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मौत के मुहाने पर खड़ी शालू को चिकित्सकों ने दिया जीवनदान
Sat, 22 Dec 2018 12:30 AM IST
shailendra Kumar
kaushambi
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Published by: shailendra Kumar
Updated Sat, 22 Dec 2018 12:30 AM IST
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मंझनपुर। गरीब परिवार में जन्मी तीन वर्षीय शालू को जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने जीवनदान दिया। चिकित्सकों ने न सिर्फ सीमित संसाधन के बीच शालू का इलाज किया बल्कि खुद के पैसों से दवाओं की व्यवस्था कराई।
जिला अस्पताल में शुक्रवार की दोपहर करीब एक बजे मलाकसद्दी गांव का बुधराम अपनी तीन वर्षीय बेटी शालू को लेकर इलाज के लिए पहुंचा। शालू को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। इमरजेंसी स्टाफ ने बच्ची की हालत नाजुक देखी तो प्रयागराज के लिए रेफर करने की योजना बनाई जाने लगी। इतना सुनते ही शालू का पिता फफक पड़ा और इलाज के लिए पैसे नहीं होने की बात कही। इसी दौरान शालू की सांस फंसने लगी। बुधराम की गरीबी पर तरस खाते हुए बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विश्व प्रकाश को बुलाया गया। चिकित्सक ने एक्सरे कराया तो उसमें मवाद दिखी। शालू की हालत बिगड़ती जा रही है। कुछ दवाओं को मेडिकल स्टोर से लाने के लिए पर्ची लिखी गई तो बुधराम ने आर्थिक तंगी का हवाला दिया।
बाद में चिकित्सकों ने चंदा करके दवाएं मंगवाई और सेक्शन करके मवाद निकाली गई। शालू के फेफड़े से भारी मात्रा में मवाद को बाहर किया गया। डॉ, विश्वप्रकाश का कहना है कि शालू की हालत फिलहाल ठीक है। जिला अस्पताल में संसाधन नहीं होने की वजह से उसे चिल्ड्रेन अस्पताल (प्रयागराज) इलाज के लिए भेजा गया है। चिकित्सक का कहना है कि बचपन में किसी चोट की वजह से सीने में मवाद जमी थी।
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जिला अस्पताल में शुक्रवार की दोपहर करीब एक बजे मलाकसद्दी गांव का बुधराम अपनी तीन वर्षीय बेटी शालू को लेकर इलाज के लिए पहुंचा। शालू को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। इमरजेंसी स्टाफ ने बच्ची की हालत नाजुक देखी तो प्रयागराज के लिए रेफर करने की योजना बनाई जाने लगी। इतना सुनते ही शालू का पिता फफक पड़ा और इलाज के लिए पैसे नहीं होने की बात कही। इसी दौरान शालू की सांस फंसने लगी। बुधराम की गरीबी पर तरस खाते हुए बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विश्व प्रकाश को बुलाया गया। चिकित्सक ने एक्सरे कराया तो उसमें मवाद दिखी। शालू की हालत बिगड़ती जा रही है। कुछ दवाओं को मेडिकल स्टोर से लाने के लिए पर्ची लिखी गई तो बुधराम ने आर्थिक तंगी का हवाला दिया।
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बाद में चिकित्सकों ने चंदा करके दवाएं मंगवाई और सेक्शन करके मवाद निकाली गई। शालू के फेफड़े से भारी मात्रा में मवाद को बाहर किया गया। डॉ, विश्वप्रकाश का कहना है कि शालू की हालत फिलहाल ठीक है। जिला अस्पताल में संसाधन नहीं होने की वजह से उसे चिल्ड्रेन अस्पताल (प्रयागराज) इलाज के लिए भेजा गया है। चिकित्सक का कहना है कि बचपन में किसी चोट की वजह से सीने में मवाद जमी थी।
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