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अफसरों की अनदेखी को कोसते रहे ग्रामीण

Mon, 19 Jan 2015 12:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी Updated Mon, 19 Jan 2015 12:13 AM IST
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Village officials are ignoring curse
शमसाबाद। सिराथू-मंझनपुर मार्ग पर रविवार की सुबह टेंपो की चपेट में आने से मधवामई के कोटेदार के बेटे की मौत के लिए गांववाले अफसरों की बेफ्रिकी को कसूरवार ठहरा रहे हैं। हादसे के बाद लोगों का गुस्सा भी इसी को लेकर फूटा था। ग्रामीणों की मानें तो गांव के समीप से गुजरे मुख्यमार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों के कारण आए दिन हादसे होते रहते हैं। करीब छह महीने पहले भी ऐसे ही एक हादसे में चित्रकूट के तीन स्नानार्थियों की जान चली गई थी। तब भी गांववालों ने सड़क पर उतरकर गांव के समीप स्पीड ब्रेकर की मांग की थी। आरोप है कि तब भी अफसरों ने जल्द ही स्पीड ब्रेकर बनवाने का आश्वासन दिया था। ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्पीड ब्रेकर बना होता, तो शायद आज यह हादसा न होता।
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बता दें कि जिला मुख्यालय मंझनपुर से सिराथू तहसील मुख्यालय होते हुए कानपुर-इलाहाबाद हाईवे को जोड़ने वाली सड़क के ठीक किनारे कोर्रई, पतौना, सेलरहा, रघवापुर, सौरई करनपुर, मधवामई आदि गांव बसे हैं। मुख्यमार्ग होने के कारण इस सड़क पर सुबह से लेकर देर रात तक वाहन फर्राटा भरते रहते हैं। वहीं सड़क किनारे बसे होने के कारण इन गांवों के बच्चे जहां सड़क के आसपास ही धमाचौकड़ी करते रहते हैं। वहीं गांववाले भी खेत, नलकूप आदि जाने के लिए दिन में 10-20 बार सड़क पार करने को मजबूर हैं। ऐसे में अक्सर इन गांवों के आसपास सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। मधवामई के पास तो मोड़ के कारण सबसे ज्यादा हादसे होते हैं।
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गांववाले बताते हैं कि अभी छह महीने पहले ही गांव के समीप टेंपो की टक्कर लगने से चित्रकूट के तीन स्नानार्थियों की मौत हो गई थी। उस समय भी ग्रामीणों  ने सड़क पर उतरकर गांव के समीप स्पीड ब्रेकर की मांग की थी। गांव के रहने वाले शिवबली सिंह, राज नारायण, अंबोल सिंह, गुलाब सिंह, बेनी प्रसाद, इसरार अहमद, बचान सिंह आदि ने बताया कि तभी भी तत्कालीन एसडीएम सिराथू ने आकर एक हफ्ते के भीतर स्पीड ब्रेकर बनवाने का आश्वासन दिया था। लोगों में गुस्सा है कि एसडीएम का वह आश्वासन अब तक पूरा नहीं हुआ है। यदि उसी हादसे की बाद गांव के समीप स्पीड ब्रेकर बन गया होता, तो शायद रविवार की सुबह हुआ यह दर्दनाक हादसा न होता। अफसरों की इसी अनदेखी को लेकर रविवार को लोगों का गुस्सा फूटा था।
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सड़क हादसे में रविवार की सुबह मधवामई के रामबाबू की मौत से उसकी पत्नी रेखा देवी की दुनिया पलभर में वीरान हो गई। बता दें कि गांव के कोटेदार विजय बहादुर सिंह के दो बेटे रामबाबू (29) और अंशू (25) हैं। रामबाबू की शादी करीब नौ साल पहले नौढ़िया गांव की रहने वाली रेखा देवी से हुई थी। रामबाबू-रेखा के तीन मासूम बच्चे हिमांशु (7), मांसू (5) और सालभर की गुड़िया जैसी बेटी सोनाक्षी है। रविवार की सुबह हादसे में पति को गंवाने वाली रेखा जहां बेसुध हो गई थी। वहीं मां और परिवार के अन्य सदस्यों को बिलखते देख उसके तीनों बच्चे भी सिसक रहे थे।
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