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Kaushambi News: चिप्स, बर्गर और पिज्जा बच्चों को बना रहे बीमार
Thu, 08 Jan 2026 12:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Thu, 08 Jan 2026 12:52 AM IST
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बालरोग विभाग में मरीज बच्चे का इलाज करते डॉक्टर। संवाद
बदलती जीवनशैली और जंक फूड की बढ़ती आदत बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रही है। चिप्स, बर्गर, पिज्जा, कोल्ड ड्रिंक और पैकेट बंद खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन बच्चों को बीमार बना रहे हैं। इसका असर मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में साफ दिखने लगा है। यहां पेट से जुड़ी समस्याओं के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
बालरोग विशेषज्ञ डॉ. विश्व प्रकाश ने बताया कि रोजाना ओपीडी में 100 से 120 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें से 40 से अधिक बच्चे मोटापा, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता, पाचन संबंधी समस्याएं और मानसिक परेशानियों से ग्रसित मिलते हैं। बच्चों में चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी, थकान और नींद की समस्या भी आम होती जा रही है।
चिकित्सकों का कहना है कि अत्यधिक तला-भुना और मीठा भोजन पाचन तंत्र को कमजोर करता है। इससे शरीर को आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पाते।
डॉ. विकेश दुबे ने बताया कि जंक फूड में अधिक मात्रा में वसा, नमक और शर्करा होती है, जो बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करती है। इससे गैस, कब्ज, पेट दर्द, एसिडिटी और बार-बार बीमार पड़ने जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। लंबे समय तक इसका सेवन करने से डायबिटीज जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
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डॉक्टरों का कहना है कि अभिभावकों में जागरूकता की कमी भी एक बड़ा कारण मानी जा रही है। बच्चों को समय पर संतुलित आहार नहीं मिल पा रहा है और मोबाइल व टीवी देखने के दौरान वे जंक फूड अधिक खाते हैं।
डॉक्टरों ने अभिभावकों को बच्चों के खानपान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि बच्चों को घर का ताजा भोजन, फल, हरी सब्जियां, दूध और दालें नियमित रूप से दी जानी चाहिए। साथ ही रोजाना शारीरिक गतिविधि और खेलकूद को बढ़ावा देना जरूरी है।
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बालरोग विशेषज्ञ डॉ. विश्व प्रकाश ने बताया कि रोजाना ओपीडी में 100 से 120 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें से 40 से अधिक बच्चे मोटापा, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता, पाचन संबंधी समस्याएं और मानसिक परेशानियों से ग्रसित मिलते हैं। बच्चों में चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी, थकान और नींद की समस्या भी आम होती जा रही है।
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चिकित्सकों का कहना है कि अत्यधिक तला-भुना और मीठा भोजन पाचन तंत्र को कमजोर करता है। इससे शरीर को आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पाते।
डॉ. विकेश दुबे ने बताया कि जंक फूड में अधिक मात्रा में वसा, नमक और शर्करा होती है, जो बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करती है। इससे गैस, कब्ज, पेट दर्द, एसिडिटी और बार-बार बीमार पड़ने जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। लंबे समय तक इसका सेवन करने से डायबिटीज जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
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डॉक्टरों का कहना है कि अभिभावकों में जागरूकता की कमी भी एक बड़ा कारण मानी जा रही है। बच्चों को समय पर संतुलित आहार नहीं मिल पा रहा है और मोबाइल व टीवी देखने के दौरान वे जंक फूड अधिक खाते हैं।
डॉक्टरों ने अभिभावकों को बच्चों के खानपान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि बच्चों को घर का ताजा भोजन, फल, हरी सब्जियां, दूध और दालें नियमित रूप से दी जानी चाहिए। साथ ही रोजाना शारीरिक गतिविधि और खेलकूद को बढ़ावा देना जरूरी है।