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राजीव की हत्या से उपजी सहानुभूति का दोआबा में नहीं दिखा असर
Thu, 04 Apr 2019 12:28 AM IST
shailendra Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Published by: shailendra Kumar
Updated Thu, 04 Apr 2019 12:28 AM IST
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सिराथू। दसवीं लोक सभा का मध्यावधि चुनाव 1991 में हुआ। चुनाव के दौरान ही 21 मई को राजीव गांधी की हत्या होने से देश भर में कांग्रेस के पक्ष में सहानुभूति की लहर पैदा हो गई थी। पर, उपेक्षा से नाराज दोआबा की जनता पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। उसने अपना फैसला जनता दल से मैदान में उतरे शशि प्रकाश के पक्ष में सुनाया। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे पायदान पर चले गए थे।
10 वीं लोकसभा चुनाव के दौरान राजीव गांधी की हत्या होने से कांग्रेस के पक्ष में सहानुभति की लहर पैदा हो गई थी। पर, दोआबा की जनता ने लगातार की जा रही उपेक्षा से नाराज होकर कांग्रेस से मुंह मोड़ लिया था। चुनाव में जहां देश भर में कांग्रेस के पक्ष में सहानुभूति की लहर थी। वहीं दोआबा में कांग्रेस प्रत्याशी रामनिहोर राकेश तीसरे पायदान पर चले गए। उद्योग शून्य दोआबा की जनता को जनता दल से एक नई उम्मीद दिखी। फिर क्या था माहौल जद प्रत्याशी शशि प्रकाश के पक्ष में बनता चला गया। हालांकि भाजपा की मंजू चंद्रा ने भी पूरा जोर लगा रखा था। खाकी पैंट वालाें की कड़ी मेहनत से टक्कर सीधे जद और बीजेपी के बीच हो गई थी।
कांग्रेस का जनाधार खिसक कर जद और बीजेपी की ओर चला गया। नतीजतन कांग्रेस के दिग्गज तमाम प्रयास के बावजूद जनता का मूड बदलने में नाकाम हुए थे। चुनाव में जद प्रत्याशी शशि प्रकाश ने 121260 मत पाकर अपनी जीत दर्ज कराने में कामयाब रहे। वहीं भाजपा प्रत्याशी मंजू चंद्रा 96885 मत पाकर दूसरा स्थान हासिल किया। कांग्रेस प्रत्याशी रामनिहोर राकेश 40611 मत पाकर तीसरे स्थान पर सिमट गए। बीएसपी के कन्हैया लाल को 39952,जनता पार्टी के प्रत्याशी क न्हैया लाल सोनकर को 39753, निर्दल राम प्रकाश को 4081,तुलसी दास को 3615, प्रहलाद कुमार चौधरी को 3223,डीडीपी के कल्लू प्रसाद को 2255, निर्दल आनंद स्वरूप को 1236, विदेश्वरी प्रसाद आर्य को 1217 और राम प्रसाद विद्यार्थी को 1009 वोट ही मिल सके।
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दसवीं लोक सभा चुनाव के दौरान राजीव गांधी ने कानपुर से इलाहाबाद जाने के दौरान सैनी बस स्टाप के सामने कांग्रेस प्रत्याशी रामनिहोर राकेश के पक्ष में नुक्कड़ सभा को सम्बोधित किया था। रात में सभा के लिए उस वक्त गैस की रोशनी का इंतजाम डॉ अंसार ने करवाया। जगह-जगह स्वागत के कारण राजीव गांधी का काफिला अपने निर्धारित समय से काफी देर रात तकरीबन 9 बजे सैनी पहुंचा। राजीव गांधी को अपने बीच देख कार्यकर्ता बेकाबू हो रहे थे, इस पर सुरक्षा व्यवस्था में तैनात सैनी कोतवाली की फोर्स ने भीड़ रोकना चाहा तो तख्तनुमा मंच से राजीव गांधी ने दरोगा को डांट कर खामोश करा दिया था। कहा था कि पार्टी कार्यकर्ताओं को समीप आने से न रोका जाए। राजीव दस मिनट का संम्बोधन कर इलाहाबाद (प्रयागराज) के लिए रवाना हो गए थे। कांग्रेस के बुजुर्ग नेता पूर्व ब्लॉक प्रमुख राम प्रसाद त्रिपाठी बताते हैं कि राजीव जी ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को तोड़कर स्थानीय कार्यकर्ताओं से हाथ भी मिलाए थे। इसी के कुछ दिन बाद ही राजीव गांधी की हत्या हो गई थी।
