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Kaushambi News: निजी उर्वरक की दुकानों पर मनमानी... किसानों की जेब पर पड़ रही भारी
Wed, 05 Nov 2025 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Wed, 05 Nov 2025 12:34 AM IST
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रामनरेश, किसान
रबी सीजन की प्रमुख फसलों गेहूं, सरसों, आलू की बोआई का समय नजदीक आते ही निजी उर्वरक की दुकानों में मनमानी तेज हो गई है। उनकी यह मनमानी किसानों की जेब पर भारी पड़ रही है। जिले में होने वाली कुल उर्वरक आपूर्ति का 60 फीसदी हिस्सा निजी विक्रेताओं के पास है। सहकारी समितियों, पीसीएफ के उर्वरक बिक्री केंद्रों और आईएफएफडीसी केंद्रों को मात्र 40 फीसदी ही आपूर्ति मिल पाती है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में उर्वरक बिक्री के लिए निजी क्षेत्र के 25 थोक विक्रेता पंजीकृत हैं। इनमें से 10 सक्रिय हैं। पश्चिम शरीरा, कुम्हियावां, बैरागीपुर, टेवां, मंझनपुर, सरायअकिल आदि बाजारों में 690 निजी दुकानों से उर्वरक की बिक्री होती है।
मौजूदा समय में 10 हजार मिट्रिक टन डीएपी और 11 हजार मिट्रिक टन एनपीके का स्टॉक उपलब्ध है। पर्याप्त मात्रा में यूरिया का भी भंडार है। निजी दुकानों में फास्फेटिक और अन्य उर्वरकों की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता होने के बावजूद सहकारी समितियों में खाद के लिए किसानों की लंबी लाइन लगती हैं। कई बार तो मारामारी तक हो जाती है।
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इसकी मुख्य वजह निजी दुकानों में किसानों से होने वाली उर्वरक विक्रेताओं की मनमानी वसूली है। किसानों का आरोप है कि निजी उर्वरक दुकानों में 1350 रुपये की कीमत वाली डीएपी की बोरी 1700 रुपये की बेची जा रही है। दुकानदार किसानों से ली गई रकम की रसीद भी नहीं देते हैं। आरोप है कि शिकायतों पर जिम्मेदार कार्रवाई नहीं करते हैं।
-सरसों और आलू की बोआई के लिए पश्चिमशरीरा बाजार से 1700 रुपये बोरी की डीएपी और 300 रुपये बोरी यूरिया खरीद कर लाया हूं। दुकानदार का कहना था कि यही भाव है, नहीं लेना है तो आगे जाओ। - रामनरेश, किसान
- दो दिन पहले कुम्हियावां बाजार में सरसों का बीज खरीदने गया था। खाद की दुकान से 3400 रुपये की दो बोरी डीएपी खरीदी है। दुकानदार से रसीद मांगा तो उसने कहा की खाद की रसीद नहीं मिलती है। - बृजेश कुमार किसान
जिले में 64 बहुउद्देशीय प्राथमिक सहकारी समितियों से किसानों को फास्फेटिक और अन्य उर्वरकों की निर्धारित दामों पर बिक्री की जा रही है। किसानों की शिकायत मिलने पर त्वरित समाधान का प्रयास किया जाता है। सभी समितियों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। - मोहसिन जमील, सहायक निबंध सहकारिता
जिले में 690 निजी उर्वरक विक्रेता और 25 थोक विक्रेता पंजीकृत हैं। इन्हें जारी की गई लाइसेंस के मुताबिक बोरी के ऊपर अंकित मूल्य से अधिक वसूलने का अधिकार नहीं है। इसके साथ ही प्रत्येक बिक्री पर किसानों को रसीद देना अनिवार्य है ।अभियान चलाकर निजी उर्वरक विक्रेताओं की जांच की जाएगी। गड़बड़ी मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - सुरुचि विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी
कृषि, सहकारिता और राजस्व विभाग की संयुक्त जांच टीमें गठित कर चेकिंग अभियान चलाने का आदेश जारी कर दिया गया है। किसानों से अधिक दाम वसूलने वाले दुकानदारों के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। - अमित पाल, डीएम
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कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में उर्वरक बिक्री के लिए निजी क्षेत्र के 25 थोक विक्रेता पंजीकृत हैं। इनमें से 10 सक्रिय हैं। पश्चिम शरीरा, कुम्हियावां, बैरागीपुर, टेवां, मंझनपुर, सरायअकिल आदि बाजारों में 690 निजी दुकानों से उर्वरक की बिक्री होती है।
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मौजूदा समय में 10 हजार मिट्रिक टन डीएपी और 11 हजार मिट्रिक टन एनपीके का स्टॉक उपलब्ध है। पर्याप्त मात्रा में यूरिया का भी भंडार है। निजी दुकानों में फास्फेटिक और अन्य उर्वरकों की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता होने के बावजूद सहकारी समितियों में खाद के लिए किसानों की लंबी लाइन लगती हैं। कई बार तो मारामारी तक हो जाती है।
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इसकी मुख्य वजह निजी दुकानों में किसानों से होने वाली उर्वरक विक्रेताओं की मनमानी वसूली है। किसानों का आरोप है कि निजी उर्वरक दुकानों में 1350 रुपये की कीमत वाली डीएपी की बोरी 1700 रुपये की बेची जा रही है। दुकानदार किसानों से ली गई रकम की रसीद भी नहीं देते हैं। आरोप है कि शिकायतों पर जिम्मेदार कार्रवाई नहीं करते हैं।
-सरसों और आलू की बोआई के लिए पश्चिमशरीरा बाजार से 1700 रुपये बोरी की डीएपी और 300 रुपये बोरी यूरिया खरीद कर लाया हूं। दुकानदार का कहना था कि यही भाव है, नहीं लेना है तो आगे जाओ। - रामनरेश, किसान
- दो दिन पहले कुम्हियावां बाजार में सरसों का बीज खरीदने गया था। खाद की दुकान से 3400 रुपये की दो बोरी डीएपी खरीदी है। दुकानदार से रसीद मांगा तो उसने कहा की खाद की रसीद नहीं मिलती है। - बृजेश कुमार किसान
जिले में 64 बहुउद्देशीय प्राथमिक सहकारी समितियों से किसानों को फास्फेटिक और अन्य उर्वरकों की निर्धारित दामों पर बिक्री की जा रही है। किसानों की शिकायत मिलने पर त्वरित समाधान का प्रयास किया जाता है। सभी समितियों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। - मोहसिन जमील, सहायक निबंध सहकारिता
जिले में 690 निजी उर्वरक विक्रेता और 25 थोक विक्रेता पंजीकृत हैं। इन्हें जारी की गई लाइसेंस के मुताबिक बोरी के ऊपर अंकित मूल्य से अधिक वसूलने का अधिकार नहीं है। इसके साथ ही प्रत्येक बिक्री पर किसानों को रसीद देना अनिवार्य है ।अभियान चलाकर निजी उर्वरक विक्रेताओं की जांच की जाएगी। गड़बड़ी मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - सुरुचि विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी
कृषि, सहकारिता और राजस्व विभाग की संयुक्त जांच टीमें गठित कर चेकिंग अभियान चलाने का आदेश जारी कर दिया गया है। किसानों से अधिक दाम वसूलने वाले दुकानदारों के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। - अमित पाल, डीएम

रामनरेश, किसान

रामनरेश, किसान