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कौशाम्बी में नतमस्तक हुआ कम्बोडिया
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Sun, 26 Feb 2017 11:50 PM IST
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kaushambi
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शांति दूत गौतम बुद्ध की तपोस्थली में कम्बोडिया रविवार को नतमस्तक हो गया। गौतम बुद्ध के अनुयायी कम्बोडिया के डिप्टी चीफ ऑफ कंबोडियन व कम्बोडिया के धर्मगुरू द्वितीय संघ नायक ने कम्बोडियाई मंदिर का उद्घाटन करने के साथ ही 108 भिक्षुओं को रविवार के दिन दीक्षा दिलाई। कम्बोडियाई दल के कौशाम्बी आते ही तपोस्थली में सुरक्षा व्यवस्था के तगड़े बंदोबस्त किए गए थे। कम्बोडिया के डिप्टी चीफ ऑफ कंबोडियन ने मंदिर की देखरेख करने वाले हरियाणा के श्रीतारा मौर को आश्वस्त किया कि यहां का सुंदरीकरण कम्बोडिया की सरकार कराएगी।
कौशाम्बी के कोसम ईनाम में भगवान गौतम बुद्ध ने चर्तुमाषा किया था। गौतम बुद्ध ने घोषिता राम विहार में रहकर तप करने के साथ शांति व अंहिसा का उपदेश दिया था। गौतम बुद्ध की इस तपोस्थली को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ स्थान मिला है। बुद्ध के अनुयायी जब तक यहां नहीं आते हैं, उनकी तीर्थयात्रा अधूरी मानी जाती है। यही कारण है कि कम्बोडिया के लोग हर साल बड़ी संख्या में आते हैं। गौतम बुद्ध का यहां कोई मंदिर नहीं था।
कम्बोडिया की सरकार ने यहां एक भव्य मंदिर बनवाया। यह मंदिर करीब दस साल से बन रहा था। मंदिर का निर्माण तीन महीने पहले हो गया था। करोड़ों की लागत से बने मंदिर का उद्घाटन करने के लिए रविवार की सुबह साढ़े सात बजे कम्बोडिया राज्यसभा के काउंसलर व डिप्टी चीफ ऑफ कंबोडियन मिशन फैकिम चौंग उद्घाटन करने के लिए आए। उनके साथ धर्मगुरू डॉ. ऐम लिन हिंग भी थे। ऐम लिन हिंग कम्बोडिया के धर्मगुरू हैं। इनको प्रथम धर्मगुरू संघराजा के बाद द्वितीय संघ नायक का स्थान मिला है। उद्घाटन करने के बाद डिप्टी चीफ व धर्मगुरू ने 108 भिक्षुओं को पूजा-पाठ कराने के बाद भव्य मंदिर के भीतर दीक्षा दिलाई। करीब 11 बजे से शुरू हुई इनकी दीक्षा दोपहर दो बजे तक चली। दीक्षा ग्रहण के बाद सभी लोग बाहर निकले और कौशाम्बी तपोस्थली का भ्रमण किया।
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सुरक्षा में लगी रही चार थानों की फोर्स
मंदिर का उद्घाटन करने आए कंबोडिया राज्यसभा के काउंसलर व डिप्टी चीफ ऑफ कंबोडियन मिशन फैकिम चौंग व धर्मगुरू की सुरक्षा में कौशाम्बी, सरायअकिल, करारी, पूरामुफ्ती की फोर्स व स्कॉट के जवान लगे रहे। कार्यक्रम समाप्ति के बाद शाम को रवानगी के वक्त प्रोटोकाल के मुताबिक स्कॉट व संबंधित थानों की फोर्स उन्हें इलाहाबाद की सीमा तक छोड़ने गई।
देखने के लिए उमड़ा जनसैलाब
कम्बोडिया के काउंसलर व डिप्टी चीफ ऑफ कंबोडियन मिशन, धर्म गुरू डॉ. एम लिन हिंग को देखने व मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोसम इनाम सहित आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। भीड़ की स्थिति यह रही कि उन्हें संभालने के लिए पुलिस के जवानों को मशक्कत करनी पड़ी। दस बजे उद्घाटन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भीड़ धीरे-धीरे कम होने लगी तो सुरक्षा में लगे जवानों ने राहत की सांस ली।
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कौशाम्बी के कोसम ईनाम में भगवान गौतम बुद्ध ने चर्तुमाषा किया था। गौतम बुद्ध ने घोषिता राम विहार में रहकर तप करने के साथ शांति व अंहिसा का उपदेश दिया था। गौतम बुद्ध की इस तपोस्थली को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ स्थान मिला है। बुद्ध के अनुयायी जब तक यहां नहीं आते हैं, उनकी तीर्थयात्रा अधूरी मानी जाती है। यही कारण है कि कम्बोडिया के लोग हर साल बड़ी संख्या में आते हैं। गौतम बुद्ध का यहां कोई मंदिर नहीं था।
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कम्बोडिया की सरकार ने यहां एक भव्य मंदिर बनवाया। यह मंदिर करीब दस साल से बन रहा था। मंदिर का निर्माण तीन महीने पहले हो गया था। करोड़ों की लागत से बने मंदिर का उद्घाटन करने के लिए रविवार की सुबह साढ़े सात बजे कम्बोडिया राज्यसभा के काउंसलर व डिप्टी चीफ ऑफ कंबोडियन मिशन फैकिम चौंग उद्घाटन करने के लिए आए। उनके साथ धर्मगुरू डॉ. ऐम लिन हिंग भी थे। ऐम लिन हिंग कम्बोडिया के धर्मगुरू हैं। इनको प्रथम धर्मगुरू संघराजा के बाद द्वितीय संघ नायक का स्थान मिला है। उद्घाटन करने के बाद डिप्टी चीफ व धर्मगुरू ने 108 भिक्षुओं को पूजा-पाठ कराने के बाद भव्य मंदिर के भीतर दीक्षा दिलाई। करीब 11 बजे से शुरू हुई इनकी दीक्षा दोपहर दो बजे तक चली। दीक्षा ग्रहण के बाद सभी लोग बाहर निकले और कौशाम्बी तपोस्थली का भ्रमण किया।
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सुरक्षा में लगी रही चार थानों की फोर्स
मंदिर का उद्घाटन करने आए कंबोडिया राज्यसभा के काउंसलर व डिप्टी चीफ ऑफ कंबोडियन मिशन फैकिम चौंग व धर्मगुरू की सुरक्षा में कौशाम्बी, सरायअकिल, करारी, पूरामुफ्ती की फोर्स व स्कॉट के जवान लगे रहे। कार्यक्रम समाप्ति के बाद शाम को रवानगी के वक्त प्रोटोकाल के मुताबिक स्कॉट व संबंधित थानों की फोर्स उन्हें इलाहाबाद की सीमा तक छोड़ने गई।
देखने के लिए उमड़ा जनसैलाब
कम्बोडिया के काउंसलर व डिप्टी चीफ ऑफ कंबोडियन मिशन, धर्म गुरू डॉ. एम लिन हिंग को देखने व मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोसम इनाम सहित आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। भीड़ की स्थिति यह रही कि उन्हें संभालने के लिए पुलिस के जवानों को मशक्कत करनी पड़ी। दस बजे उद्घाटन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भीड़ धीरे-धीरे कम होने लगी तो सुरक्षा में लगे जवानों ने राहत की सांस ली।