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भगवान कुल नहीं, भक्तों का देखते हैं भाव
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bhagavat katha in the home of deputy cm keshava maurya
- फोटो : KAUSHAMBI
भगवान कुल नहीं, भक्तों का देखते हैं भाव
डिप्टी सीएम केशव के घर पिता की स्मृति में हो रही भागवत कथा सुनने को उमड़े भक्त
सिराथू। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के दिवंगत पिता श्याम लाल मौर्या की स्मृति में आयोजित भागवत कथा में आस्था की बरसात हो रही है। श्रद्धालुओं की भीड़ कथा सुनने के लिए उमड़ रही है। कथा के दूसरे दिन कथा वाचक नागेंद्र दत्त गौड़ ने भक्तों को भगवान का सानिध्य पाने के मूल मंत्र बताए। कहा कि भगवान कुल नहीं, बल्कि अपने भक्त का भाव देख प्राप्त होते हैं।
बृहस्पतिवार को कथा वाचक ने गीत एवं संगीत के माध्यम से बताया कि भगवान भाव के भूखे होते हैं। वे किसी का कुल देखकर नहीं प्रभावित होते हैं। भगवान को प्राप्त करने का एक मात्र तरीका श्रद्धा है। बिना भाव हर प्रकार की पूजा-अर्चना निरर्थक होती है। उन्होंने सेबरी का उदाहरण देते हुए कहा कि देखो यह सेबरी का प्रभु राम के प्रति अटूट प्रेम ही था कि भगवान ने उसके जूठे बेर तक खा लिए। कहा कि सेबरी बेर को चखकर दे रही थी, ताकि धोखे से प्रभु राम को खट्टे बेर न चले जाएं। भगवान राम अपनी भक्त की यह भावना देख उसके बेर को उसी प्रेम के साथ ग्रहण कर रहे थे, जितने प्रेम से वह उन्हें खाने के लिए दे रही थी। इससे भक्तों को सीख लेनी चाहिए। वे भगवान की पूजा अर्चना करने में किसी भी प्रकार के आडंबर में न पड़ें। सच्चे मन से प्रभु की पूजा करें। प्रभु की कृपा उन पर अवश्य होगी। अपरान्ह शुरू हुई भागवत कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा रही। इस दौरान डिप्टी सीएम की मां धनपत्ति देवी, भाई सुखलाल मौर्या, राजेंद्र प्रसाद मौर्या, योगेश मौर्या, रवि मौर्या, अशोक मौर्या समेत पारिवारिक जन भी मौजूद रहे।
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डिप्टी सीएम केशव के घर पिता की स्मृति में हो रही भागवत कथा सुनने को उमड़े भक्त
सिराथू। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के दिवंगत पिता श्याम लाल मौर्या की स्मृति में आयोजित भागवत कथा में आस्था की बरसात हो रही है। श्रद्धालुओं की भीड़ कथा सुनने के लिए उमड़ रही है। कथा के दूसरे दिन कथा वाचक नागेंद्र दत्त गौड़ ने भक्तों को भगवान का सानिध्य पाने के मूल मंत्र बताए। कहा कि भगवान कुल नहीं, बल्कि अपने भक्त का भाव देख प्राप्त होते हैं।
बृहस्पतिवार को कथा वाचक ने गीत एवं संगीत के माध्यम से बताया कि भगवान भाव के भूखे होते हैं। वे किसी का कुल देखकर नहीं प्रभावित होते हैं। भगवान को प्राप्त करने का एक मात्र तरीका श्रद्धा है। बिना भाव हर प्रकार की पूजा-अर्चना निरर्थक होती है। उन्होंने सेबरी का उदाहरण देते हुए कहा कि देखो यह सेबरी का प्रभु राम के प्रति अटूट प्रेम ही था कि भगवान ने उसके जूठे बेर तक खा लिए। कहा कि सेबरी बेर को चखकर दे रही थी, ताकि धोखे से प्रभु राम को खट्टे बेर न चले जाएं। भगवान राम अपनी भक्त की यह भावना देख उसके बेर को उसी प्रेम के साथ ग्रहण कर रहे थे, जितने प्रेम से वह उन्हें खाने के लिए दे रही थी। इससे भक्तों को सीख लेनी चाहिए। वे भगवान की पूजा अर्चना करने में किसी भी प्रकार के आडंबर में न पड़ें। सच्चे मन से प्रभु की पूजा करें। प्रभु की कृपा उन पर अवश्य होगी। अपरान्ह शुरू हुई भागवत कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा रही। इस दौरान डिप्टी सीएम की मां धनपत्ति देवी, भाई सुखलाल मौर्या, राजेंद्र प्रसाद मौर्या, योगेश मौर्या, रवि मौर्या, अशोक मौर्या समेत पारिवारिक जन भी मौजूद रहे।
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