दसवीं लोकसभा चुुनाव में दोआबा की चायल सुरक्षित सीट से भाजपा ने मंजू चंद्रा को मैदान में उतारा था। दोआबा से भाजपा पहली बार चुनाव मैदान में अपना प्रत्याशी उतारा था। उस वक्त दोआबा में भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने के लिए पार्टी के चेहरा माने जाने वाले अटल बिहारी बाजपेयी मंझनपुर में एक जनसभा को सम्बोधित करने के लिए आए थे। उन्होंने मंच से दोआबा की जनता से पार्टी प्रत्याशी मंजू चंद्रा के पक्ष में मतदान करने की पुरजोर अपील की थी। सियासी पंडितों का मानना है कि यह बाजपेयी जी का ही असर रहा कि पहले ही प्रयास में भाजपा मुख्य मुकाबले में आ गई थी।
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10 वीं लोकसभा चुनाव के दौरान राजीव गांधी की हत्या होने से कांग्रेस के पक्ष में सहानुभति की लहर पैदा हो गई थी। पर, दोआबा की जनता ने लगातार की जा रही उपेक्षा से नाराज होकर कांग्रेस से मुंह मोड़ लिया था। चुनाव में जहां देश भर में कांग्रेस के पक्ष में सहानुभूति की लहर थी। वहीं दोआबा में कांग्रेस प्रत्याशी रामनिहोर राकेश तीसरे पायदान पर चले गए। उद्योग शून्य दोआबा की जनता को जनता दल से एक नई उम्मीद दिखी। फिर क्या था माहौल जद प्रत्याशी शशि प्रकाश के पक्ष में बनता चला गया। हालांकि भाजपा की मंजू चंद्रा ने भी पूरा जोर लगा रखा था। खाकी पैंट वालाें की कड़ी मेहनत से टक्कर सीधे जद और बीजेपी के बीच हो गई थी।
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कांग्रेस का जनाधार खिसक कर जद और बीजेपी की ओर चला गया। नतीजतन कांग्रेस के दिग्गज तमाम प्रयास के बावजूद जनता का मूड बदलने में नाकाम हुए थे। चुनाव में जद प्रत्याशी शशि प्रकाश ने 121260 मत पाकर अपनी जीत दर्ज कराने में कामयाब रहे। वहीं भाजपा प्रत्याशी मंजू चंद्रा 96885 मत पाकर दूसरा स्थान हासिल किया। कांग्रेस प्रत्याशी रामनिहोर राकेश 40611 मत पाकर तीसरे स्थान पर सिमट गए। बीएसपी के कन्हैया लाल को 39952,जनता पार्टी के प्रत्याशी क न्हैया लाल सोनकर को 39753, निर्दल राम प्रकाश को 4081,तुलसी दास को 3615, प्रहलाद कुमार चौधरी को 3223,डीडीपी के कल्लू प्रसाद को 2255, निर्दल आनंद स्वरूप को 1236, विदेश्वरी प्रसाद आर्य को 1217 और राम प्रसाद विद्यार्थी को 1009 वोट ही मिल सके।
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दसवीं लोक सभा चुनाव के दौरान राजीव गांधी ने कानपुर से इलाहाबाद जाने के दौरान सैनी बस स्टाप के सामने कांग्रेस प्रत्याशी रामनिहोर राकेश के पक्ष में नुक्कड़ सभा को सम्बोधित किया था। रात में सभा के लिए उस वक्त गैस की रोशनी का इंतजाम डॉ अंसार ने करवाया। जगह-जगह स्वागत के कारण राजीव गांधी का काफिला अपने निर्धारित समय से काफी देर रात तकरीबन 9 बजे सैनी पहुंचा। राजीव गांधी को अपने बीच देख कार्यकर्ता बेकाबू हो रहे थे, इस पर सुरक्षा व्यवस्था में तैनात सैनी कोतवाली की फोर्स ने भीड़ रोकना चाहा तो तख्तनुमा मंच से राजीव गांधी ने दरोगा को डांट कर खामोश करा दिया था। कहा था कि पार्टी कार्यकर्ताओं को समीप आने से न रोका जाए। राजीव दस मिनट का संम्बोधन कर इलाहाबाद (प्रयागराज) के लिए रवाना हो गए थे। कांग्रेस के बुजुर्ग नेता पूर्व ब्लॉक प्रमुख राम प्रसाद त्रिपाठी बताते हैं कि राजीव जी ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को तोड़कर स्थानीय कार्यकर्ताओं से हाथ भी मिलाए थे। इसी के कुछ दिन बाद ही राजीव गांधी की हत्या हो गई थी।
दसवीं लोकसभा चुुनाव में दोआबा की चायल सुरक्षित सीट से भाजपा ने मंजू चंद्रा को मैदान में उतारा था। दोआबा से भाजपा पहली बार चुनाव मैदान में अपना प्रत्याशी उतारा था। उस वक्त दोआबा में भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने के लिए पार्टी के चेहरा माने जाने वाले अटल बिहारी बाजपेयी मंझनपुर में एक जनसभा को सम्बोधित करने के लिए आए थे। उन्होंने मंच से दोआबा की जनता से पार्टी प्रत्याशी मंजू चंद्रा के पक्ष में मतदान करने की पुरजोर अपील की थी। सियासी पंडितों का मानना है कि यह बाजपेयी जी का ही असर रहा कि पहले ही प्रयास में भाजपा मुख्य मुकाबले में आ गई थी।