{"_id":"5e3c6d998ebc3ee5923fd41c","slug":"court-notice-to-ex-sp-kaushambi-news-ald267777096","type":"story","status":"publish","title_hn":"तत्कालीन एसपी और इंस्पेक्टर मंझनपुर को अदालत ने किया तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तत्कालीन एसपी और इंस्पेक्टर मंझनपुर को अदालत ने किया तलब
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंझनपुर। अपर जिला जज (एससीएसटी कोर्ट )अतुल कुमार की अदालत ने कत्र्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने के आरोप में तत्कालीन एसपी प्रदीप कुमार गुप्ता एवं इंस्पेक्टर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। इन अफसरों ने तहरीर के बावजूद अनुसूचित जाति की महिला से दुष्कर्म के मामले में रिपोर्ट नहीं दर्ज किया था। अदालत ने मौजूदा एसपी अभिनंदन और कोतवाल रवींद्र त्रिपाठी की प्रशंसा भी किया।
मंझनपुर कोतवाली क्षेत्र में रहने वाली अनुसूचित जाति की एक महिला के साथ जुलाई 2019 में दुष्कर्म हुआ था। पीड़िता ने मामले में एक नामजद व चार अज्ञात के खिलाफ तहरीर नगर कोतवाली में दिया था। कार्रवाई नहीं करने पर शिकायत तत्कालीन एसपी प्रदीप गुप्ता से किया था। इसके बाद भी एफआईआर नहीं दर्ज हुई तो पीड़ित महिला ने 156 (3) के तहत रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए अपर जिला जज एससीएसटी की अदालत में अर्जी दाखिल किया। इसी बीच पहले एसपी प्रदीप गुप्ता का दिसंबर 2019 में और फिर जनवरी 2020 में इंस्पेक्टर मंझनपुर उदयवीर सिंह का तबादला हो गया। एसपी अभिनंदन व कोतवाल रवींद्र त्रिपाठी ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए एफआईआर दर्ज कर सूचना अदालत को दे दी। पीड़ित महिला के अधिवक्ता ने गुरुवार को अदालत में बताया कि एफआईआर दर्ज हो गई है।
इस पर अदालत ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि तत्कालीन एसपी और इंस्पेक्टर ने अपने कत्र्तव्यों के पालन में लावरवाही किया है। नतीजतन पीड़िता को समय पर इंसाफ नहीं दिलाया जा सका। साथ ही कोर्ट का वक्त बर्बाद हुआ। इसे लेकर अदालत ने तत्कालीन एसपी और इंस्पेक्टर को नोटिस जारी कर 15 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट हाजिर होकर अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मंझनपुर कोतवाली क्षेत्र में रहने वाली अनुसूचित जाति की एक महिला के साथ जुलाई 2019 में दुष्कर्म हुआ था। पीड़िता ने मामले में एक नामजद व चार अज्ञात के खिलाफ तहरीर नगर कोतवाली में दिया था। कार्रवाई नहीं करने पर शिकायत तत्कालीन एसपी प्रदीप गुप्ता से किया था। इसके बाद भी एफआईआर नहीं दर्ज हुई तो पीड़ित महिला ने 156 (3) के तहत रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए अपर जिला जज एससीएसटी की अदालत में अर्जी दाखिल किया। इसी बीच पहले एसपी प्रदीप गुप्ता का दिसंबर 2019 में और फिर जनवरी 2020 में इंस्पेक्टर मंझनपुर उदयवीर सिंह का तबादला हो गया। एसपी अभिनंदन व कोतवाल रवींद्र त्रिपाठी ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए एफआईआर दर्ज कर सूचना अदालत को दे दी। पीड़ित महिला के अधिवक्ता ने गुरुवार को अदालत में बताया कि एफआईआर दर्ज हो गई है।
विज्ञापन
इस पर अदालत ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि तत्कालीन एसपी और इंस्पेक्टर ने अपने कत्र्तव्यों के पालन में लावरवाही किया है। नतीजतन पीड़िता को समय पर इंसाफ नहीं दिलाया जा सका। साथ ही कोर्ट का वक्त बर्बाद हुआ। इसे लेकर अदालत ने तत्कालीन एसपी और इंस्पेक्टर को नोटिस जारी कर 15 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट हाजिर होकर अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है।
विज्ञापन