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वकीलों की दलील निकली झूठी, पूर्व चेयरमैन की निकली जमीन
Sun, 06 Jan 2019 01:48 AM IST
shailendra Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Published by: shailendra Kumar
Updated Sun, 06 Jan 2019 01:48 AM IST
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जमीन की पैमाइश करते अधिकारी
कचहरी के समीप जिस जमीन को लेकर अधिवक्ता व पूर्व चेयरमैन नरेश चंद्र के बीच विवाद था, उस पर प्रशासन ने विराम लगाने की कोशिश की। शनिवार को अफसरों ने पुलिस बल के साथ जमीन की पैमाइश कराई तो वह पूर्व चेयरमैन नरेश चंद्र की भूमिधरी निकली। अफसरों ने जमीन की हदबंदी करा दी है।
कचहरी के समीप पूर्व चेयरमैन नरेश चंद्र केसरवानी ने एक जमीन का बैनामा कराया था। वह उस पर निर्माण करा रहे थे। अधिवक्ता उसका विरोध कर रहे थे। उनका कहना है कि भूमिधरी की आड़ में सड़क की तरफ ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। इस जमीन पर अधिवक्ता अपना चैंबर बनाना चाह रहे थे। इसी बात को लेकर विवाद था। एक जनवरी को उसी जमीन पर पूर्व चेयरमैन ने भोज का आयोजन किया था। राजस्व विभाग की टीम भी पैमाइश के लिए पहुंची थी। टीम के सामने ही दोनों पक्ष भिड़ गए और जमकर मारपीट हुई।
घटना में नरेश चंद्र और अधिवक्ताओं की तरफ से क्रास रिपोर्ट भी सदर कोतवाली में दर्ज कराई। घटना के विरोध में अधिवक्ता हड़ताल पर थे। शनिवार को एसडीएम सदर सतीश चंद्र की अगुवाई में पहुंचे पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने जमीन की नाप की। एसडीएम का कहना है कि जिस स्थान पर विवाद था वहां पर कोई ग्राम समाज की जमीन नहीं थी। जमीन की नाप करके हडबंदी कर दिया गया है।
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कचहरी के समीप पूर्व चेयरमैन नरेश चंद्र केसरवानी ने एक जमीन का बैनामा कराया था। वह उस पर निर्माण करा रहे थे। अधिवक्ता उसका विरोध कर रहे थे। उनका कहना है कि भूमिधरी की आड़ में सड़क की तरफ ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। इस जमीन पर अधिवक्ता अपना चैंबर बनाना चाह रहे थे। इसी बात को लेकर विवाद था। एक जनवरी को उसी जमीन पर पूर्व चेयरमैन ने भोज का आयोजन किया था। राजस्व विभाग की टीम भी पैमाइश के लिए पहुंची थी। टीम के सामने ही दोनों पक्ष भिड़ गए और जमकर मारपीट हुई।
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घटना में नरेश चंद्र और अधिवक्ताओं की तरफ से क्रास रिपोर्ट भी सदर कोतवाली में दर्ज कराई। घटना के विरोध में अधिवक्ता हड़ताल पर थे। शनिवार को एसडीएम सदर सतीश चंद्र की अगुवाई में पहुंचे पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने जमीन की नाप की। एसडीएम का कहना है कि जिस स्थान पर विवाद था वहां पर कोई ग्राम समाज की जमीन नहीं थी। जमीन की नाप करके हडबंदी कर दिया गया है।
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