संस्थान के वैज्ञानिकों को मिले हैं। इसी के आधार पर वैज्ञानिकों ने इछना में ड्रिलिंग के जरिए सुबूत इकट्ठा करने की पहल शुरू की। केंद्रीय भूमि जल बोर्ड भी नदी की खोज के लिए खोदाई कर चुका है। खुदाई और हेलिबोर्न सर्वे में सूखी धाराएं मिली थीं। अब इछना गांव में 50 से 70 मीटर सेडीमेंट कोर ड्रिलिंग की जा रही है। नीचे की सतह में मिले बालू के नमूनों को एकत्र कर आप्टिकली स्टिम्युलेटेड ल्यूमिनेसिसेंस परीक्षण में जमीन के नीचे सिल्ट के उम्र का पता लगाया जाएगा।
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टीम ने 15 मीटर तक चली ड्रिलिंग से निकले बालू के नमूने लेकर परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा है। अभी 50 मीटर तक और भी ड्रिलिंग कर नमूने एकत्र किए जाएंगे।
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सोमवार को नेवादा के इछना गांव में विलुप्त सरस्वती नदी की खोज के लिए पहुंची राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम ने मशीन लगाकर जांच शुरू की। पहले दिन चली ड्रिलिंग के जरिए कुल 15 मीटर तक खोदाई कर रेत के नमूने लिए गए।
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इन नमूनों में कोई ठोस सुबूत वैज्ञानिकों के हाथ नहीं लगे हैं। एनजीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. इमरान खान ने बताया कि अभी टीम आगे भी 50 मीटर तक ड्रिलिंग करेगी। इस दौरान जो भी सिलिका और रेत मिलेगा उसे परीक्षण के लिए तेलंगाना स्थित प्रयोगशाला भेजा जाएगा।
इसके बाद ही विलुप्त सरस्वती नदी की असलियत के बारे में पता चल सकेगा। संस्थान की महिला वैज्ञानिक डॉ. प्रभा पांडेय सहित तकनीकी अधिकारी बी किरन कुमार और उनकी टीम लगातार नेवादा के इछना गांव में काम कर रही है। टीम ने बताया कि सेडीमेंट कोर ड्रिलिंग के जरिए छोटे-छोटे बंद पाइप निकलने वाले सैंड को एकत्रित कर इसका परीक्षण कराते हुए रेत की हकीकत और उसकी उम्र का पता लगाया जाएगा।
हैलिबोर्न के जरिए इछना में मिल चुकी है नदी की सूखी धाराएं
एनजीआरआई की टीम इससे पहले भी विलुप्त नदी सरस्वती की खोज के लिए हैलिबोर्न तकनीक के जरिए कई संभावित स्थानों पर जांच कर चुकी है। नेवादा के सेवथा के बाद इछना में विलुप्त नदी सरस्वती की पतली और सूखी धारा होने के कुछ संकेत और प्रमाण संस्थान के वैज्ञानिकों को मिले हैं। इसी के आधार पर वैज्ञानिकों ने इछना में ड्रिलिंग के जरिए सुबूत इकट्ठा करने की पहल शुरू की। केंद्रीय भूमि जल बोर्ड भी नदी की खोज के लिए खोदाई कर चुका है। खुदाई और हेलिबोर्न सर्वे में सूखी धाराएं मिली थीं। अब इछना गांव में 50 से 70 मीटर सेडीमेंट कोर ड्रिलिंग की जा रही है। नीचे की सतह में मिले बालू के नमूनों को एकत्र कर आप्टिकली स्टिम्युलेटेड ल्यूमिनेसिसेंस परीक्षण में जमीन के नीचे सिल्ट के उम्र का पता लगाया जाएगा।