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भाजपा-बसपा में ‘बागियों’ ने बढ़ाई टशन
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Tue, 13 Sep 2016 11:58 PM IST
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इलाहाबाद में मायावती की हुई रैली से उत्साहित बसपाइयों को अपनों से ही तगड़ा झटका मिला है। दो दिन पहले बसपा से नाखुश कुछ चिह्नित लोगों ने भाजपा का दामन थामकर ऐसा सम्मेलन कराया कि सबकी आंखें फटी रह गई। बागियों के इस खेल से अचानक सदर सीट पर भाजपा-बसपा में सीधे टशन बढ़ गई है तो चायल व सिराथू सीट पर भी खींचतान बढ़ गई है। इसको देखते हुए बसपा ने डैमेज कंट्रोल करना शुरू कर दिया है।
स्वामी प्रसाद के बाद प्रदेश में बसपा से जाने वाले नेताओं की आंधी चल गई थी, लेकिन जिले के बसपा नेता इससे तनिक भी चिंतित नहीं थे। वह मुतमईन थे कि जिले में उनके कार्यकर्ता उनके साथ हैं, लेकिन ऐन वक्त भाजपा ने ऐसा दांव चला कि राजनीतिक पंडितों की नींद उड़ गई। भाजपा के साथ होने वाले दलित सम्मेलन को लेकर सुगबुगाहट थी, लेकिन बसपाईयों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया था। दलित सम्मेलन रविवार को जनक दुलारी डिग्री कालेज ओसा में हुआ तो भीड़ ने बसपा को चिंतित कर दिया। खास बात यह रही कि उन्होंने बसपा को ही निशाना बनाया।
बसपा का कोई भी कार्यकर्ता सम्मेलन में नहीं था। पार्टी से निकाले गए कुछ लोग ओहदे व पद के लिए ऐसा कर रहे हैं। इससे बसपा को कोई फर्क नहीं पड़ता है। बसपा का सिपाही चुनाव की तैयारी में पूरी ताकत से जुटा है, उसे कोई भ्रमित नहीं कर सकता है।
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हरीलाल बसपा जिलाध्यक्ष
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स्वामी प्रसाद के बाद प्रदेश में बसपा से जाने वाले नेताओं की आंधी चल गई थी, लेकिन जिले के बसपा नेता इससे तनिक भी चिंतित नहीं थे। वह मुतमईन थे कि जिले में उनके कार्यकर्ता उनके साथ हैं, लेकिन ऐन वक्त भाजपा ने ऐसा दांव चला कि राजनीतिक पंडितों की नींद उड़ गई। भाजपा के साथ होने वाले दलित सम्मेलन को लेकर सुगबुगाहट थी, लेकिन बसपाईयों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया था। दलित सम्मेलन रविवार को जनक दुलारी डिग्री कालेज ओसा में हुआ तो भीड़ ने बसपा को चिंतित कर दिया। खास बात यह रही कि उन्होंने बसपा को ही निशाना बनाया।
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बसपा का कोई भी कार्यकर्ता सम्मेलन में नहीं था। पार्टी से निकाले गए कुछ लोग ओहदे व पद के लिए ऐसा कर रहे हैं। इससे बसपा को कोई फर्क नहीं पड़ता है। बसपा का सिपाही चुनाव की तैयारी में पूरी ताकत से जुटा है, उसे कोई भ्रमित नहीं कर सकता है।
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हरीलाल बसपा जिलाध्यक्ष