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आखिर किस बात पर ललई ने छोड़ी आस
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Fri, 13 Feb 2015 12:09 AM IST
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मंझनपुर। अपने ही बच्चों के साथ विषपान करके बेटी के साथ जान गंवाने वाले अलवारा के ललई पासी ने आखिर अपना आपा क्यों खोया। यह उसके सगे भाई, भतीजे, प्रधान और पड़ोसी तक नहीं बता पा रहे हैं। लोग इतना ही बता सके कि अक्सर पति-पत्नी झगड़ा करते थे। पर, बृहस्पतिवार को पत्नी की कौन सी बात उसे चुभ गई कि उसने एक ही झटके में पूरे कुनबे के खात्मे का फैसला कर लिया। इसका खुलासा कोई नहीं कर पा रहा है। एसपी ने बताया कि घटना की सच्चाई पत्नी से पूछताछ के बाद ही सामने आएगी। फिलहाल अभी उसकी ऐसी हालत नहीं है, कि उससे कुछ पूछा जा सके।
मंझनपुर तहसील में यमुना नदी के ठीक किनारे अलवारा गांव बसा है। दलित और पिछड़ी जाति बाहुल्य इस गांव में ही शिवप्रसाद उर्फ ललई पासी का घर है। पांच भाइयों में सबसे छोटा ललई और उसके सभी भाई अलग रहते हैं। ललई के भतीजे कुलदीप पुत्र मल्हू ने बताया कि सभी भाइयों के हिस्से में करीब पांच-पांच बिस्वा जमीन है। साथ ही ललई बंटाई पर भी जमीन लेकर खेती कराता था।
वह गांव के काश्तकारों के यहां मजदूरी भी करता था। साथ ही ईंट-भट्ठे पर भी मजदूरी कर आता था। ललई के नाम लोहिया आवास भी बना है। भतीजे ने बताया कि वह शुक्रवार को ईंट भट्ठे पर काम करने को जाने के लिए भी तैयार था। इसी बीच बृहस्पतिवार की सुबह करीब 10 बजे किसी बात पर उसका पत्नी से झगड़ा हो गया। प्रधान लल्लू प्रसाद और गांव के अन्य लोग बताते हैं पति-पत्नी के बीच झगड़ा तो रोज का किस्सा था। हालांकि सुबह का झगड़ा शाम को खत्म हो जाता था। पर, गुरुवार को इनके बीच झगड़े के दौरान ऐसा क्या हुआ? जिससे दुखी होकर ललई अपनी और अपने मासूम बच्चों की जान का दुश्मन बन गया।
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महेवाघाट के अलवारा गांव में बृहस्पतिवार को जैसी दर्दनाक घटना हुई। ऐसा ही वाकया 19 जुलाई 2010 को कोखराज कोतवाली क्षेत्र के करेंहटी नौढ़िया गांव में हुआ। जहां एक नशेड़ी युवक ने जहर खिलाकर अपनी तीन बेटियों सोनी, रंजना और छोटकी को मौत की नींद सुला दिया था।
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मंझनपुर तहसील में यमुना नदी के ठीक किनारे अलवारा गांव बसा है। दलित और पिछड़ी जाति बाहुल्य इस गांव में ही शिवप्रसाद उर्फ ललई पासी का घर है। पांच भाइयों में सबसे छोटा ललई और उसके सभी भाई अलग रहते हैं। ललई के भतीजे कुलदीप पुत्र मल्हू ने बताया कि सभी भाइयों के हिस्से में करीब पांच-पांच बिस्वा जमीन है। साथ ही ललई बंटाई पर भी जमीन लेकर खेती कराता था।
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वह गांव के काश्तकारों के यहां मजदूरी भी करता था। साथ ही ईंट-भट्ठे पर भी मजदूरी कर आता था। ललई के नाम लोहिया आवास भी बना है। भतीजे ने बताया कि वह शुक्रवार को ईंट भट्ठे पर काम करने को जाने के लिए भी तैयार था। इसी बीच बृहस्पतिवार की सुबह करीब 10 बजे किसी बात पर उसका पत्नी से झगड़ा हो गया। प्रधान लल्लू प्रसाद और गांव के अन्य लोग बताते हैं पति-पत्नी के बीच झगड़ा तो रोज का किस्सा था। हालांकि सुबह का झगड़ा शाम को खत्म हो जाता था। पर, गुरुवार को इनके बीच झगड़े के दौरान ऐसा क्या हुआ? जिससे दुखी होकर ललई अपनी और अपने मासूम बच्चों की जान का दुश्मन बन गया।
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महेवाघाट के अलवारा गांव में बृहस्पतिवार को जैसी दर्दनाक घटना हुई। ऐसा ही वाकया 19 जुलाई 2010 को कोखराज कोतवाली क्षेत्र के करेंहटी नौढ़िया गांव में हुआ। जहां एक नशेड़ी युवक ने जहर खिलाकर अपनी तीन बेटियों सोनी, रंजना और छोटकी को मौत की नींद सुला दिया था।