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Kaushambi News: साढ़े सात करोड़ से होंगे विकास कार्य, विधायक निधि की पहली किस्त जारी

Sun, 01 Jun 2025 12:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी Updated Sun, 01 Jun 2025 12:36 AM IST
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Development work will be done with seven and a half crores, first installment of MLA fund released
मंझनपुर। प्रदेश सरकार ने नए वित्तीय वर्ष में विधायक निधि की पहली किस्त जारी कर दी है। क्षेत्र के विकास के लिए तीनों विधायकों को पहली किस्त के रूप में ढाई-ढाई करोड़ रुपये दिए गए हैं। धनराशि मिलने के बाद जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) ने जनप्रतिनिधियों से प्रस्ताव मांगे हैं। ताकि विकास कार्य कराए जा सकें।
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प्रदेश सरकार प्रत्येक विधायक (विधानसभा व विधानपरिषद) को क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए हर साल पांच करोड़ देती है। यह विकास निधि ढाई-ढाई करोड़ की दो किस्तों (छह माह के अंतराल में) में दी जाती है। पहली बार की किस्त से कराए गए कार्यों का उपभोग प्रमाणपत्र देने के बाद ही सरकार शेष धनराशि जारी करती थी।
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जिले में तीन विधानसभा सीटें हैं। तीनों सीट पर समाजवादी पार्टी के विधायक हैं। मंझनपुर से इंद्रजीत सरोज, सिराथू से पल्लवी पटेल और चायल विधानसभा क्षेत्र से पूजा पाल विधायक हैं। पिछले वित्तीय वर्ष की राशि खर्च होने और नए वित्तीय वर्ष शुरू होने पर सरकार ने विधायकों को निधि की पहली किस्त जारी कर दी है।
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परियोजना निदेशक डीआरडीए देवेंद्र ओझा ने बताया कि तीनों विधायकों को निधि के रूप में ढाई-ढाई करोड़ की दर से कुल 7.5 करोड़ रुपये मिले हैं। विधायकों से विकास कार्यों के प्रस्ताव मांगे गए हैं। प्रस्ताव आने के बाद विकास कार्य कराने का काम शुरू कराया जाएगा।
मूलभूत जरूरतों के कामों को दी जाती है प्राथमिकता
-विधायक निधि से कराए जाने वाले कार्य विकास और स्थानीय जरूरतों पर आधारित होते हैं। इससे जनता को सहूलियतें मिलती हैं। पेयजल, सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता और सड़क आदि कार्य शामिल किए जा सकते हैं। इसके अलावा विद्यालय कक्ष निर्माण में भी निधि से धनराशि दी जाती है।
विधायकों को ऑनलाइन भेजने होंगे प्रस्ताव
-पूर्व के वर्षों में निधि से कराए जाने वाले कार्यों के प्रस्ताव जनप्रतिनिधि अपने लेटरपैड पर डीआरडीए को भेजते थे। वहां से प्रस्तावों की जांच कराई जाती थी। फिर प्रस्तावों को आरईडी भेजा जाता था। मैनुअल आने वाले प्रस्तावों में काफी समय लगता था। डिजिटल के बढ़ते युग में शासन ने प्रस्तावों को भी ऑनलाइन भेजने की व्यवस्था लागू कर दी है। इसलिए विधायकों को ऑनलाइन प्रस्ताव ही भेजने होंगे।

ऑनलाइन व्यवस्था पिछले साल ही लागू हो गई थी। हालांकि, पहली बार व्यवस्था लागू होने से जनप्रतिनिधियों को प्रस्ताव भेजने में समस्या आई थी। तब कुछ छूट मिल गई थी, लेकिन इस बार ऑनलाइन ही प्रस्ताव स्वीकार किए जाएंगे। परियोजना निदेशक देवेंद्र ओझा के मुताबिक, विधायकों को आईडी पासवर्ड उपलब्ध करा दिए गए हैं।
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