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एक रुपये के पर्चे पर मुफ्त इलाज का दावा, दवा खरीदने में मरीजों का निकल रहा दिवाला

Wed, 07 Jul 2021 12:27 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 07 Jul 2021 12:27 AM IST
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Claim of free treatment on one rupee prescription, insolvency of patients in buying medicine
आमजन को सस्ता व मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया जिला अस्पताल मरीजों में मरीजों की जेब कट रही है। दूर-दराज से मरीज अस्पताल आकर एक रुपये का पर्चा कटवाते हैं लेकिन जब उन्हें बाहर की महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ती है तो वह खुद को ठगा महसूस करते हैं। इतना ही नहीं अस्पताल में आधे से ज्यादा चिकित्सक समय से ओपीडी में आते ही नहीं है। जिसकी वजह से मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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जिला अस्पताल में इलाज की आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। यहां पर फ्री डायलिसिस, डिजिटल एक्स-रे, मॉडर्न पौथोलॉजी, सीटी स्कैन आदि की सुविधा है। इसी कारण जिले भर से मरीज सस्ता व मुफ्त इलाज का सपना लेकर जिला अस्पताल आते हैं।
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यहां रोजाना करीब सात सौ से आठ सौ मरीजों की ओपीडी होती है। 55 से 70 के करीब भर्ती करके मरीज उपचारित किए जाते हैं। पर, यहां मुफ्त इलाज का दावा सपना ही साबित हो रहा है। मरीज एक रुपये का पर्चा कटवाकर जब चिकित्सक के पास इलाज कराने जाता है तो उसे सादे कागज पर बाहर की महंगी दवाएं लिख दी जाती हैं। जिसे खरीदने में मरीज का दिवाला निकल जाता है।
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सामान्य उल्टी-दस्त आदि के मामले में भी छह-सात सौ की दवा बाहर से लिखी जाती है। इसके अलावा जिन मरीजों का ऑपरेशन होता है उन्हें भी करीब तीन से चार हजार रुपये की दवा बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही है।
घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिलते चिकित्सक
मंझनपुर। अमर उजाला ने मंगलवार को जिला अस्पताल में चिकित्सकों के कक्षों की पड़ताल की। इस दौरान आधे से ज्यादा चिकित्सक अपनी ओपीडी से गायब रहे। अस्पताल की ओपीडी में डॉ. संजीव सिंह, डॉ. इरशाद, डॉ. सुरभि प्रकाश, डॉ. विश्व प्रकाश ही मौजूद थे। इसके अलावा अस्थि रोग का एक भी चिकित्सक मौजूद नहीं था। मरीज पर्चा कटवाकर चिकित्सक कक्ष के बाहर उनका इंतजार करते रहे, लेकिन 12 बजे तक बाकी के चिकित्सक अस्पताल नहीं पहुंचे थे।
भगवान भरोसे है पीकू वार्ड
कोरोना की तीसरी लहर को लेकर जिला अस्पताल में पीकू वार्ड बनाया गया है। यहां पर चार बच्चे भर्ती है। यहां स्टाफ सुबह और शाम के वक्त सिर्फ ड्यूटी की फर्ज अदायगी करने के लिए आता है। बाकी के सारा दिन स्टाफ कक्ष में ताला लगा रहता है। अगर किसी बच्चे को अचानक तकलीफ बढ़े तो उसके तीमारदार इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सक के पास ले जाते हैं।
यह रहा मरीजों का दर्द
जिला अस्पताल में इलाज कराने आई अफसाना का कहना है कि वह सुबह नौ बजे आ गईं। उसे हाथ में दर्द की शिकायत है। अस्थि रोग कक्ष के बाहर बैठी अफसाना चिकित्सक के नहीं आने पर फिजीशियन से दवा लिखवाकर वापस लौट गई।
इलाज कराने आए पुरुषोत्तम को स्किन की समस्या है। उसके मुताबिक वह तीन बार अस्पताल आकर लौट रहा है, लेकिन चिकित्सक आज तक नहीं मिले। जिले में निजी स्किन चिकित्सक भी नहीं है। मजबूरी में नीम-हकीमों से दवा लेनी पड़ रही है।
देवखरपुर गांव के मतमंतर सोनी ने बताया कि उसके बच्चे को उल्टी दस्त की समस्या है। वह मंगलवार को दूसरी बार बच्चे को लेकर जिला अस्पताल आया है। अब तक अस्पताल के चिकित्सक उसे बाहर के मेडिकल स्टोर से 11 सौ की दवा लिख चुके हैं। इसके बाद भी बच्चे की तबीयत में सुधार नहीं हो रहा है।
अशोक कुमार भी अपनी बीमार पत्नी का इलाज कराने आया था। उसकी पत्नी को चक्कर आने की समस्या था। वह मनोचिकित्सक के कक्ष के बाहर दोपहर 12 बजे तक बैठा रहा, लेकिन डॉक्टर नहीं आए। अशोक का कहना है कि पहले भी वह आ चुका है, लेकिन उस दौरान भी चिकित्सक नहीं आए थे।

जिला अस्पताल में समय से चिकित्सकों को बैठने के निर्देश दिए गए हैं। कोशिश होती है कि ज्यादातर दवाएं अस्पताल से ही मरीजों को दी जाएं। अस्पताल में जीवन रक्षक दवाओं की कमी नहीं है। अगर बाहर से दवा लिखी जाती हैं तो गलत है। मामले का पता कर संबंधित चिकित्सक से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
डॉ. दीपक सेठ, सीएमएस
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