{"_id":"5d51bc278ebc3e6d06303e1f","slug":"devotees-gathered-in-temples-on-the-last-monday-of-sawan-kaushambi-news-ald252047363","type":"story","status":"publish","title_hn":"सावन के आखिरी सोमवार पर मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सावन के आखिरी सोमवार पर मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु
विज्ञापन
Devotees gathered in temples on the last Monday of Sawan
- फोटो : KAUSHAMBI
सावन के आखिरी सोमवार पर मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु
मंझनपुर। श्रावण मास का अंतिम सोमवार भी विशेष संयोग के साथ समाप्त हुआ। इस दिन शिवालयों और गंगा घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ा। लोगों ने विधि-विधान से बाबा भोलेनाथ की उपासना कर पुण्य की कामना की। भक्तों द्वारा लगाए गए हर-हर महादेव के जयकारों तथा धूप, दीप, नैवेद्य की सुगंध से जिले का माहौल भक्तिमय बना रहा।
अबकी साल सावन में कुल चार सोमवार पड़े। इनमें पहला और दूसरा सोमवार कई महत्वपूर्ण योगों के साथ आया। इसी के साथ पहले और तीसरे सोमवार पर नागपंचमी का दुर्लभ संयोग भी बना। सावन का अंतिम सोमवार भी एक विशेष संयोग के साथ समाप्त हुआ। इस दिन त्रयोदशी तिथि होने से सोम प्रदोष व्रत का संयोग बना, जो बाबा भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय है। आखिरी सोमवार को सुबह से ही जिले भर के शिवालयों में भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया था। श्रद्धालु बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, सफेद फूल, धूप, सफेद चंदन आदि लेकर शिवालय पहुंचे और इसे भगवान शिव को अर्पित कर उनकी विधि-विधान से आराधना की। कड़ा, कुबरी, कालेश्वर, संदीपन समेत सभी गंगा घाटों पर भी भक्तों का तांता लगा रहा। भक्तों ने गंगा स्नान के बाद अपनी क्षमता के हिसाब से दान-पुण्य किया। बाबा की शान में हर-हर महादेव के जयकारे जनपद भर में गूंजते रहे। तमाम भक्तों ने निर्जला और कुछ ने ऐसे व्रत भी रखा। मंदिरों के साथ भोलेनाथ घरों में भी पूजे गए।
विज्ञापन
मंझनपुर। श्रावण मास का अंतिम सोमवार भी विशेष संयोग के साथ समाप्त हुआ। इस दिन शिवालयों और गंगा घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ा। लोगों ने विधि-विधान से बाबा भोलेनाथ की उपासना कर पुण्य की कामना की। भक्तों द्वारा लगाए गए हर-हर महादेव के जयकारों तथा धूप, दीप, नैवेद्य की सुगंध से जिले का माहौल भक्तिमय बना रहा।
अबकी साल सावन में कुल चार सोमवार पड़े। इनमें पहला और दूसरा सोमवार कई महत्वपूर्ण योगों के साथ आया। इसी के साथ पहले और तीसरे सोमवार पर नागपंचमी का दुर्लभ संयोग भी बना। सावन का अंतिम सोमवार भी एक विशेष संयोग के साथ समाप्त हुआ। इस दिन त्रयोदशी तिथि होने से सोम प्रदोष व्रत का संयोग बना, जो बाबा भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय है। आखिरी सोमवार को सुबह से ही जिले भर के शिवालयों में भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया था। श्रद्धालु बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, सफेद फूल, धूप, सफेद चंदन आदि लेकर शिवालय पहुंचे और इसे भगवान शिव को अर्पित कर उनकी विधि-विधान से आराधना की। कड़ा, कुबरी, कालेश्वर, संदीपन समेत सभी गंगा घाटों पर भी भक्तों का तांता लगा रहा। भक्तों ने गंगा स्नान के बाद अपनी क्षमता के हिसाब से दान-पुण्य किया। बाबा की शान में हर-हर महादेव के जयकारे जनपद भर में गूंजते रहे। तमाम भक्तों ने निर्जला और कुछ ने ऐसे व्रत भी रखा। मंदिरों के साथ भोलेनाथ घरों में भी पूजे गए।
विज्ञापन