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स्वास्थ्य विभाग के पांच कर्मचारियों की नौकरी पर संकट
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Crisis on job of five employees of Health Department
- फोटो : KAUSHAMBI
स्वास्थ्य विभाग के पांच कर्मचारियों की नौकरी पर संकट
एसआईटी ने जांच पूरी होने तक वेतन रोकने के लिए भेजा पत्र
सीएमओ ने वेतन भुगतान पर रोक लगाने के साथ ही एसीएमओ को सौंपी जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत पांच कर्मचारियों की नौकरी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पुलिस अधीक्षक उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान प्रयागराज (एसआईटी) ने प्रारंभिक जांच में उनकी नियुक्ति फर्जी पाया है। कर्मचारियों के वेतन आहरण पर रोक लगा दी गई है। इसके अलावा पूरे मामले की जांच अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसके झा करेंगे।
मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में कार्यरत वरिष्ठ लिपिक का तबादला मई में कड़ा के लिए किया गया था। इनके स्थान पर महज दो साल की सेवा पूरी किए लिपिक निशांत को चार्ज दिया गया। इसे लेकर विभाग में पहले ही बड़े झोल का अंदेशा था। अब इस मामले में पुलिस अधीक्षक सतर्कता अधिष्ठान प्रयागराज के एक पत्र ने विभाग में सनसनी मचा दी। बताया जाता है कि निशांत बाबू की नियुक्ति प्रारंभिक जांच में फर्जी है। इस बाबत 25 मई 2020 को सीएमओ को पत्र भेज कर निशांत के वेतन आहरण पर रोक लगाने को कहा गया। इसी तरह मुख्य चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय में नियुक्त लिपिक मोहम्मद शकील, संजय वर्मा, मनोज कुमार पांडेय व कमाल अहमद आदि की नियुक्ति पर भी संदेह जाहिर किया गया है। एसआईटी से पत्र आने के बाद सीएमओ डॉ. पीएन चतुर्वेदी ने मामले की जांच अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसके झा को सौंप दी है। डॉक्टर झा का कहना है मामले की जांच किए जाने का पत्र मिला है। जांच के लिए कर्मचारियों को बुलाया जाएगा। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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इनका कहना है
पांच कर्मचारियों की नियुक्ति के बाबत एसआईटी की जांच चल रही है। विभाग को एसआईटी की तरफ से पत्र आया है। इसे लेकर कर्मचारियों के वेतन आहरण पर रोक लगा दी गई है। मामले की जांच एसीएमओ को दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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डॉ. पीएन चतुर्वेदी, सीएमओ
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एसआईटी ने जांच पूरी होने तक वेतन रोकने के लिए भेजा पत्र
सीएमओ ने वेतन भुगतान पर रोक लगाने के साथ ही एसीएमओ को सौंपी जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत पांच कर्मचारियों की नौकरी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पुलिस अधीक्षक उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान प्रयागराज (एसआईटी) ने प्रारंभिक जांच में उनकी नियुक्ति फर्जी पाया है। कर्मचारियों के वेतन आहरण पर रोक लगा दी गई है। इसके अलावा पूरे मामले की जांच अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसके झा करेंगे।
मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में कार्यरत वरिष्ठ लिपिक का तबादला मई में कड़ा के लिए किया गया था। इनके स्थान पर महज दो साल की सेवा पूरी किए लिपिक निशांत को चार्ज दिया गया। इसे लेकर विभाग में पहले ही बड़े झोल का अंदेशा था। अब इस मामले में पुलिस अधीक्षक सतर्कता अधिष्ठान प्रयागराज के एक पत्र ने विभाग में सनसनी मचा दी। बताया जाता है कि निशांत बाबू की नियुक्ति प्रारंभिक जांच में फर्जी है। इस बाबत 25 मई 2020 को सीएमओ को पत्र भेज कर निशांत के वेतन आहरण पर रोक लगाने को कहा गया। इसी तरह मुख्य चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय में नियुक्त लिपिक मोहम्मद शकील, संजय वर्मा, मनोज कुमार पांडेय व कमाल अहमद आदि की नियुक्ति पर भी संदेह जाहिर किया गया है। एसआईटी से पत्र आने के बाद सीएमओ डॉ. पीएन चतुर्वेदी ने मामले की जांच अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसके झा को सौंप दी है। डॉक्टर झा का कहना है मामले की जांच किए जाने का पत्र मिला है। जांच के लिए कर्मचारियों को बुलाया जाएगा। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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इनका कहना है
पांच कर्मचारियों की नियुक्ति के बाबत एसआईटी की जांच चल रही है। विभाग को एसआईटी की तरफ से पत्र आया है। इसे लेकर कर्मचारियों के वेतन आहरण पर रोक लगा दी गई है। मामले की जांच एसीएमओ को दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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डॉ. पीएन चतुर्वेदी, सीएमओ