{"_id":"582cad794f1c1b57368ffd27","slug":"crime-in-saidanpur","type":"story","status":"publish","title_hn":"10 कातिलों को आजीवन कारावास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
10 कातिलों को आजीवन कारावास
कौशाम्बी ब्यूरो
Updated Thu, 17 Nov 2016 12:53 AM IST
विज्ञापन
court shimla
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बच्चों के विवाद में मारपीट पर समझौता को गए एदिलपुर गांव के संतोष पासी की 26 जून 2011 की सुबह सैदनपुर गांव में चापड़ व बरछी से हत्या कर दी गई। मृतक के भाई ने दस लोगों के खिलाफ बलवा और हत्या का मुकदमा मंझनपुर थाने में दर्ज कराया था। पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। बुधवार को गवाहों को सुनने के बाद अदालत ने सभी हत्यारोपियों को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक मंझनपुर कोतवाली के एदिलपुर गांव निवासी राजकरन व लवकुश 25 जून 2011 को करारी के अगियौना गांव बच्चों को लेकर मेला देखने गया था। जहां सैदनपुर गांव के गनेश व उसके साथियों से बासुरी बजाने को लेकर विवाद हो गया। इसी बात को लेकर 26 जून की सुबह लालता प्रसाद भाई संतोष के अलावा राजकरन, फूलचंद्र, उदय भान, लवकुश व इन्द्रजीत के साथ सुलह समझौता के लिए सैदनपुर गांव गए थे। जहां कोटेदार जगदीश ने ललकारते हुए साथियों के साथ हमला बोल दिया। इस पर लोग जान बचाकर भागे। जब संतोष परशुराम के घर में घुस गया तो हमलावरों ने उस पर चाकू, चापड से ताबड़तोड़ प्रहार कर दिया। चीख पुकार सुन गांव के लोग घटना स्थल पर पहुंचे। ग्रामीणों को देख हमलावर भाग निकले। जब तक लोग गंभीर रूप से जख्मी संतोष को इलाज के लिए अस्पताल ले जाते उसकी मौत हो चुकी थी। मृतक संतोष के भाई लालता प्रसाद की तहरीर पर पर मंझनपुर पुलिस ने कोटेदार जगदीश, करन सिंह, बलवंत, द्वारिका, नथनलाल, गनेश प्रसाद, इन्द्रलाल, रघुराज, रमेश कुमार, अशर्फीलाल आदि के खिलाफ बलवा और हत्या का मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। मामला अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम में चला। सहायक शासकीय अधिवक्ता अब्दुल लतीफ अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं को सुनने के बाद न्यायाधीश ने सभी आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष के मुताबिक मंझनपुर कोतवाली के एदिलपुर गांव निवासी राजकरन व लवकुश 25 जून 2011 को करारी के अगियौना गांव बच्चों को लेकर मेला देखने गया था। जहां सैदनपुर गांव के गनेश व उसके साथियों से बासुरी बजाने को लेकर विवाद हो गया। इसी बात को लेकर 26 जून की सुबह लालता प्रसाद भाई संतोष के अलावा राजकरन, फूलचंद्र, उदय भान, लवकुश व इन्द्रजीत के साथ सुलह समझौता के लिए सैदनपुर गांव गए थे। जहां कोटेदार जगदीश ने ललकारते हुए साथियों के साथ हमला बोल दिया। इस पर लोग जान बचाकर भागे। जब संतोष परशुराम के घर में घुस गया तो हमलावरों ने उस पर चाकू, चापड से ताबड़तोड़ प्रहार कर दिया। चीख पुकार सुन गांव के लोग घटना स्थल पर पहुंचे। ग्रामीणों को देख हमलावर भाग निकले। जब तक लोग गंभीर रूप से जख्मी संतोष को इलाज के लिए अस्पताल ले जाते उसकी मौत हो चुकी थी। मृतक संतोष के भाई लालता प्रसाद की तहरीर पर पर मंझनपुर पुलिस ने कोटेदार जगदीश, करन सिंह, बलवंत, द्वारिका, नथनलाल, गनेश प्रसाद, इन्द्रलाल, रघुराज, रमेश कुमार, अशर्फीलाल आदि के खिलाफ बलवा और हत्या का मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। मामला अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम में चला। सहायक शासकीय अधिवक्ता अब्दुल लतीफ अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं को सुनने के बाद न्यायाधीश ने सभी आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
विज्ञापन