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जान पर आफत बना आवारा आतंक
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Thu, 16 Feb 2017 11:56 PM IST
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जिले के आवारा कुत्ते हिंसक हो गए हैं। सड़क पर लोगों को दौड़ाकर काट रहे हैं। यह आवारा आतंक बढ़ता जा रहा है, लेकिन जिले के किसी भी अस्पताल में एंटीरैबीज इंजेक्शन नहीं है। इंजेक्शन लगवाने के लिए प्रतिदिन आठ से दस लोग जिला अस्पताल व दर्जनों अन्य अस्पतालों से वापस लौट रहे हैं। अस्पतालों में इंजेक्शन न होने से लोगों में आक्रोश है।
कौशाम्बी में गरीबों के उपचार के लिए 44 शासकीय अस्पताल खोले गए हैं। इनमें 6 सीएचसी, 6 पीएचसी के साथ 28 न्यू पीएचसी खोले गए हैं। इस अस्पतालों की व्यवस्था इन दिनों राम भरोसे चल रही है। आवारा आतंक जान पर आफत बना हुआ है। गांव और शहर की गलियों को घूमने वाले कुत्तों के साथ उत्पाती बंदर लोगों का दौड़ाकर शिकार कर रहे हैं। आवारा कुत्तों से निपटने के लिए जिले के एक भी अस्पतालों में एंटीरैबीज इंजेक्शन की व्यवस्था नहीं है। सात दिन से इन अस्पतालों से एंटीरैबीज इंजेक्शन गायब है। मांग पत्र भेजने के बाद भी एंटीरैबीज इंजेक्शन अस्पतालों को मुहैया नहीं कराया जा सका।
ऐसे में कुत्ते के शिकार लोगों को शासकीय अस्पताल से बैरंग लौटना पड़ रहा है। जान बचाने के लिए लोग निजी अस्पतालों में जाकर एंटीरैबीज इंजेक्शन लगवाने को मजबूर हैं। बृहस्पतिवार को चायल के सिंहपुर गांव निवासी मनोज कुमार पुत्र पंचम लाल को खेत से लौटते समय कुत्ते ने काट लिया। परिजन बच्चे को लेकर अस्पताल पहुुंचे तो उन्हें स्वास्थ्य कर्मियों ने बैरंग लौटा दिया। जिसकी शिकायत चिकित्साधिकारी से की गई। इस पर वह भी एंटीरैबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर टाल दिया। मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी डा एस के उपाध्याय का कहना है कि इन दिनों पूरे प्रदेश में एंटीरैबीज इंजेक्शन नहीं है। मांग की गई है, जल्द ही इंजेक्शन आ जाएगा।
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कौशाम्बी में गरीबों के उपचार के लिए 44 शासकीय अस्पताल खोले गए हैं। इनमें 6 सीएचसी, 6 पीएचसी के साथ 28 न्यू पीएचसी खोले गए हैं। इस अस्पतालों की व्यवस्था इन दिनों राम भरोसे चल रही है। आवारा आतंक जान पर आफत बना हुआ है। गांव और शहर की गलियों को घूमने वाले कुत्तों के साथ उत्पाती बंदर लोगों का दौड़ाकर शिकार कर रहे हैं। आवारा कुत्तों से निपटने के लिए जिले के एक भी अस्पतालों में एंटीरैबीज इंजेक्शन की व्यवस्था नहीं है। सात दिन से इन अस्पतालों से एंटीरैबीज इंजेक्शन गायब है। मांग पत्र भेजने के बाद भी एंटीरैबीज इंजेक्शन अस्पतालों को मुहैया नहीं कराया जा सका।
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ऐसे में कुत्ते के शिकार लोगों को शासकीय अस्पताल से बैरंग लौटना पड़ रहा है। जान बचाने के लिए लोग निजी अस्पतालों में जाकर एंटीरैबीज इंजेक्शन लगवाने को मजबूर हैं। बृहस्पतिवार को चायल के सिंहपुर गांव निवासी मनोज कुमार पुत्र पंचम लाल को खेत से लौटते समय कुत्ते ने काट लिया। परिजन बच्चे को लेकर अस्पताल पहुुंचे तो उन्हें स्वास्थ्य कर्मियों ने बैरंग लौटा दिया। जिसकी शिकायत चिकित्साधिकारी से की गई। इस पर वह भी एंटीरैबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर टाल दिया। मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी डा एस के उपाध्याय का कहना है कि इन दिनों पूरे प्रदेश में एंटीरैबीज इंजेक्शन नहीं है। मांग की गई है, जल्द ही इंजेक्शन आ जाएगा।
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