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मजदूरों से ज्यादा रसोइयों की दशा खराब: उमाशंकर

Mon, 24 Feb 2020 12:45 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 24 Feb 2020 12:45 AM IST
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Condition of cooks worse than laborers: Umashankar
मजदूरों से ज्यादा रसोइयों की दशा खराब: उमाशंकर
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सिराथू। प्राथमिक स्कूल में बच्चों के दिन का खाना भोजन बानने वाले रसोइयों की दशा मनरेगा मजदूरों एवं होटल के नौकरों से भी ज्यादा खराब है। बेसिक शिक्षा विभाग हाड़तोड़ मेहनत करवाने के बाद मानदेय के रूप में महज पंद्रह सौ रुपये ही देता है। सिराथू क्षेत्र के प्राइमरी स्कूलों में काम करने वाले रसोइयों ने विभाग के इस अन्याय की खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाना शुरू कर दिया है। रविवार को रसोइया संघ की बैठक सिराथू ब्लाक परिसर में हुई।

बैठक में संघ के जिलाध्यक्ष उमाशंकर सरोज ने कहा कि मनरेगा में काम करने वाले मजदूर को सरकार एक दिन का मानदेय 182 रुपये देती है। वहीं रसोइयों को 50 रुपये बेसिक शिक्षा विभाग देता है। इसी तरह होटलों एवं दुकानों पर काम करने वाले श्रमिकों को हर माह 8 से 10 हजार रुपये कमाते हैं। पंद्रह सौ रुपये से एक रसोइया सारा दिन स्कूल में काम कर अपने परिवार को कैसे पाल सकता है। रसोइयों की दशा मनरेगा के मजदूर और होटलों में काम करने वालो से ज्यादा खराब है। रसोइयों ने मानदेय 10 हजार रुपये निर्धारित किए जाने की मांग उठाई। चेताया कि मांगे पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन होगा। बैठक में सुमन देवी, सरिता देवी, चिरई देवी, गीता देवी आदि रहीं।
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